फर्गसन कांड: गोरे पुलिसवाले पर मुक़दमा नहीं

माइकल ब्राउन इमेज कॉपीरइट Arquivo pessoal

अमरीका के फ़र्गसन इलाके में एक काले निहत्थे नौजवान की पुलिस की गोली से हुई मौत के मामले में एक ग्रैंड ज्यूरी ने गोरे पुलिस अफ़सर के ख़िलाफ़ मुकदमा नहीं दायर करने का फ़ैसला किया है.

सेंट लुइस काउंटी के सरकारी वकील रॉबर्ट मैकॉलॉ ने इस फ़ैसले का ऐलान करते हुए कहा, "ग्रैंड ज्यूरी ने सभी सबूतों की जांच की, 60 गवाहों के बयान सुने और कई दिनों तक चले विचार-विमर्श के बाद ये फ़ैसला किया है."

मारे गए नौजवान माइकल ब्राउन के परिवार ने इस फ़ैसले पर निराशा जताई है लेकिन लोगों से हिंसा ना करने की अपील भी की है.

विरोध प्रदर्शन

इमेज कॉपीरइट Reuters

वहीं मिज़ूरी राज्य के फ़र्गसन इलाके में जमा लोगों ने पुलिस और न्याय व्यवस्था के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी शुरू कर दी है.

कुछ पत्थरबाज़ी भी हुई है और पुलिस की एक गाड़ी को नुकसान पुहंचाया गया है.

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे हैं.

घटना

इमेज कॉपीरइट AFP

नौ अगस्त को 18 साल के काले नौजवान माइकल ब्राउन एक दुकान से जबरन सिगार का पैकेट उठाकर निकल लिए थे जिसके बाद पुलिस को इत्तिला दी गई थी.

कुछ ही देर में पुलिस अफ़सर डैरन विल्सन के साथ उनकी झड़प हुई और कथित तौर पर विल्सन ने उन्हें गोली मार दी.

सरकारी वकील ने बताया कि जब पहली कहासुनी हुई उस वक्त पुलिस अफ़सर को ये नहीं मालूम था कि दुकान में हुई छीनाझपटी में माइकल ब्राउन शामिल थे.

लेकिन जब पुलिस के वायरलेस पर ख़बर आई तो उन्होंने ब्राउन के हाथों में सिगार का पैकेट देखा और फिर गोली चलाई.

लेकिन खुद को प्रत्यक्षदर्शी कह रहे कई लोगों ने मीडिया को बयान दिया था कि ब्राउन को बेवजह बिना किसी झड़प के ही गोली मारी गई.

नस्लवाद?

इमेज कॉपीरइट Reuters

ये मामला पुलिस और मुजरिम की झड़प से कहीं ज़्यादा नस्लवाद की बहस का रूप ले चुका है जिसमें कहा गया कि एक गोरे पुलिस अफ़सर ने एक निहत्थे काले नौजवान को गोली मार दी.

फ़र्गसन इलाके में 70 प्रतिशत आबादी काले लोगों की है और 30 प्रतिशत गोरे हैं लेकिन स्थानीय पुलिस बल के 53 सदस्यों में से सिर्फ़ तीन काले हैं.

ये भी बहस का बड़ा विषय बना है और साथ ही ग्रैंड ज्यूरी के गठन पर भी सवाल उठाए गए हैं क्योंकि 12 सदस्यों में से नौ गोरे हैं और तीन काले.

ओबामा की अपील

इमेज कॉपीरइट AFP

इस फ़ैसले के बाद राष्ट्रपति ओबामा ने राष्ट्र को संबोधित किया है और शांति बनाए रखने की अपील की है.

उन्होंने मीडिया से भी अपील की है कि वो ब्राउन के परिवारवालों, समुदाय के नेताओं और धार्मिक नेताओं की बातों पर ध्यान केंद्रित करें न कि टीवी पर बेहतर तस्वीरें दिखाने के चक्कर में उन गिने-चुने तत्वों पर जो ऐसे मौके पर हिंसा और लूटपाट की कोशिशें करते हैं.

काले समुदाय के कई अन्य नेता भी शांति की अपील कर रहे हैं लेकिन अमरीका के कई इलाकों में इस फ़ैसले से काफ़ी तनाव है.

रॉडनी किंग मामला

इमेज कॉपीरइट Reuters

इस मामले ने बहुतों के लिए 1992 के रॉडनी किंग मामले की याद ताज़ा कर दी है.

उस मामले में लॉस एंजेलस पुलिस को एक काले व्यक्ति रॉडनी किंग पर लाठियां और घूंसे बरसाते हुए वीडियो पर रिकार्ड कर लिया गया था लेकिन वहां भी पुलिस के ज़्यादातर अफ़सर बरी कर दिए गए थे.

उसके बाद लॉस एंजेलस में भारी दंगे हुए जिसमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 2000 से ज़्यादा घायल हुए थे.

लेकिन ये मामला पुलिस और मुजरिम की झड़प से कहीं ज़्यादा नस्लवाद की बहस के रूप में उभर कर सामने आया.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार