फ़िल्म से अमरीकी सुरक्षा को ख़तरा?

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अमरीका ने सोनी पिक्चर्स की हैकिंग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया है. व्हाइट हाउस प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने कहा है कि अमरीका इसे गंभीर मसला मानता है.

अमरीका के कई सिनेमा हॉलों ने सोनी पिक्चर्स की कॉमेडी फ़िल्म 'द इंटरव्यू' को रिलीज़ करने से मना कर दिया है. इसमें उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की हत्या का प्लॉट दिखाया गया है.

एफ़बीआई इस मामले की पड़ताल कर रही है और साइबर हमले और उत्तर कोरिया के बीच संबंध की जांच कर रही है. हालांकि व्हाइट हाउस ने अभी तक उत्तर कोरिया का नाम नहीं लिया है.

ज़िम्मेदार कौन?

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व्हाइट हाउस प्रवक्ता जॉन अर्नेस्ट ने कहा, ‘‘कुछ ऐसा है जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर मामला माना गया है. इस बात के सुबूत हैं जो इशारा करते हैं कि एक बेहद चालाक शख़्स ने दुर्भावना के साथ विध्वंसक गतिविधि चलाई है. एफ़बीआई और जस्टिस डिपार्टमेंट की जांच एजेंसियां पूरी गंभीरता के साथ इसका पता लगाने में जुटी हैं. इसी के चलते व्हाइट हाउस में रोज़ कई बैठकें हो रही हैं.’’

हालांकि जोश अर्नेस्ट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की कि इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है.

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इस बीच सोनी ने दुनियाभर में फ़िल्म ‘द इंटरव्यू’ रिलीज़ न करने का ऐलान कर दिया है. हॉलीवुड में कई लोगों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला क़रार देते हुए सोनी कंपनी के इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है.

हैकरों ने सोनी के कंप्यूटरों से संवेदनशील सूचनाएं चुरा ली थीं और बाद में लोगों को फ़िल्म न देखने की चेतावनी दी थी.

‘दुनिया डर जाएगी’

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हैकरों ने 11 सितंबर 2001 के चरमपंथी हमलों का हवाला देते हुए कहा था कि अगर फ़िल्म दिखाई गई तो ‘दुनिया डर जाएगी.’

‘द इंटरव्यू’ में जेम्स फ्रांको और सेठ रॉजेन ने दो पत्रकारों का किरदार निभाया है जिन्हें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से मिलने का मौक़ा मिला है. सीआईए इन दोनों को किम को मारने को कहती है.

फ़िल्म इस क्रिसमस पर रिलीज़ होनी थी.

नवंबर में सोनी के कंप्यूटरों पर हुए हमले के बाद उसकी आने वाली फ़िल्में और कर्मचारियों की निजी सूचनाएं ऑनलाइन कर दी गई थीं.

हैकिंग

हैकरों ने हज़ारों कर्मचारियों के वेतन और सोशल सिक्योरिटी नंबर तक जारी कर दिए थे. इस महीने की शुरुआत में उत्तर कोरिया ने ख़ुद को इस हमले से अलग बताया था लेकिन इस हमले को ‘सही क़दम’ बताया था.

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उत्तर कोरिया की सरकारी केसीएनए न्यूज़ एजेंसी ने देश की सर्वोच्च सैन्य संस्था के हवाले से कहा था कि प्योंगयांग के हमले के पीछे होने की बात ‘पूरी तरह से अफ़वाह’ है.

हालांकि इसमें अमरीका को चेतावनी दी गई थी कि उत्तर कोरिया के ‘पूरी दुनिया में बड़ी तादाद में समर्थक और हमदर्द’ हैं जिन्होंने यह हमला किया हो सकता है.

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