रियोः पुलिस की सुरक्षा के लिए प्रदर्शन

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ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में पुलिस अधिकारी और उनके रिश्तेदार सैंकड़ों की संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं.

यहां पुलिस के ख़िलाफ़ अपराध रोकने के लिए कड़े क़ानून बनाने की मांग करते हुए प्रदर्शन हो रहे हैं.

2014 में सिर्फ़ रियो में ड्यूटी करते वक़्त 80 पुलिस अधिकारियों की मौत हुई. ज़्यादातर मौतें आपराधिक गिरोहों से संघर्ष के दौरान हुई.

क्या ख़ौफ़ सता रहा है ब्राज़ील को?

काला लिबास

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दरअसल रियो में 2008 में फ़ीफ़ा विश्व कप की मेज़बानी के दौरान पेसिफ़ाइंग पुलिस यूनिट प्रोग्राम शुरू हुआ था.

इसका मक़सद शहर की ग़रीब बस्तियों में ख़तरनाक आपराधिक गिरोहों से निपटने में पुलिस की मदद करना है.

प्रदर्शन के दौरान कोपाकबाना समुद्र तट पर रेत में क्रॉस के साथ मृत पुलिस अधिकारियों के नामों की तख़्तियां लगाई गईं.

गोली लगना 'बच्चा पैदा करने जैसा है'

पुलिस के ख़िलाफ़ अपराधों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने रविवार को काला लिबास पहनकर जुलूस निकाले.

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ब्राज़ील के लोगों का मानना है कि जहां पुलिस की क्रूरता मीडिया में सुर्खि़यां बटोरती है, वहीं पुलिस अफ़सर के ख़िलाफ़ हिंसा पर चर्चा नहीं होती.

पर आलोचक कहते हैं कि कुछ पुलिस अधिकारी बेहद क्रूर तरीक़े से पेश आते हैं.

ओलंपिक 2016

फ़्लाविया लूजादा नाम की एक प्रदर्शनकारी ने 'एक्स्ट्रा' अख़बार को बताया कि ड्यूटी के दौरान मरने वाले अधिकारियों को पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिलती.

ब्राज़ील के वो लोग जो फ़ुटबॉल से कोसों दूर हैं

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Image caption साल 2014 में सिर्फ रियो में ड्यूटी के दौरान 80 पुलिस अधिकारियों की मौत हुई.

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि 2016 ओलंपिक की मेज़बानी कर रहे रियो की प्रमुख बस्तियों में सुरक्षा प्रबंध चाक-चौबंद किया जाए.

ब्राज़ील सार्वजनिक सुरक्षा फ़ोरम के मुताबिक़ पिछले पांच साल में पुलिस की गोली से 11,000 लोग मारे गए हैं. औसतन एक दिन में छह मौत.

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