तालिबान: ईंट का जवाब पत्थर से देंगे

पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले को लेकर तालिबान के अलग-अलग धड़ों में फूट पड़ती नज़र आ रही है.

अफ़ग़ान तालिबान और तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से अलग हुए गुट जमात-अल-हरार ने इस हमले का विरोध किया था.

तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से अलग हुए एक अन्य गुट महसूद तालिबान ने इस हमले का समर्थन किया है.

तालिबान को कहां से ताक़त मिलती है?

महसूद तालिबान के प्रवक्ता आज़म तारिक़ ने बीबीसी उर्दू को किसी अज्ञात स्थान से टेलीफ़ोन पर बताया कि 16 दिसंबर को आर्मी स्कूल पर होने वाला हमला सैन्य नेतृत्व लिए एक संदेश था.

16 दिसंबर को हुए हमले की ज़िम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने ली थी.

'सेना के तोहफ़े'

महसूद तालिबान के प्रवक्ता आज़म तारिक़ ने आरोप लगाया कि सेना देश के भिन्न शहरों में महसूद तालिबान के लोगों को मार कर उनके शरीर तालिबान को 'तोहफ़े' में दे रही है.

Image caption मेहसूद तालिबान पाकिस्तान में एक बड़ा सरकार विरोधी संगठन है

उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथियों को जेलों से निकालकर क़त्ल किया जा रहा है और उनके शरीर कराची की सड़कों से मिल रहे हैं.

आज़म तारिक के अनुसार ऐसी स्थिति में महसूद तालिबान इस बात पर मजबूर हैं कि कोई ऐसा कदम उठाएं कि सरकार को ईंट का जवाब पत्थर से मिले.

महसूद तालिबान के प्रवक्ता ने कहा अगर ड्रोन और जेट विमानों के हमलों में उनके बाल बच्चों को टुकड़े किया जा सकता है तो फिर सुरक्षाबल भी जवाबी हमले लिए तैयार रहे.

एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने इस बात की भी समझाया कि उनका समूह पेशावर में आर्मी स्कूल पर हमले में शामिल नहीं था.

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