ग्वांतानामो क़ैदी की बेटी की आपबीती

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शाक़िर आमिर की बेटी जोहिना आमिर जब चार की साल की थीं तो उनके पिता को अल-क़ायदा से संबंध रखने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

शाक़िर आमिर ग्वांतानामो बे जेल में बचे हुए अंतिम ब्रितानी क़ैदी हैं. पिछले 13 साल से वो यहां बंद हैं.

उनके खिलाफ़ न तो कभी आरोप पत्र दाख़िल हुआ और न ही अभियोग चला.

वर्ष 2007 के बाद उनकी रिहाई के दो बार आदेश हुए, लेकिन कड़ी सुरक्षा वाले इस क़ैदख़ाने से उन्हें निजात नहीं मिली.

सत्रह साल की उनकी बेटी जोहिना ने बीबीसी न्यूज़बीट कार्यक्रम में पहली बार अपनी आपबीती सुनाई.

जोहिना की आप बीती उन्हीं के शब्दों में-

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मैंने अपने पिता को चार साल की उम्र में देखा था, जब हम अफ़ग़ानिस्तान में रह रहे थे. हम सभी खुश थे और इसकी वजह थे, पिताजी.

हालांकि पुरानी बातों का याद करना बेहद मुश्किल है क्योंकि मैं बहुत छोटी थी और मैं यह भी याद नहीं कर सकती कि उन्होंने कभी मुझे गले लगाया था या मेरे साथ खेला था या नहीं.

हालांकि यह सब मैं एक तस्वीर से जानती हूं, जिसमें वो मुझे और मेरे दो छोटे भाइयों को एक साथ लिए हुए थे.

मेरी मां ने ही मुझे बताया था कि मुझे पिताजी के साथ किए गए मज़े की ही याद है.

मेरे छोटे भाई, खासकर सबसे छोटे भाई को तो यह भी नहीं पता कि एक पिता के होने का क्या मतलब होता है और चाचा या दादा के होने से यह कितना अलग है. क्योंकि वो सभी चीजों के ज़िम्मेवार होते, खासकर मां को खुश रखने में.

लंबा इंतजार

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लंदन में एक लम्बे समय से रहते हुए, जब मैं प्राइमरी स्कूल में थी, हमें उनकी कोई ख़बर नहीं थी या वो कहां हैं.

उस समय तक मैं यह भी नहीं जानती थी कि ग्वांतानामो बे जैसी कोई जगह हो सकती है और हम सब बस पिताजी के लौटने का इंतज़ार कर रहे थे.

जब हमें पता चला कि वो कहां हैं, हम उन्हें ख़त भेजते और मैं उन्हें पेंटिंग्स भेजती थी, जिनमें से बहुत सी बचपन में बनाई गई थीं.

हालांकि उनकी तरफ़ से आई अधिकांश चिठ्ठियां हमें नहीं दी गईं.

उम्मीद और निराशा

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इस लम्बे 13 सालों के दौरान बहुत सारी परेशानियां झेलीं, अधिकांश के बारे में तो हम ठीक से समझते भी नहीं.

कभी-कभार मेरी मां से मिलने और उन्हें पिताजी के बारे में जानकारी देने के लिए कि उनकी रिहाई के लिए वो क्या कर रहे हैं, अमरीका से वकील आए. और हर बार हमें बात आगे बढ़ने की उम्मीद बंधती कि मेरे पिताजी हमसे मिलने घर आने के बस एक क़दम दूर हैं.

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Image caption शाकिर आमिर को 2001 में गिरफ़्तार किया गया था.

हम ऐसे लोगों को जानते हैं जो रिहाई में मेरे पिताजी की मदद के लिए भारी कोशिश करते हैं, लेकिन हमें यह नहीं समझ आता कि वो अभी तक क्यों सफल नहीं हुए.

मेरे पिताजी के बारे में और उनकी स्थिति की ख़बरें देखकर मां व्याकुल हो जाती हैं.

मैं कई बार प्रतिनिधिमंडल में डाउनिंग स्ट्रीट और अन्य जगहों पर इस उम्मीद में गई कि इससे पिताजी की मदद होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

मैं खुश हूं कि मेरे पिता के लिए अन्य लोगों ने कड़ी मेहनत करना जारी रखा क्योंकि मैं जानती हूं कि मेरे पिता नहीं चाहते कि हमारा परिवार दुनिया की नज़रों में आए.

स्काइप से हुई बात

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हमारे परिवार की निजता हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है.

पिछले तीन सालों में हम कुछेक बार स्काइप के मार्फ़त जेल में पिताजी को देख पाए और उनसे बात कर पाए.

रेड क्रास ने यह सुविधा हमें मुहैया कराई.

चूंकि यह लंबी दूरी की कॉल है, इसलिए बहुत सारी दिक्कतें आती हैं और इसमें कई बार लाइन कट जाती है.

पहली बार पिताजी से बात करने में हम सभी को झेंप हो रही थी क्योंकि बहुत समय हो गया था और उनसे 10 सालों तक कोई सम्पर्क नहीं हो पाया था.

मां की बीमारी

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इन कुछ फ़ोन कॉल से हम धीरे-धीरे पिताजी को जान पाए और वो भी हमें जान गए.

हालांकि, केवल स्काइप से बात कराना ही काफ़ी नहीं है, तब जबकि जेल के लोग भी हमें सुन रहे हों.

हम तो बस चाहते हैं कि वो घर आ जाएं ताकि परिवार पूरा हो जाए और मेरी अंततः उनके साथ हों.

इन सालों में मां कभी कभी बीमार हो जातीं और मैं वो सब करने की कोशिश करती जिससे वो अच्छी हो जाएं, लेकिन उन्हें तो मेरे पिता की जरूरत है.

अब 17 वर्ष की हूं और ए-लेवल की पढ़ाई कर रही हूं. मैं दिल से चाहती हूं कि मैं अच्छे से पढूं.

आरोप और इनकार

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यह देखकर कि मैं उनकी तरह ही मजबूत और शिक्षित होने के लिए कोशिश कर रही हूं, वो खुश होंगे. हालांकि मेरी मदद के लिए वो यहां नहीं हैं.

लेकिन हम सभी उम्मीद करते हैं कि वो जल्दी ही रिहा हो जाएंगे ताकि हमारी पारिवारिक ज़िंदगी सामान्य हो सके.

शाक़िर आमिर को अमरीका में 2001 में हुए 9/11 के चरमपंथी हमले के तुरंत बाद अफ़गानिस्तान में गिरफ़्तार किया गया था.

उन पर ओसामा बिन लादेन के क़रीबी होने का संदेह था. वो इस आरोप से इनकार करते हैं.

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