शार्ली एब्डो: भड़काऊ कार्टून, उत्तेजक शीर्षक

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फ़्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका 'शार्ली एब्डो' पर पहले भी हमले हो चुके हैं, लेकिन ताज़ा हमला सबसे घातक था.

मूलतः डेनिश अख़बार 'जाइलैन्ड्स-पोस्टेन' में छपे पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों के पुनर्प्रकाशन पर 2006 में कई मुसलमान इससे नाराज़ हो गए थे.

नवंबर 2011 में पत्रिका के कार्यालय पर बम धमाका हुआ था जब पत्रिका ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून 'शरिया एब्डो' शीर्षक से छापा था.

इसका ताज़ा ट्वीट चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट के मुखिया अबू बक़र अल-बग़दादी पर एक कार्टून था.

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पत्रिका के संपादक स्टीफ़न शारबोनीयर को मौत की धमकियां मिली हैं और पुलिस सुरक्षा भी.

क्या है शरली एब्डो

पेरिस में बीबीसी संवाददाता ह्यू स्कोफ़ील्ड कहते हैं कि 'शार्ली एब्डो' फ़्रांसीसी पत्रकारिता की सम्मानित परंपरा का ही एक भाग है.

इसमें वामपंथी उग्रता के साथ भड़काऊ कटूक्तियां होती हैं जो अक्सर निर्लज्जता की सीमा तक पहुंच जाती हैं.

चाहे शाही परिवार हो या फिर वैर्साय के राजदरबार में भ्रष्टाचार और यौनाचार के क़िस्से, इस पत्रिका के निशाने से कोई नहीं बचा है.

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लेकिन सभी कार्टूनों की एक ही भावना होती है- थोड़ा फूहड़ मज़ाक, थोड़ा अपनी राजनीति का प्रचार.

स्कोफ़ील्ड के अनुसार शार्ली एब्डो के खिलाफ़ विवाद को सुलगाने का ताज़ा कारण था पैगंबर मोहम्मद के अस्तित्व का मज़ाक उड़ाने का इसका फ़ैसला.

सबका एक नाम

यह पत्रिका कभी बड़ी संख्या में नहीं बिकी और 1981 से 10 साल तक संसाधनों की कमी के चलते इसका प्रकाशन रुका रहा.

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पहले पेज पर भड़कीले कार्टूनों और उत्तेजक हेडलाइंस के चलते इस पर लोगों की नज़र चली ही जाती थी.

फ़्रांस में कॉमिक स्ट्रिप की मज़बूत परंपरा पर चलते हुए कार्टून और रेखाचित्र 'शार्ली एब्डो' की पहचान रहे हैं.

पत्रिका ने अपनी बात सिद्ध करने के लिए पुलिस को अप्रवासियों के खून टपकाते सिर पकड़े, ननों को हस्तमैथुन करते और पोप को कंडोम पहने दिखाया है.

चाहे कार्टूनिस्ट हो या फिर लेखक, इस पत्रिका के ज़्यादातर कर्मचारी एक ही उपनाम का इस्तेमाल करते हैं.

उदाहरण के लिए वर्तमान टीम का नेतृत्व कर रहे दो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से शार्ब और रिस के नाम से जाने जाते हैं हालांकि उनके असली नाम सब जानते हैं.

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