अमरीकी तरसते हैं लंबी छुट्टियों को

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ज़्यादातर कंपनियाँ चाहती हैं कि उसके कर्मचारी निर्धारित समय से ज़्यादा काम करें और छुट्टी वाले दिन भी काम पर आएँ.

मगर ऐसी भी एक कंपनी है जो अपने कर्मचारियों को जीवन का आनंद उठाने के लिए छुट्टी पर भेजती है और यह सुनिश्चित करती है कि उसके कर्मचारी छुट्टी लेते रहें.

एडमंड मैकोम्ब्स छह साल पहले सिडनी आए थे और अब इस जगह से जाने की उनकी फिलहाल कोई योजना नहीं है.

ऐसा नहीं है कि वहाँ के समुद्र तट और कॉफी हाउस से सजे बंदरगाहों की वजह से 33 वर्षीय यह व्यक्ति ऑस्ट्रेलिया छोड़कर नहीं जाना चाहता.

अलग माहौल

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मूल रूप से फ़्लोरिडा के रहने वाले एडमंड अगर इस जगह को अभी तक छोड़कर नहीं गए हैं तो इसका कारण यह है कि उनका बॉस चाहता है कि वह छुट्टी लेकर काम से दूर ज़िंदगी का आनंद उठाएँ.

मैकोम्ब्स का कहना है कि उसके सुपरवाइज़र सक्रिय रूप से उनकी छुट्टी के दिनों पर नज़र रखते हैं, इसलिए नहीं कि वह ज़्यादा छुट्टी न लें, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह नियमित रूप से छुट्टी लें.

सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में ऐसे लोगों को नौकरी पर रखा गया है जिन पर कर्मचारियों को ऑफ़िस से बाहर ले जाने की ज़िम्मेदारी है.

नियमित रूप से छुट्टियों पर जाने की इस संस्कृति ने एडमंड के अमरीकी दिमाग़ को हिला दिया था.

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एडमंड ने बताया, "ऑस्ट्रेलिया में लोग नौकरी छोड़कर घूमते-फिरते हैं और वास्तविक जीवन की गतिविधियों में शामिल होते हैं ताकि ऑफ़िस से दूर रहने का डर और इसके परिणामों की चिंता उन्हें न हो."

ऑस्ट्रेलिया में कर्मचारियों को क़ानूनन 20 दिनों के पूर्ण भुगतान के साथ छुट्टी की गारंटी मिली हुई है. एडमंड पिछले सिर्फ एक साल में फ़िजी, पश्चिम ऑस्ट्रेलिया और फ्लोरिडा की यात्रा कर चुके हैं. छह साल पहले जब वह अटलांटा के एक ट्रेड एसोसिएशन के बीमा और वित्तीय सेवाओं का कार्य करने वाली कंपनी में नौकरी करते थे तो हर वर्ष उन्हें सिर्फ 10 दिनों की छुट्टी मिलती थी.

उन दिनों को याद करते हुए एडमंड कहते हैं, "मुझे ये छुट्टियाँ अर्जित करनी पड़ती थीं और उसके बाद मैं इनका उपयोग कर पाता था. पर मुझे कभी भी एक बार में पाँच दिन से ज़्यादा छुट्टियाँ नहीं मिलीं."

बिना अवकाश वाला देश

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अमरीका दुनिया का एकमात्र ऐसा विकसित देश है जो पेड छुट्टियों को 'पर्क' मानता है न कि अधिकार. ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे देश अपने कर्मचारियों को पूरी तनख्वाह के साथ 30 दिनों की छुट्टियाँ हर साल देते हैं, जबकि अमरीका में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

इसका पूरा श्रेय अमरीका के फ़ेयर लेबर स्टैंडर्ड्स एक्ट को जाता है. 1938 का यह एक्ट अधिकतम साप्ताहिक कार्य घंटे, ओवरटाइम, न्यूनतम मजदूरी और बाल मजदूरी की निगरानी करता है पर भुगतान सहित छुट्टी की कोई बात नहीं होती.

इसका मतलब यह हुआ कि छुट्टियाँ किसी कर्मचारी और उसे नौकरी पर रखने वालों के बीच मोलभाव से तय होती हैं.

अधिकतर अमरीकी कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को वर्ष में एक बार पाँच से 15 दिनों का वेतन सहित अवकाश उपहार में देती हैं.

रिसर्च

अमरीका की सेंटर फ़ॉर इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च ने हाल में किए गए एक अध्ययन में पाया है कि निजी क्षेत्र में काम करने वाले चार में से एक कर्मचारी को किसी भी तरह का भुगतान वाला अवकाश प्राप्त नहीं होता.

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कैरी स्टीवेंस इन्हीं में से एक हैं. 31 वर्षीय स्टीवेंस वर्जीनिया के शैरलॉटविल्स में शराब बनाने वाली एक कंपनी में काम करती हैं, लेकिन उनका कहना है कि बीमारी के कारण काम से ग़ैरहाज़िर रहने पर कोई पैसा उन्हें नहीं मिलता है और न ही कोई छुट्टी मिलती है.

स्टीवेंस कहती हैं, "अगर मुझे भुगतान के साथ छुट्टी या बीमारी के दिन अवकाश मिलता भी है और अगर वो भुगतान प्रति घंटे के हिसाब पर आधारित है, तो भी इसकी न्यूनतम राशि ही हमें मिलती है."

