राष्ट्रपति पर प्रदर्शनकारियों ने फेंके अंडे

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चेक गणराज्य में साम्यवादी शासन ख़त्म करने वाली वेल्वेट रेवॉल्यूशन की 25वीं वर्षगांठ के मौक़े पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति मिलोस ज़ेमन पर अंडे फेंके हैं.

प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति मिलोस ज़ेमन से नाराज़ हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे रूस के प्रति ज़रूरत से ज़्यादा सहानुभूति रखते हैं.

वेल्वेट रेवॉल्यूशन की शुरुआत 17 नवंबर 1989 को तब हुई थी जब पुलिस ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर हमला किया था.

इसके बाद पूरे चेक गणराज्य में प्रदर्शनों का सिलसिला आरंभ हो गया था जिसने देश की साम्यवादी सरकार को उखाड़ फेंका था जिसके बाद वाक्लाव हेवल के नेतृत्व में नई सरकार बनी थी.

'उपनिवेश नहीं बनना चाहते'

चेक गणराज्य में कई लोगों को ये लगता है कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देने जैसे क्रांति के कुछ लक्ष्यों को राष्ट्रपति मिलोस ज़ेमन ने दरकिनार कर दिया है.

उन्हें इस बात की भी चिंता है कि पूर्व साम्यवादी ज़ेमन रूस और चीन से बहुत अधिक नज़दीकी रखते हैं.

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Image caption राष्ट्रपति मिलोस ज़ेमन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

यही वजह थी कि प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे- ''हम रूस का उपनिवेश नहीं बनना चाहते हैं.''

बीबीसी संवाददाता रॉब केमरोन के अनुसार, वेल्वेट रेवॉल्यूशन की 25वीं वर्षगांठ के मौक़े पर आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति मिलोस ज़ेमन ने कहा कि वर्ष 1989 में वेल्वेट रेवॉल्यूशन की शुरुआत छात्रों के प्रदर्शन की वजह से नहीं हुई थी.

उन्होंने तब पुलिस की बर्बरता को भी नज़र-अंदाज़ करने का प्रयास किया.

ज़ेमन को देश के कई मतदाताओं का समर्थन हासिल है. उनके समर्थकों के भी अब एक रैली करने की योजना है.

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