जैकब ज़ूमा के गले पड़ा 'गुप्तागेट'

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Image caption दक्षिण अफ़्रीका का रिज़ार्ट होटल जहां गुप्ता परिवार की ओर से शादी का समारोह किया गया था.

एक प्रभावशाली भारतीय मूल के कारोबारी की बेटी की शादी में वायु सेना के बेस पर बारातियों के जेट को उतारा जाना दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति के लिए गले की फांस बन गया है.

पढ़ेंः कौन है दक्षिण अफ़्रीका का गुप्ता परिवार

जिन दो वायु सेना अफ़सरों को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था, उन्होंने अब राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा को सिविल कोर्ट में घसीटने की बात कही है.

दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा पर भारतीय मूल के कारोबारी गुप्ता परिवार के असर में काम करने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि ज़ूमा इससे इनकार करते रहे हैं.

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Image caption गुप्ता बंधुओं की भतीजी वेगा गुप्ता और आकाश जहाजगढ़िया.

दो साल पहले प्रिटोरिया में स्थित दक्षिण अफ़्रीकी मिलिट्री एयरफ़ोर्स बेस पर एक विमान उतरा था.

यह एक निजी जेट विमान था जो दक्षिण अफ़्रीका की राजधानी के सम्पन्न इलाक़े सन सिटी में एक विवाह समारोह के लिए भारतीय मेहमानों को लेकर आया था.

सन सिटी राजधानी के उत्तर-पश्चिम में स्थित कैसिनो रिज़ॉर्ट है और यह शादी थी देश में प्रभावशाली भारतीय मूल के कारोबारी घराने की एक लड़की की.

सेना के अधिकारियों ने मेहमानों का वीआईपी अतिथियों जैसा स्वागत किया था.

लेकिन विमान की यह लैंडिंग अनौपचारिक और ग़ैरक़ानूनी थी और एक अति सुरक्षित सैन्य स्थल का दुरुपयोग था.

घटना के प्रकाश में आते ही यह एक राजनीतिक स्कैंडल का रूप ले लिया.

ज़ूमा का नाम

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इस पूरे कांड में राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा का नाम आया और कहा गया कि 'नंबर वन' ने व्यक्तिगत रूप से अपने मित्रों के लिए यह व्यवस्था की थी.

माना जाता है कि 'नंबर वन' का नाम जैकब ज़ूमा के संदर्भ में लिया गया था. हालांकि उन्होंने संसद में इन आरोपों से इनकार किया.

एक संसदीय समिति की जांच में राष्ट्रपति ज़ूमा को क्लीन चिट मिल गई लेकिन राष्ट्रपति के चीफ़ ऑफ़ प्रोटोकॉल और दो वायु सेना अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए.

इस पहेली में नया मोड़ तब आया जब वायु सेना के दोनों अधिकारियों के ख़िलाफ़ आरोप वापस ले लिए गए. वहीं चीफ़ ऑफ़ प्रोटोकॉल को नीदरलैंड्स में दक्षिण अफ़्रीका का राजदूत नियुक्त कर दिया गया.

चीफ़ ऑफ़ प्रोटोकॉल ने अपने पहले बयान में 'नंबर वन' का नाम लिया था, लेकिन बाद में वो अपने बयान से पलट गए थे.

गुप्ता परिवार और राष्ट्रपति

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Image caption भारतीय मूल के कारोबारी अजय गुप्ता और अतुल गुप्ता.

इस मामले को एक और मोड़ देते हुए वायु सेना के दोनों अधिकारियों ने कहा है कि वे मामले को सिविल कोर्ट में ले जाने की योजना बना रहे हैं.

और संभव है कि राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा को कोर्ट में साक्ष्य पेश करने के लिए कहा जा सकता है.

इस कांड को दक्षिण अफ़्रीका में 'गुप्तागेट' कहा गया है. भारत के गुप्ता परिवार का दक्षिण अफ़्रीका में बहुत बड़ा कारोबार है.

इस परिवार पर राष्ट्रपति ज़ूमा पर अत्यधिक प्रभाव रखने के आरोप लगते रहे हैं. ज़ूमा के दो बच्चे गुप्ता परिवार की कंपनियों में नौकरी करते हैं.

असल में गुप्ता बंधुओं- अतुल, अजय और राजेश की 23 वर्षीय भतीजी वेगा गुप्ता की शादी में मेहमानों और रिश्तेदारों को निजी जेट से दक्षिणी अफ़्रीका लाया गया था.

हालांकि इस घटना के बाद से ही गुप्ता परिवार कहता रहा है कि जेट उतरने के लिए सभी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया था और उपयुक्त अधिकारियों से इजाज़त ली गई थी.

एनकांडला मामला

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दक्षिण अफ़्रीका के करप्शन वॉच संस्था के डेविड लुईस कहते हैं, "यह दुखद है. इन लोगों को बलि का बकरा बनाया गया."

लुईस का इशारा उन तीन अधिकारियों- तत्कालीन चीफ़ ऑफ़ प्रोटोकॉल ब्रूस कोलोनी, लेफ्टिनेंट कर्नल क्रिस्टीन एंडर्सन और उनकी सहकर्मी लेफ्टिनेंट कर्नल स्टीफ़ेन वान ज़ाईल- के बारे में था, जिन पर आरोप लगाए गए थे.

वो कहते हैं, "इनमें से ब्रूस कोलोनी ने यह घाव हॉलैंड में राजदूत बनने के बदले खाया था. और मैं शर्त लगा सकता हूं कि एनकांडला कांड में शामिल अधिकारियों के साथ भी यही होना है."

एनकांडला में राष्ट्रपति ज़ुमा के ग्रामीण घर को सरकारी ख़र्च पर आलिशान तरीक़े से सजाया-संवारा गया था.

आर्थिक हितों का चक्कर

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Image caption राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा के गांव के घर की साज-सज्जा पर भी विवाद हुआ.

राजनीतिक विश्लेषक सीबिसी एंडलेत्याना के अनुसार, "राष्ट्रपति ज़ूमा कुछ विशेष आर्थिक हितों के चक्कर में फंस कर कुछ व्यक्तियों का हित साध रहे हैं."

सीबिसी के मुताबिक़, "यहां सत्ता गुप्ता घराने के हाथ में है. यहां एक ऐसा राष्ट्रपति है जो एक ख़ास गुट के लिए कृतज्ञ है."

इस समय वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम का देवास में सम्मलेन हो रहा है. यहां मौजूद राष्ट्रपति ज़ूमा के प्रवक्ता मैक महाराज ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,"इसमें कुछ नया नहीं है."

हालांकि वायु सेना के अधिकारियों की योजना पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की.

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