भारत-चीन-जापान का पेचीदा 'लव ट्राएंगल'

नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग इमेज कॉपीरइट AFP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन और जापान की आपसी रंजिश का फायदा उठाते हुए बड़ी ही चालाकी से भारत के परिवहन क्षेत्र के लिए कुछ बेहतरीन सौदे झटक लिए थे.

इसके लिए उनकी खूब सराहना भी हुई लेकिन पिछले कुछ महीने के भीतर ही चीजें बदल गई हैं और अब चीन त्योरियां चढ़ाता हुआ दिख रहा है.

अब चीन, भारत के नेताओं पर नई दिल्ली से चेन्नई को जोड़ने वाली तेज रफ़्तार वाली रेलवे लाइन बनाने की पेशकश कबूल करने के लिए दबाव डाल रहा है.

धीमी रफ़्तार से खुल रहे भारत के रेलवे कारोबार पर असर बनाने के लिए अगर ये चीन और जापान के बीच व्यावसायिक प्रतिस्पर्द्धा भर की बात होती तो चीजें बहुत आसान होतीं.

नाज़ुक संतुलन

इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

लेकिन यहां फ़ायदे से कहीं ज़्यादा चीजें दांव पर लगी हुई हैं. दोनों ही देश ये नहीं चाहते कि दूसरे का कदम भारत के यातायात बाज़ार में पड़े.

भारत के सामने अब चुनौती एक बेहद ही नाज़ुक संतुलन को साधने की है.

इस कहानी की शुरुआत एक सितंबर को टोक्यो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो अबे की बैठक के दौरान शुरू हुई थी.

शिंज़ो अबे ने मुंबई को अहमदाबाद से जोड़ने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना में सहयोग पर सहमति दी है.

बुलेट ट्रेन

इमेज कॉपीरइट Reuters

60 हज़ार करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली ये बुलेट ट्रेन 300 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से चलेगी.

इस रफ़्तार का मतलब ये भी हुआ कि मुंबई से अहमदबाद जाने में लगने वाला वक्त आठ घंटे से घटकर तीन घंटे ही रह जाएगा.

वापसी की फ़्लाइट से मोदी जब नई दिल्ली लौट रहे थे तो कूटनीतिक हलकों में ये कहा जा रहा था कि उनके नेतृत्व में न केवल पुरुषार्थ है.

बल्कि वे एक चतुर नेता भी हैं जो चीन और जापान की प्रतिद्वंदिता से फ़ायदा उठाने का हुनर जानते हैं.

सीमा विवाद

इमेज कॉपीरइट AP

वास्तव में चीन का रुख़ इन ख़बरों से थोड़ा नाराज़ लग रहा है कि जापान हिमालय के क्षेत्र में एक सरहदी सड़क की परियोजना पर काम कर रहा है.

उसने भारत को चेतावनी दी है कि वह संवेदनशील सीमा विवाद को और अधिक जटिल न बनाए.

चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "किसी अंतिम समझौते पर पहुंचने से पहले हमें उम्मीद है कि भारत ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे हालात और बिगड़े."

अंतिम समाधान

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

उन्होंने कहा, "हम दोनों पक्षों को सरहदी इलाकों में अमन और शांति की मिलकर हिफ़ाज़त करनी चाहिए और सीमा विवाद के अंतिम समाधान के लिए बेहतर माहौल बनाने की दिशा में काम करना चाहिए."

सूत्रों का कहना है कि चीन के चिंतित नौकरशाह भारत और जापान के समझौते की गहरी छानबीन कर रहे हैं और उनकी दो प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.

उसने जापान से अरुणाचल प्रदेश के विवादित इलाकों में सड़क बनाने की परियोजना से उसके जुड़ने का मुद्दा उठाया है और चीन के दावे वाले इलाकों में न फंसने को लेकर आगाह भी किया है.

सरहदी सड़क

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हॉन्ग ली ने हाल ही में कहा था, "हमने परियोजना के बारे में पूछताछ की है. जापान ने साफ़ किया है कि भारत के साथ उसका सहयोग विवादित सरहदी इलाके में नहीं है."

बीजिंग में हुए एपेक देशों की बैठक के दौरान 10 नवंबर को शिंज़ो अबे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बीच इस मुद्दे पर भी बात हुई होगी.

इससे पहले भारत की मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि सरकार ने अरुणाचाल प्रदेश समेत अलग अलग राज्यों से होकर गुजरने वाली 1800 किलोमीटर लंबी सरहदी सड़क बनाने का ठेका जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) को देना चाहती है.

मोदी का प्लान

इमेज कॉपीरइट Getty

चीन ने नई दिल्ली और चेन्नई के बीच तेज रफ़्तार की रेल लाइनें बिछाने का 3.8 अरब डॉलर का ठेका उसकी कंस्ट्रक्शन कंपनियों को देने के लिए भारत को मनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं.

यह जापान के साथ उसकी तीव्र प्रतिस्पर्द्धा का नतीजा है. चीन को भारत से जितनी उम्मीद है, उसके एक तिहाई के बराबर जापानी कंपनियों को दी जा रही मुंबई-अहमदाबाद परियोजना है.

सीधी सी बात ये है कि चीन और जापान की अदावत का फ़ायदा उठाने की मोदी की वास्तविक योजना काम नहीं कर रही है.

बीजिंग का असर

इमेज कॉपीरइट AP

उनके हाथ में अब ज़्यादा कुछ रह नहीं गया है क्योंकि जापान और चीन के रिश्तों पर बीजिंग का असर बढ़ रहा है और अमरीका ने भी अपने साथी टोक्यो के पक्ष में बोलना छोड़ दिया है.

बदली हुई परिस्थितियों का सबसे बेहतरीन उदाहरण एपेक बैठक के दौरान की तस्वीरे हैं.

उन तस्वीरों से पता चलता है कि शी जिनपिंग ने शिंजो अबे को औपचारिक तौर पर हाथ मिलाने के लिए भी इंतजार कराया.

एक दूसरी तस्वीर में बराक ओबामा की तरह शिंज़ो अबे और दूसरे विश्व नेताओं को मेजबान चीन की ओर से दिए गए पारंपरिक लिबास पहने हुए दिखते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार