यूरोज़़ोन को मिलेगी अरबों की मदद

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यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) ने यूरोज़ोन की बीमार अर्थव्यवस्था की रफ़्तार देने के लिए 1.1 लाख करोड़ यूरो डालने का ऐलान किया है.

क्वान्टेटिव ईज़िंग (क्यूई) कार्यक्रम के तहत ईसीबी सितंबर 2016 तक हर महीने 6,000 करोड़ यूरो के बॉन्ड ख़रीदेगा.

बॉन्ड ख़रीद का ये प्रोग्राम सितंबर 2016 के बाद भी जारी रह सकता है.

साथ ही ईसीबी ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर 0.05 प्रतिशत पर ही कायम रखा है.

भारत पर असर

भारत में उन कंपनियों की आय बढ़ेगी जो यूरोप को निर्यात करती हैं. साथ ही यूरोप से भारत में होने वाल निवेश में भी बढ़ोतरी होगी.

इसकी वजह से सोने चांदी की कीमतों में भी उछाल हो सकता है क्योंकि इन चीज़ों पर रिटर्न की संभावना बढ़ जाएगी.

जान डालने की कोशिश

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Image caption ईसीबी अध्यक्ष मारिया द्राग़ी के अनुसार क्वांटेटिव ईज़िंग मार्च में शुरू होगा.

ईसीबी के अध्यक्ष मारियो द्राग़ी ने कहा है कि बॉन्ड्स ख़रीद का यह कार्यक्रम मार्च में शुरू होगा.

यूरो ज़ोन के देशों में आर्थिक गतिविधियां बहुत धीमी पड़ गई थीं.

द्राग़ी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईसीबी सेकेंड्री मार्केट से बॉन्ड्स ख़रीदेगा.

उन्होंने कहा "जब तक मुद्रास्फीति को लेकर निरंतर सुधार हासिल नहीं कर लिया जाता".

क्या है क्वान्टेटिव ईज़िंग

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इस कार्यक्रम के तहत ईसीबी बड़ी मात्रा में यूरो छापेगा.

छापे गए यूरो का इस्तेमाल बॉन्ड्स ख़रीद पर होगा.

इससे अर्थव्यवस्था में नकदी आएगी और ब्याज दरों में गिरावट आएगी.

ब्याज दरें घटने से उद्यमी और आम जनता अधिक कर्ज़ लेगी.

इससे उद्योग और लोग अधिक खर्च करेंगे और रोजगार के अधिक मौके बनेंगे. और इस तरह से कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था को रफ़्तार मिलेगी.

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