'हमारा काम शिक्षा देना है, सुरक्षा देना नहीं'

उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के स्कूल टीचर, स्कूलों को आतंकी हमलों से बचाने के लिए टीचरों के बंदूक़ रखने की सरकारी योजना का विरोध कर रहे हैं.

पेशावर में आयोजित शिक्षकों के एक सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि उनका काम शिक्षा देना है, न कि सुरक्षा देना.

स्थानीय अधिकारियों ने पिछले हफ़्ते इस योजना की घोषणा की थी. सरकार का कहना है कि किसी शिक्षक को हथियार लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा.

स्कूल पर हमला

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पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर 16 दिसंबर को हुए आतंकी हमले में 140 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. मरने वालों में अधिकतर बच्चे थे.

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत की सरकार ने पिछले हफ़्ते घोषणा की थी कि वो लाइसेंस देकर शिक्षकों को हथियार रखने की इजाज़त देगी.

प्रांत के सूचना मंत्री मुश्ताक़ ग़नी ने कहा था, ''किसी स्कूल पर चरमपंथी हमले की स्थिति में बाहरी सहायता पहुंचने तक चरमपंथियों का सामना करने में टीचरों को सक्षम बनाने के विचार से यह प्रस्ताव दिया गया है.''

ग़नी के अनुसार यह फ़ैसला इसलिए किया गया क्योंकि सभी स्कूलों पर हमेशा पुलिस तैनात नहीं की जा सकती.

आतंकी हमले रोकने की अन्य योजनाओं में स्कूलों की चारदीवारी को ऊंचा करना, उस पर कंटीले तार लगाना, सीसीटीवी कैमरे लगाना और गेट पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाना शामिल है.

छात्रों की उपस्थिति

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Image caption पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर 16 दिसंबर को हुए आतंकी हमले में 140 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी

शिक्षकों को हथियार देने की योजना की शिक्षकों, विपक्षी दलों और मीडिया ने आलोचना की. इनका कहना था कि सरकार अपनी ज़िम्मेदारी शिक्षकों पर डाल रही है.

शिक्षकों की शिकायत पर प्रांत के शिक्षा मंत्री आतिफ़ ख़ान ने उनसे कहा कि उन्हें सुरक्षा गार्ड बनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. लेकिन अगर वो चाहें तो हथियार ले सकते हैं.

सर्दियों की छुट्टियां शुरू होने से पहले पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में स्कूलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी.

सर्दी की छुट्टियां ख़त्म होने के बाद अभी भी कई स्कूल नहीं खुले हैं. जो स्कूल खुले भी हैं, उनमें छात्रों की उपस्थिति कम दर्ज की जा रही है.

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