कौन है राजपक्षे को हराने वाला शख्स?

मैथ्रिपाला सिरिसेना इमेज कॉपीरइट AFP

कभी महिंदा राजपक्षे के सहयोगी रहे मैथ्रिपाला सिरिसेना, राजपक्षे को हराकर श्रीलंका के नए राष्ट्रपति बन गए हैं.

सिरिसेना राजपक्षे के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री थे. श्रीलंका के सत्तारूढ़ पार्टियों का साथ छोड़ने से पहले सिरिसेना, श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के सबसे मज़बूत नेताओं में से एक माने जाते थे.

अस्पष्ट रुख़

इमेज कॉपीरइट Reuters

वे एक किसान परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं और सिंहली समुदाय से है. महिंदा भी श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहली समुदाय से आते हैं.

विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में सिरिसेना का नाम आख़िरी वक़्त तक गुप्त रखा था.

बीबीसी के पूर्व श्रीलंका संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड का कहना है कि सिरिसेना विजयी ज़रूर हो गए हैं लेकिन उनका राष्ट्रपति वाला पारंपरिक करिश्माई व्यक्तित्व नहीं है.

सिरिसेना ने अल्पसंख्यकों के अधिकार और श्रीलंका के जातीय संघर्ष को लेकर कोई भी स्पष्ट रूख़ नहीं अपनाया है और ना ही तमिलों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर युद्ध अपराध में शामिल रहे किसी भी नेता के ऊपर कार्रवाई करने की बात कही है.

तानाशाही व्यवस्था

इमेज कॉपीरइट AFP

नवंबर में अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा था कि श्रीलंका तानाशाही व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और भ्रष्टाचार और क़ानून व्यवस्था की समस्या से जूझ रहा है.

उन्होंन कहा था, "पूरी अर्थव्यवस्था और समाज का हर हिस्सा एक ही परिवार के नियंत्रण में है."

राष्ट्रपति राजपक्षे के तीन भाइयों और उनके बेटे ने सरकार के अंदर प्रभावकारी जगह बना रखी है.

सिरिसेना उत्तर-मध्य प्रांत से आते हैं जिसे तमिल टाइगर्स उत्तरी हिस्से में क़ब्ज़े के दौरान 'सीमाई देश' के रूप में देखते थे.

19 साल की उम्र में उन्हें चरम वामपंथी दल पीपल्स लिबरेशन फ्रंट (जेवीपी) के विद्रोह में कथित तौर पर शामिल होने की वजह से 15 महीने की जेल हुई थीं.

साफ़-सुथरी छवि

इमेज कॉपीरइट AP

नवंबर 2014 तक वे श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के महासचिव थे और राजपक्षे के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री थे.

अक्तूबर, 2008 में उस वक़्त वे बाल-बाल बचे थे जब उनके क़ाफ़िले पर तमिल टाइगर के आत्मघाती हमलावारों ने हमला किया था.

63 वर्षीय सिरिसेना ने आम लोगों में अपनी साफ़-सुथरी छवि बना रखी है. वे शराब और धूम्रपान के विरोधी हैं.

वे सिंहलियों के अलावा तमिल, मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यकों में भी लोकप्रिय है.

श्रीलंका में अल्पसंख्यक अपने आप को राजपक्षे के शासनकाल में उपेक्षित महसूस कर रहे थे.

तमिल समर्थन

इमेज कॉपीरइट AFP

तमिल टाइगर्स के ख़िलाफ़ अभियान के आख़िरी दो हफ़्तों में वे रक्षा मंत्री थे.

इसका इस्तेमाल उन्होंने सिंहली वोटरों में अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए किया. इसके बावजूद तमिलों में उनकी पकड़ बनी हुई है.

उन्हें तमिलों के प्रमुख संगठन तमिल नेशनल एलांयस का समर्थन भी प्राप्त है.

सिरिसेना का कहना है कि वे राजपक्षे की सरकार से 2006 से नाराज़ हैं, लेकिन सवाल उठता है कि वे फिर सरकार में उसके बाद भी काफ़ी दिनों तक क्यों बने रहे थे!

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार