वाकई ख़तरनाक है उड़ान में मोबाइल चलाना?

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इस दावे में कितना सच है कि मोबाइल और अन्य इलैक्ट्रॉनिक गैजेट संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बाधित करते हैं?

मैं एक गलती कबूल करती हूं जो अभी तक राज़ था. मार्च में मेरा विमान हीथ्रो हवाई अड्डे से उड़ने की तैयारी में था, तभी एक विमान में घोषणा हुई कि सभी यात्री अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद करें.

लेकिन बात मानने की बजाय मैंने ठीक उलट अपना स्पार्टफोन जेब में और अंदर घुसा दिया.

मुझे काम के सिलसिले में अति महत्वपूर्ण मैसेज देखने थे, और निश्चित तौर पर मेरा छोटा सा हैंडसेट विमान को आसमान से ज़मीन पर गिराने की ताक़त तो नहीं रखता था.

क्या इसमें इतनी ताक़त थी?

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ऐसा लगता है, मैं ही ऐसा करने वालों में अकेली नहीं थी.

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ताज़ा सर्वेक्षण में पता चला है कि हर 10 अमरीकी हवाई यात्रियों में से चार यात्रियों ने गैजेट्स को बंद न करना कबूल किया है.

पूरी दुनिया में विमान के 3,000 मीटर (10 हज़ार फ़ीट) से नीचे उड़ने पर विमान में मोबाइल या गैजेट्स के प्रयोग की अनुमति नहीं है.

यहां तक कि इन्हें फ्लाइट मोड में भी नहीं रखा जाना चाहिए. फ्लाइट मोड वह स्थिति है जो सिगनल्स का ट्रांसमिशन रोकती है.

इस ऊंचाई के बाद लेपटॉप और म्यूज़िक प्लेयर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन मोबाइल फोन को बंद ही रखा जाना चाहिए.

हमें बताया गया है कि ये नियम अहम हैं और मोबाइल का सिगनल विमान के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बाधित कर विमान को ख़तरनाक अंजाम तक पहुंचा सकता है.

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सिगनल को बाधित करने की यह आशंका इस तथ्य से उभरी है कि इंटरनेट से जुड़े गैजेट्स या मोबाइल फोन नेटवर्क रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करते हैं.

विमान से ज़मीन पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क बनाए रखने के लिए सैकड़ों इलेक्ट्रॉनिक आधारित सिस्टम होते हैं, जिन्हें एवियोनिक्स कहा जाता है. इनमें से कुछ कॉकपिट में लगे उपकरणों के बीच संचार का काम करते हैं.

सिगनल्स में दखल

यह मसला सिर्फ़ मोबाइल से ही जुड़ा हुआ नहीं है. किंडल्स, आईपॉड्स, लेपटॉप, हाथ से खेले जाने वाले वीडियो गेम- ये सभी रेडियो तरंगे छोड़ते हैं.

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यदि इनकी फ्रीक्वेंसी एवियोनिक्स के आस-पास हुई तो ये सिगनल्स को प्रभावित कर सकती हैं. इससे रेडार, कम्युनिकेशन और टक्कर से बचने की तकनीकी पर असर पड़ सकता है.

हालाँकि ऐसा कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है जिससे साबित हो कि इन उपकरणों के चलते सिगनल बाधित होने से विमान दुर्घटना हुई. लेकिन विमान की दुर्घटना के कई कारण हो सकते हैं.

फ्लाइट रिकॉर्डर शायद ये पता नहीं लगा सकते कि विमान का अहम सिस्टम यात्री के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के सिगनल से खराब हुआ या किसी और वजह से.

कुछ अहम संकेत

ऐसे किस्से बहुत हैं, जिनसे साबित होता है कि इस जोखिम पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है.

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  • अमरीकी एविएशन सेफ्टी रिपोर्टिंग सिस्टम के अनुसार विमानों में 50 ऐसे मामलों की एक रिपोर्ट जनवरी 2013 में प्रकाशित हुई. ये मामले यात्रियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के चलते हुए हैं.
  • विमान के उड़ते वक़्त फ़र्स्ट ऑफ़िसर ने कंपास सिस्टम में गड़बड़ी बताई. जब यात्रियों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद करने का आग्रह किया गया तो कंपास सिस्टम सामान्य स्थिति में आ गया.
  • वर्ष 2006 में आंकड़ों के विश्लेषण में 125 मामलों में इलेक्ट्रॉनिक सिगनलों को बाधा पहुंचने का पता चला, इनमें से 77 मामले तो बेहद जोखिम भरे थे.
  • एक घटना में एक यात्री के पोर्टेबल डीवीडी प्लेयर को बंद करने के साथ ही नेविगेशन उपकरण में 30 डिग्री की त्रुटि तत्काल ठीक हो गई.
  • वर्ष 2003 से 2009 के दौरान इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) को 75 ऐसी घटनाओं की जानकारी मिली, जिनमें विमान पायलट ने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सिगनल से संभावित बाधा की शिकायत की थी.
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दरअसल, ट्रांसमिशन एक प्रक्रिया है, जिसमें पहले सिगनल्स को सैटेलाइट को भेजा जाता है और फिर सैटेलाइट इन्हें ज़मीन के नेटवर्क पर भेजता है.

क्या है रास्ता?

एयरोमोबाइल और ऑनएयर उड़ान के दौरान इस्तेमाल होने वाले ऐसे मोबाइल फ़ोन सिस्टम हैं जो विमान पर मौजूद छोटे बेस स्टेशन का इस्तेमाल करते हैं जिन्हें पीकोसेल्स कहा जाता है. ये ट्रांस्मिशन को प्रोसेस कर उपग्रह को भेजता है और फिर उसे धरती पर भेजा जाता है जैसा आपकी रोमिंग सर्विस में होता है.

कुछ एयरलाइंस ने अब ऐसे सिस्टम का उड़ान के दौरान इस्तेमाल शुरु कर दिया है.

एयरोमोबाइल के मुख्य कार्यकारी केविन रोजर्स का कहना है कि अभी यह कहना मुश्किल है कि मोबाइल और गैजेट्स विमानों के सिगनल्स को बाधित करते हैं.

रोजर्स कहते हैं, "कई फोन हमेशा ऑन रहते हैं. अगर मोबाइल या आईपैड से विमान का सिस्टम बाधित होने का जोखिम होता तो लोगों को उन्हें साथ लेकर विमान पर चढ़ने की इजाज़त ही न होती.

हालाँकि, कई देशों का विमानन प्रशासन इससे सहमत नहीं है.

यह जान लेने के बाद कि यह साबित करना बहुत मुश्किल है कि मोबाइल और गैजेट्स से विमान सुरक्षित हैं, मैं कोशिश करूँगी कि मेरा मोबाइल उड़ान के दौरान ठीक से स्विच ऑफ़ रहे.

मैं नहीं चाहती कि जब मैं छुट्टियां मनाने के लिए किसी तेज़ धूप वाली जगह पर जा रही हूं तो मेरी वजह से विमान किसी बारिश वाली सर्द जगह या कहीं और ही उतरने को मजबूर हो जाए.

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