पाकिस्तान: पोलियो मुक्ति में तालिबानी अड़चन

पोलियो अभियान इमेज कॉपीरइट AFP

पाकिस्तान में साल 2015 में अभी तक पोलियो का कोई मामला सामने तो नहीं आया है फिर भी वहां के अधिकारी इसे लेकर सतर्क है.

हाल के कुछ सालों से तालिबान ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में पोलियो के टीके पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

पोलियो अभियान से जुड़े कई स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और पुलिस की तालिबान ने हत्या की है.

'बेइज़्जती का तगमा'

इमेज कॉपीरइट AFP

इसकी वजह से नतीजा यह हुआ कि साल 2014 में पाकिस्तान में एक दशक के दौरान पोलियो के सबसे ज्यादा मामले सामने आए.

साल 2014 में पोलियो के 303 मामले सामने आए हैं. इससे पहले साल 2000 में सबसे ज़्यादा 199 मामले सामने आए थे.

जून 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सिफारिश की थी कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले सभी पाकिस्तानियों को हवाईअड्डे पर पोलियो का टीका दिया जाए ताकि पोलियो के वायरस को फैलने से रोका जा सके.

डॉन अख़बार ने इस हालात को पाकिस्तान के लिए 'बेइज़्जती का तमगा' बताया था.

पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन अभियान से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि हाल के सालों में पोलियो उन्मूलन की दिशा में देश में बहुत कुछ हुआ है.

हिंसक घटनाएं

इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption पोलियो अभियान कार्यकर्ता मोहम्मद सरफराज़ का जनाज़ा.

लेकिन कोई भी यह नहीं बताना चाहता कि पाकिस्तान पोलियो मुक्त कब तक हो सकता है.

पोलियो को खत्म करने की वैश्विक कोशिश साल 1988 से शुरू हुई थी.

उस साल पाकिस्तान में पोलियो के 2000 मामले थे.

साल 1994 से अधिकारियों ने नियमित तौर पर पोलियो का टीका बच्चों को देना शुरु किया.

साल 2005 में पाकिस्तान में 28 मामले पोलियो के सामने आए थे.

ये पोलियो उन्मूलन के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे अच्छा साल था.

लेकिन इसी साल स्वात घाटी में पोलियो उन्मूलन अभियान के ख़िलाफ़ हिंसक घटनाएं भी शुरू हुईं.

पाबंदी

इमेज कॉपीरइट EPA

डॉन अख़बार के स्वास्थ्य संवाददाता अशफाक़ युसुफ़ज़ई ने बताया,"तब से पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम चरमपंथियों के निशाने पर रहा है और इसकी प्रशासनिक व्यवस्था में खामियां सामने आईं."

इसके अलावा फ़ौजी हूकूमत और जम्हूरियत (लोकतंत्र) के बीच के लगातार संघर्ष ने भी पोलियो उन्मूलन के लिए बेहतर रणनीति बनाने की दिशा में मुश्किलें खड़ी की हैं.

साल 2005 में अभिभावकों ने पोलियो के टीके से इंकार करना शुरू कर दिया.

मई 2011 में ओसामा बिन लादेन की हत्या के बाद यह इंकार और भी हिंसक हो गया. खासतौर पर तब जब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एक डॉक्टर शकील अफ़रीदी पर नकली टीका अभियान चला कर ओसामा का पता लगाने में अमरीकियों की मदद करने का आरोप लगा.

तब से टीका अभियान से जुड़े 50 स्वास्थ्य कार्यकर्ता और पुलिस वाले मारे गए हैं.

साल 2012 में तालिबान ने अपने शासन वाले इलाक़ों में पोलियो टीका अभियान पर पाबंदी लगा दी थी.

बेहतर हालात

इमेज कॉपीरइट AFP

अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की हत्या ने साल 2014 में पोलियो उन्मूलन की कोशिशों को काफ़ी नुकसान पहुंचाया है.

सिंध प्रांत के प्रांतीय पोलियो उन्मूलन समिति के सदस्य डॉक्टर इक़बाल मेमन इसके अलावा भी कई कारणों को इसके लिए जिम्मेदार बताते हैं.

उनका कहना है, "स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का उत्साह सिर्फ हत्याओं की वजह से नहीं कम हो रहा है बल्कि समय से अधिकारियों की ओर से उन्हें पैसा नहीं मिलना भी इसकी वजह है."

लेकिन बहुतों का कहना है कि इधर कुछ महीनों में हालात काफ़ी बेहतर हुए हैं.

शायद इसकी सबसे बड़ी वजह फ़ौज की ओर से तालिबान बहुल इलाका वज़ीरिस्तान में तालिबान के ख़िलाफ़ चलने वाला अभियान है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार