पारा ज़ीरो से भी कम और ज़िंदगी जहन्नुम

लेबनान के बेका वैली में सीरियाई शरणार्थी इमेज कॉपीरइट AP

गृह-युद्ध से जूझ रहे सीरिया के तकरीबन 10 लाख शरणार्थियों के बारे में माना जाता है कि वे लेबनान में रह रहे हैं.

उनमें से कई बेका घाटी में जमा देने वाली ठंड के बीच ख़राब हालात में शिविरों में रह रहे हैं. इस बीच इन शरणार्थियों को लेकर लेबनान में रहने वालों का धीरज भी अब कमजोर पड़ने लगा है.

(पढ़ेंः सीरियाई शरणार्थियों को बचाने की कोशिश)

उम अबेद की टेंट के भीतर एक छोटा सा चूल्हा जल रहा है. इस चूल्हे में जलावन के तौर पर गलियों से इकट्ठा किया गया कचरा इस्तेमाल में लाया जा रहा है.

पढ़ें पूरा विश्लेषण

इमेज कॉपीरइट AP

इसका कसैला धुआं गले किसी के गले और आंखों में जलन पैदा कर सकता है.

(पढ़ेंः सीरियाई नागरिक तुर्की में दाखिल)

उम अबेद की तीन साल की बेटी मरियम को इस ज़हरीले धुएं के कारण दमे की तकलीफ पैदा हो गई है लेकिन वे जानते हैं कि बाहर शून्य से भी कम तापमान है और बेटी को इससे बचाने का सबसे बेहतर तरीका यही है.

यह लेबनान की बेका वैली में एक अस्थायी शिविर है और इस देश में ऐसे हज़ारों सीरियाई शरणार्थियों में से हैं जिन्हें मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है.

नाकाफी कोशिशें

इमेज कॉपीरइट AFP

तिरपाल और प्लाईवुड के बने उनके शिविर बहुत ही दयनीय अवस्था में हैं. दो दशकों से इस इलाके में आने वाली तूफानी हवाओं से निपटने के लिहाज ये शिविर नाकाबिल हैं.

(पढ़़ेंः सीरिया में 30 से ज्यादा बेघर)

इनमें से कई ढांचे अब ढहने की कगार पर हैं. इसके किनारे बर्फ का पानी रिस रहा है. भीतर कम्बल और गद्दे भीग रहे हैं. उम अबेद खाना बनाने वाले बर्तन में इस पानी को इकट्ठा कर रहे हैं.

सहायता एजेंसियों की कोशिशें इतनी नाकाफी हैं कि इस जाड़े में कुछ लोगों की मौत भी हो गई है. और अब जब बर्फबारी जारी है तो लोगों का बीमार पड़ना भी जारी है.

सीरियाई शरणार्थी

इमेज कॉपीरइट AFP

उम अबेद के घर के पास ही कई मां-बाप एक शिविर के बाहर अपने बीमार बच्चों के साथ कतार में लगे हैं. यहां एक लेबनानी चैरिटी संस्था की ओर से एक डॉक्टर अस्थायी क्लिनिक चलाते हैं.

(पढ़ेंः चरमपंथियों का फरमान)

माताओं ने अपने नवजात को सीने से लगा रखा है और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. उनकी कोशिश है कि ठंडी हवाएं बच्चों को नुक़सान न पहुंचा पाएं.

उनमें से ज्यादातर की हैसियत सर्दी के कपड़े खरीदने की नहीं है. वे वही कपड़े पहनते हैं जो वे सीरिया से लेकर चले थे.

सर्द हवाएं

इमेज कॉपीरइट AFP

जो औरतें गर्मी के मौसम में आई थीं वे पतले कपड़े वाले लिबास में थरथरा रही हैं. कुछ बच्चों के पैरों में केवल ज़ुराबें हैं. और कुछ नंगे पांव ही हैं.

(तस्वीरेंः शरणार्थी होने का दर्द)

मेडिकल कैंप में डॉक्टर मेलहेम हरमौश तेजी से मरीजों को देख रहे हैं. वे स्टेथोस्कोप से जांच करते हैं, मुंह के भीतर देखते हैं, तापमान देखने के लिए सिर पर हाथ रखते हैं और मरीज़ों को बुखार या टॉन्सलाइटिस या सांस की तकलीफ या फिर निमोनिया जैसी बीमारी के बारे में बताते हैं.

सीरियाई शरणार्थियों पर तूफानी सर्द हवाओं की चुनौती ही कोई अकेली मुश्किल नहीं है, उनके अपने देश में न खत्म होने वाला गृह युद्ध भी जारी है.

अंतरराष्ट्रीय मदद

इमेज कॉपीरइट AFP

सीरिया के संघर्ष के कारण वहां से पलायन जारी है लेकिन जरूरतमंदों को दी जाने वाली मदद नाटकीय तौर पर कम हुई है.

संयुक्त राष्ट्र की ओर से दी जाने वाली मदद कम करके प्रति व्यक्ति प्रति हफ्ते 19 डॉलर कर दी गई है. इसकी वजह से उम अबेद पीने का पानी खरीद नहीं पाएंगे. उनके शिविर की छत से रिसते पानी को इकट्ठा करने के लिए बाल्टियां लगा दी गई हैं.

जरूरतें पूरी करने के लिए पूरे परिवार को काम करना पड़ रहा है. उम अबेद और उनके पति बढ़िया पैसे वाली नौकरी नहीं खोज सकते.

सीरिया के हालात

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption सीरिया के गृहयुद्ध का यह पांचवां साल है.

उनके बच्चे पास के खेतों में जाकर घंटों काम करते हैं. और उनका परिवार बमुश्किल रोज़ के चार डॉलर जुटा पाता है.

युद्ध की शुरुआत के वक्त लेबनान के लोगों ने सीरियाई शरणार्थियों का स्वागत किया था. कुछ ने अपने घरों के कमरे भी मुफ्त में लोगों के लिए खोले थे.

लेकिन सीरिया के हालात और खराब होने के बाद उनकी मेहमान नवाज़ी नाराज़गी में बदल गई. सीरिया के गृह युद्ध का यह पांचवां साल है.

(रूथ शरलॉक डेली टेलीग्राफ़ की मध्यपूर्व संवाददाता हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार