नेपाल में दी जाएगी हज़ारों पशुओं की बलि

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नेपाल में इन दिनों गढ़ीमाई का त्योहार चल रहा है. हर पांच साल पर मनाए जाने वाले इस दो दिन के त्योहार में हज़ारों पशुओं की बलि दी जाती है.

इस आयोजन को देखते हुए भारतीय सीमा के पास स्थित बारियापुर गांव के पास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

दो दिन तक चलने वाले इस आयोजन के दौरान यह गांव दुनिया का सबसे बड़ा बूचड़खाना बन जाएगा.

पशुओं के अधिकार

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पुश अधिकार कार्यकर्ताओं को श्रद्धालुओं को दूर रखने के लिए गांव और उसके आसपास क़रीब 12 सौ पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.

स्थानीय पुलिस अधिकारी लोकेंद्र मल्ल ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि इस आयोजन के दौरान शराब की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है.

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Image caption पिछले बार 2009 में आयोजित मेले में क़रीब तीन लाख पशुओं की बलि दी गई थी.

गढ़िमाई को शक्ति की देवी माना जाता है. उन्हें मानने वालों का मानना है कि बलि देने से उन्हें गढ़िमाई का आशीर्वाद मिलेगा.

पशुओं की बलि देने से गढिमाई मंदिर के चरो तरफ ख़ून ही ख़ून नज़र आता है.

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मंदिर में जिन भैंसों की बलि दी जाती है, उनके सिर को एक गड्ढे में रखा जाता है.

एएफ़पी के अनुसार 2009 में आयोजित मेले में एक अनुमान के मुताबिक़ तीन लाख पशुओं की बलि दी गई थी.

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