विवेक मूर्ति बने अमरीका के सर्जन जनरल

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बंदूक़ लॉबी के भारी विरोध के बावजूद डॉक्टर विवेक मूर्ति अमरीका के सबसे कम उम्र के और भारतीय मूल के पहले सर्जन जनरल बन गए हैं.

सोमवार शाम अमरीकी सेनेट ने क्रिसमस की छुट्टियों से ठीक पहले आख़िरकार उन्हें अमरीकी स्वास्थ्य सेवा प्रमुख का पद सौंप दिया. सर्जन जनरल को एक तरह से पूरे राष्ट्र का डॉक्टर भी कहा जाता है.

माना जा रहा है कि अगर उनके नाम पर वोटिंग अभी नहीं होती तो जनवरी में रिपबलिकन बहुमत वाले सेनेट में उनके नाम को मंज़ूरी मिलना असंभव होता.

ज़्यादातर रिपब्लिकंस और कुछ डैमोक्रेट्स भी 37 साल के डॉक्टर मूर्ति की इस पद पर नियुक्ति के ख़िलाफ़ थे क्योंकि उन्होंने दो साल पहले एक ट्वीट के ज़रिए अमरीका में बंदूक़ रखने के हक़ के ख़िलाफ़ बयान दिया था.

राष्ट्रपति ओबामा की तरफ़ से मनोनीत किए जाने के एक साल बाद तक उनके नाम पर ज़बरदस्त खींचतान चलती रही और कई जगह तो कांग्रेस के मिडटर्म चुनावों में भी इस पर बहस हुई.

जिन राज्यों में बंदूक़ लॉबी काफ़ी मज़बूत है, वहां उनके नाम पर ख़ासा विरोध हुआ है.

बंदूक़ के ख़िलाफ़

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अपने ट्वीट में मूर्ति ने कहा था, “बंदूक़ की राजनीति खेल रहे नेताओं से थक चुका हूं. नेशनल राइफ़ल एसोसिएशन के डर से वो लोगों की जान ख़तरे में डाल रहे हैं. बंदूक़ एक तरह से स्वास्थ्य समस्या है.”

वैसे तो सर्जन जनरल के पास ऐसे अधिकार नहीं होते कि वो अपने दम पर नीतियां बदल सकें पर स्वास्थ्य से जुड़ी बहस को वो एक अहम दिशा दे सकते हैं.

अस्सी के दशक में सर्जन जनरल रहे सी एवरेट कूप ने सिगरेट के ख़िलाफ़ बड़ी मुहिम शुरू की थी. एड्स का प्रसार रोकने के लिए सेक्स शिक्षा और कंडोम के इस्तेमाल की वकालत करके उन्होंने कंज़रवेटिव अमरीका में एक बड़ा बवाल खड़ा कर दिया था.

बंदूक़ लॉबी को डर है कि मूर्ति भी बंदूक़ों के ख़िलाफ़ बहस तेज़ कर सकते हैं.

संयोग यह भी है कि उनकी नियुक्ति न्यूटाउन शहर के सैंडी हुक स्कूल में क़त्लेआम की दूसरी बरसी पर हुई है. न्यूटाउन के एक स्कूल में एक सिरफिरे बंदूक़धारी ने 20 बच्चों और छह शिक्षकों को गोली मारकर ख़ुदकुशी कर ली थी.

ट्विटर पर मुहिम

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पिछले दिनों स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई संस्थाओं ने उनकी नियुक्ति के हक़ में भी अभियान चलाया है. ट्विटर पर उनके लिए #TopDocNow के नाम से भी मुहिम चलाई गई.

मूर्ति के माता-पिता कर्नाटक से हैं और उनका जन्म ब्रिटेन में हुआ था. वो तीन साल के थे जब उनके माता-पाता अमरीका आ गए.

मूर्ति ने हार्वड और येल विश्वविद्यालय से मेडिकल शिक्षा प्राप्त की है. साथ ही स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन पर येल से ही एमबीए भी किया है.

ओबामा प्रशासन में किसी भारतीय मूल के अमरीकी के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा ओहदा है.

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