अमरीका में न्यूनतम मजदूरी प्रति घंटा 7.25 डॉलर है, लेकिन जिन कर्मचारियों को टिप्स मिलते हैं उनको क़ानूनन प्रति घंटे कम भुगतान किया जा सकता है.

उन्होंने कंपनी में अपने छह वर्ष के कार्यकाल का हिसाब लगाकर बताया कि उसने हर साल पाँच दिन का अवकाश लिया है. इस छुट्टी के लिए भी कई महीने पहले इसकी सूचना देना आवश्यक है. इस छुट्टी का प्रयोग वह छोटी-छोटी यात्राओं के लिए करती है.

स्टीवेंस ने कहा, "मुझे छुट्टी की ज़रूरत है यह बात उस समय मुझे शिद्दत से महसूस होती है जब मुझे लगता है कि अपने ग्राहकों के लिए मुझमें धैर्य और सहिष्णुता नहीं बची है."

डर की संस्कृति

ऐसे अमरीकी जिनको भुगतान के साथ छुट्टी मिलती भी है, उनके लिए इन छुट्टियों का उपभोग करना बेहद कठिन होता है.

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कुल मिलाकर अमरीका में काम करने की संस्कृति ऐसी है जिसमें लोगों को अक्सर यह महसूस होता है कि अगर वो अवकाश की मांग करेंगे तो उन पर आलसी होने का कलंक लगेगा.

कई लोग तो हर साल अपना अर्जित अवकाश छोड़ देते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कार्य और जीवन के समीकरण का संतुलन बिगड़ता है जो कि दुनिया की उन्नत अर्थव्यवस्था वाले अन्य देशों में विरले ही पाया जाता है.

ग्लासडोर डॉट कॉम नामक एक करियर वेबसाइट का सर्वेक्षण तो आँखें खोल देने वाला है. इस सर्वेक्षण में पाया गया कि जिन अमरीकी कर्मचारियों को पिछले वर्ष पूर्ण भुगतान वाली छुट्टियाँ मिलीं वे अपनी 50 फ़ीसदी छुट्टियों का ही प्रयोग कर सके.

28 प्रतिशत कर्मचारियों ने ग्लासडोर को बताया कि उन्हें डर था कि छुट्टी लेने पर वे अपने काम में पीछे रह जाएंगे, जबकि 17 फ़ीसदी ने कहा कि छुट्टी लेने पर उन्हें अपनी नौकरी गँवाने का डर था. अन्य 19 फीसदी कर्मचारियों ने बताया कि वे लंबी छुट्टियाँ नहीं लेते क्योंकि प्रोमोशन की होड़ में वे अपने सहयोगियों के मुक़ाबले आगे रहना चाहते हैं.

क़ानून बदलने की लंबी लड़ाई

अमरीका में अक्सर किसी सांसद को पूर्ण भुगतान वाली छुट्टी दिलाने की मांग को पूरा कराने का बीड़ा उठाने की बात कहते हुए सुना जा सकता है. फ़्लोरिडा के कांग्रेस सदस्य एलन ग्रेयसन ने कई बार यह बीड़ा उठाया है.

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का मानना है कि काम के कारण होने वाले तनाव से कार्यालयों में अनुपस्थिति, अनुत्पादकता और स्वास्थ्य की समस्याएँ बढ़ती हैं, जिससे अमरीकी व्यवसाय को हर साल 344 अरब डॉलर की राजस्व हानि होती है.

उन्होंने 2013 में प्रतिनिधि सभा में एक विधेयक पेश किया, जिसका नाम था पेड वेकेशन एक्ट. इस अधिनियम का लक्ष्य अन्य बातों के अलावा 100 से ज़्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों को अपने पूर्णकालिक कर्मचारियों को साल में एक बार एक सप्ताह का भुगतान सहित अवकाश दिलाना है.

पिछले एक साल से यह अधिनियम कमेटी में लटका हुआ है. ग्रेयसन समर्थित इसी तरह का एक अन्य विधेयक 2009 में भी दम तोड़ चुका है.

कुछ कंपनियां उदार

कर्मचारियों को अवकाश मिले न मिले पर यहाँ के सांसद अन्य देशों की तरह ही अवकाश का पूरा आनंद उठाते हैं.

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कुछ अमरीकी कंपनियाँ अवकाश नहीं देने के अपने देश की आम धारणा को धता बताते हुए अपने कर्मचारियों को छुट्टियाँ देने में उदारता बरत रही हैं और यहाँ तक कि अपने कर्मचारियों को अवकाश लेने को कहती हैं.

वहीं, कांग्रेस के सदस्य ऐसे कुछ चुनिंदा अमरीकियों में शामिल हैं जो विकसित अर्थव्यवस्था वाले अन्य देशों में मिलने वाले अवकाशों की तरह लंबी छुट्टियाँ लेते हैं.

एडमंड कहते हैं, "अगर मैंने अमरीका छोड़ा नहीं होता तो महीने भर के अवकाश की कल्पना कभी भी मेरे सोच का हिस्सा नहीं बन पाता."

वे कहते हैं, "पर आस्ट्रेलिया में यह कोई बड़ी बात नहीं थी – यह सामान्य बात थी और प्रत्याशित भी."

अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए बीबीसी कैपिटल पर जाएं.

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