क्या ओबामा ने 'दुनिया का भरोसा' तोड़ा है?

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रविवार को जब 10 लाख से ज़्यादा आम लोग और 44 देशों के राष्ट्र प्रमुख पेरिस की सड़कों पर शार्ली एब्डो पत्रिका पर हुए हमले के बाद 'एकता मार्च' के लिए निकले तो एक व्यक्ति की कमी खल रही थी.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कई आलोचकों ने इस मार्च में उनकी कमी महसूस की. ओबामा के आलोचकों ने इस मार्च में न शामिल होने के लिए उनकी तीखी आलोचना की.

अमरीकी न्यूज़ चैनल सीएनएन के जैक टैपर ने कहा कि वो इस बात से 'शर्मिंदा' हैं कि एकता मार्च में राष्ट्रपति ओबामा या उप-राष्ट्रपति जो बाइडेन या कोई भी 'उच्च-स्तरीय अमरीकी अधिकारी' वहां मौजूद नहीं था.

अमरीका का 'घमंड'

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जैक टैपर ने अमरीकी रिपब्लिकन नेताओं की भी पेरिस मार्च में शामिल लोगों से एकजुटता दिखाने का मौक़ा गंवा देने के लिए आलोचना की.

उन्होंने लिखा है, "मुझे उम्मीद है यह अमरीका का घमंड नहीं होगा, एक ऐसा विश्वास कि जब हमारे संग कुछ बुरा हो तो हर कोई दुख व्यक्त करे, लेकिन किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय रैली में जाना किसी खेल प्रतियोगिता देखने जाने से भी कम महत्वपूर्ण है."

सोमवार को अमरीकी कार्यालय के प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने कहा कि ओबामा चाहते थे कि वो इस मार्च में शामिल हो सकें लेकिन राष्ट्रपति के दौरे के लिए सुरक्षा तैयारी के लिए राष्ट्रपति कार्यालय को 36 घंटे पहले सूचना मिलना ज़रूरी है.

हालांकि अर्नेस्ट ने यह भी कहा, "यह कहना जायज़ है कि हमें किसी उच्च पदाधिकारी को भेजना चाहिए था."

सुरक्षा का मुद्दा

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पोलिटिको पत्रिका के एडवर्ड-आइज़क डेवोरे ओबामा की सुरक्षा तैयारियों के बहाने से ज़्यादा संतुष्ट नहीं हैं.

वो लिखते हैं, "सामान्य तौर पर सुरक्षा सेवा ओबामा या बाइडेन को सुरक्षा बंदोबस्त के बिना खुले मैदान में नहीं जाने देगी....लेकिन एक मज़बूत राष्ट्रपति चरमपंथ के ख़िलाफ़ आम संदेश देने के लिए इन चिंताओं को दरकिनार कर सकता था."

द न्यूयॉर्क डेली न्यूज़ ने सोमवार को अपने मुख्य पृष्ठ पर छपे लेख में ओबामा को संबोधित करते हुए लिखा है, "आपने दुनिया का भरोसा तोड़ा है."

स्वतंत्रता और साहस के लिए

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Image caption फ्रांस के पेरिस में हुई एकता रैली में विभिन्न देशों के राष्ट्र प्रमुख

अख़बार के स्तंभकार माइक लुपिका ने लिखा है, "यह एक ऐसा दिन था जब आपको स्वतंत्रता, साहस के सिद्धांतों के लिए किए जा रहे मार्च में शामिल होकर एकजुटता दिखानी चाहिए थी."

फ़ोर्ब्स पत्रिका में रिक उनगर लिखते हैं, "पेरिस मार्च में न जाना ओबामा की निजी विफलता है जिससे इस राष्ट्र के आत्मसम्मान और गर्व को ठेस पहुँची है."

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ब्लूमबर्ग के जोश रॉगिन लिखते हैं, "यह एक और उदाहरण है जिससे पता चलता है कि मौजूदा अमरीकी प्रशासन किस तरह से ऐसे छोटे मौक़े छोड़ देता है जिनसे आपसी संबंधों और परस्पर सम्मान में बड़ा अंतर पैदा किया जा सकता है."

रॉगिन मानते हैं कि ऐसे क़दमों से अमरीका अपने सकारात्मक योगदान को धूमिल हो जाने देता है.

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