सिडनी बंधक कांड से क्या मिला सबक?

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सिडनी में कई लोगों को बंधक बनाए जाने की घटना में पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसी के लोग पहले कार्रवाई करने से हिचक रहे थे, शायद उनके पास पूरी जानकारी नहीं थी.

लेकिन समय के साथ इस तरह के मामलों में जो मानक कार्रवाई होती है, उसे वो करने में कामयाब रहे.

सिडनी: संकट ख़त्म, हमलावर समेत तीन की मौत

इस पूरे मामले में एक अहम बात यह है कि मीडिया ने इस घटना पर शायद ज़रूरत से ज़्यादा फ़ोकस किया.

कुछ ही महीने पहले कनाडा में संसद पर हमला और उसके बाद ये घटना, दोनों मामले गंभीर हैं.

ऐसे में, हमें इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए और ऐसी स्थिति में एक समान मीडिया नीति लागू करनी चाहिए.

लोकल इंटेलिजेंस की कमी

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भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो नवंबर 2008 के मुंबई हमले के दौरान मीडिया के फोकस से कई तरह के नकारात्मक प्रभाव हुए थे.

हम उस घटना के बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई सबक नहीं सीख पाए.

सिडनी के बंधक कांड के बाद इस सबक को सबसे पहले सीखना होगा.

हालाँकि इस तरह की घटनाओं में बंधकों को छुड़ाना सबसे प्राथमिक उद्देश्य होता है और सिडनी का प्रशासनिक तंत्र इसमें सफल रहा है.

मुंबई के हमले से इसकी तुलना नहीं हो सकती है, लेकिन हुकूमत से जिस प्रशासनिक पहल की ज़रूरत होती है, उस लिहाज से सिडनी ने बेहतर किया.

हालाँकि इस घटना से वहां की लोकल इंटेलिजेंस की कमी भी उभर कर सामने आई है. इसके चलते ही इस घटना को समय रहते नहीं रोका जा सका.

फिलहाल, ये कोई बहुत बड़ी चरमपंथी साज़िश नज़र नहीं आ रही है.

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हालाँकि इस मामले में और भी जांच पड़ताल की जानी चाहिए कि ऐसा किस उद्देश्य से किया गया, तब तक इसे सिडनी के एक मामले के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.

(बीबीसी संवाददाता समीरात्मज मिश्र से बातचीत पर आधारित)

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