अफ़ग़ानिस्तान: आखिरकार बन ही गई सरकार

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अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने आम चुनावों के तीन महीने बाद राष्ट्रीय एकता सरकार की कैबिनेट का गठन किया.

सोमवार को क़ाबुल में ग़नी और सरकार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह की अध्यक्षता में 25 मंत्रियों के नामों की घोषणा की गई.

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पिछले साल हुए आम चुनाओं में विवाद के बाद एक साथ काम करने पर सहमत हुए दो पूर्व प्रतिद्वंद्वियों के बीच लंबी बातचीत के बाद इन नामों पर रज़ामंदी हुई है.

इस कैबिनेट पर अभी संसद की मुहर लगनी बाकी है.

इस कैबिनेट में तीन महिलाएं हैं, जिन्हें महिला संबंधी मामले, संस्कृति और उच्च शिक्षा के विभाग दिए गए हैं.

कैबिनेट में विदेश मंत्रालय की ज़िम्मेदारी सलाहुद्दीन रब्बानी को दी गई है, जो पूर्व राष्ट्रपति बुरहानुद्दीन रब्बानी के बेटे हैं. वर्ष 2011 में बुरहानुद्दीन रब्बानी की एक आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी.

बीबीसी पश्तो के संपादक वहीद मसूद का कहना है कि कैबिनेट में अधिकांश चेहरे नए हैं और आम जनता में मुश्किल से ही जाने पहचाने जाते हैं.

हमले बढ़े

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कैबिनेट गठन में देरी से इस बात का ख़तरा पैदा हो गया था कि राष्ट्रीय एकता सरकार इस मुद्दे पर कहीं गिर न जाए.

पिछले सप्ताह ही अशरफ़ ग़नी के कार्यकाल के 100 दिन पूरे हुआ है. उन्होंने 29 सितंबर को शपथ ग्रहण किया था.

उनके प्रतिद्वंद्वी ने उन पर धांधली करने का आरोप लगाया था. इसक बाद अमरीका के हस्तक्षेप के बाद ही सरकार बनी.

माना जाता है कि ग़नी के कार्यकाल में सरकार पर उहापोह के कारण तालिबान हमलों में तेज़ी आई है.

इस साल के शुरू होते ही नेटो सुरक्षा बल अफ़गानिस्तान से वापस चले गए हैं और देश की आंतरिक सुरक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी अफ़ग़ानी बलों ने ले ली है.

क़रीब 13,000 अमरीकी सैनिक अफ़ग़ान बलों के प्रशिक्षण और मदद के लिए एक नए कार्यक्रम के तहत रुक गए हैं.

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