पाक मीडिया: पश्चिम मुस्लिम भावनाओं से बेपरवाह

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पेरिस के एक अख़बार में पैग़म्बर मोहम्मद के विवादास्पद कार्टून छापने पर मुस्लिम देशों में हो रहे विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर छिड़ी बहस पाकिस्तानी उर्दू अख़बारों में छाई है.

जंग का संपादकीय है - धर्मों का सम्मान ज़रूरी है. अख़बार के मुताबिक पैग़म्बर-ए-इस्लाम के अपमानजनक कार्टून छापने का मक़सद विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के बीच टकराव का माहौल पैदा कर विश्व शांति को तहस नहस करना है.

अख़बार लिखता है कि पोप फ्रांसिस ने जहां इन कार्टूनों को छापने की कड़ी आलोचना की है, वहीं अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की प्रतिक्रिया इस बारे में हैरान करने वाली है क्योंकि ये देश दुनिया के डेढ़ अरब मुसलमानों की भावनाओं की परवाह किए बिना अपमानजनक कार्टूनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं.

'बने अंतरराष्ट्रीय क़ानून'

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एक्सप्रेस ने लिखा है कि अमरीकी राष्ट्रपति और ब्रितानी प्रधानमंत्री ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत तो की है लेकिन ये नहीं बताया कि उनके देश में यहूदी नरसंहार पर संदेह व्यक्त करने पर क्यों क़ानूनी पाबंदी है.

अख़बार लिखता है कि ज़रूरत इस बात है कि पश्चिमी जगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की व्याख्या पर नए सिरे से ग़ौर करे.

रोज़नामा वक़्त लिखता है कि इस्लाम को लेकर पश्चिम की घटिया सोच और हरकतें नई बात नहीं है, लेकिन ऐसा होता ही क्यों है और इसका कोई स्थायी हल क्यों नहीं है.

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Image caption विवादित कार्टून छापने वाली पत्रिका शार्ली एब्दो को दुनिया भर में व्यापक समर्थन के अलावा कई जगह आलोचना भी झेलनी पड़ रही है

अख़बार कहता है कि दुनिया के मुसलमान एकजुट नहीं हैं इसीलिए इस्लामी सहयोग संगठन और अरब लीग जैसी संस्थाएं इस बारे में कुछ नहीं कर पाईं.

अख़बार ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून की वकालत की है जो दुनिया के किसी भी धर्म, पवित्र व्यक्तियों और विषयों के अपमान को जुर्म क़रार दे और उसके लिए सज़ा भी दे.

'शांति चाहिए तो..'

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Image caption हाल में अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने भारत और पाकिस्तान का दौरा किया था

वहीं पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा समेत सभी चरमपंथी गुटों पर कार्रवाई करने की अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी की नसीहत पर नवा-ए-वक़्त का संपादकीय है- पाकिस्तान दहशतगर्दी से लड़े या सरहदों पर भारत के ख़िलाफ़़.

अख़बार कहता है कि अगर अमरीका क्षेत्रीय और विश्व शांति की गारंटी चाहता है तो वो भारत को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप कश्मीर मुद्दे के हल की तरफ़ लाए.

औसाफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान से चरमपंथी फ़ज़लुल्लाह को सौंपने की पाकिस्तान की मांग पर संपादकीय लिखा है. अख़बार ने फ़ज़लुल्लाह को हालिया पेशावर हमले समेत कई बड़ी चरमपंथी वारदातों का मास्टरमाइंड बताया है.

अख़बार के मुताबिक दहशतगर्दी से निजात पानी है तो पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका को मिल कर काम करना होगा.

भाजपा की 'किरण'

रुख़ भारत का करें तो दिल्ली के विधानसभा चुनाव पर हमारा समाज की टिप्पणी है कि किरण बेदी के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैरान और परेशान है क्योंकि उन्होंने सतीश उपाध्याय, डॉ हर्षवर्धन, विजय गोयल और जगदीश मुखी जैसे नेताओं की मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी पर सवालिया निशान लगा दिया है.

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Image caption कई जानकार किरण बेदी को दिल्ली में बीजेपी के लिए तुरुप का पत्ता मान रहे हैं

अख़बार लिखता है कि उधर विरोधी खेमे में ये भी चर्चा है कि कहीं भारतीय जनता पार्टी की किश्ती डूब तो नहीं रही है जिसे पार लगाने के लिए किरण बेदी को लाया गया है.

उत्तर प्रदेश में ज़हरीली शराब से 32 लोगों की मौत पर हिंदोस्तान एक्सप्रेस का संपादकीय है ज़हर का कारोबार.

अख़बार लिखता है कि नकली शराब बनाने पर कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन ऐसा करने वाले लोग अगर पकड़े भी जाते हैं तो शायद ही उनके ख़िलाफ़ कोई बड़ी कार्रवाई होती हो.

अख़बार के मुताबिक ज़हर के इस कारोबार को कुछ सियासी लोगों का संरक्षण होता है.

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