मिलिये सिख कैप्टेन अमरीका से!

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Image caption सिख कैप्टेन अमरीका- विश्वजीत सिंह

ज़्यादातर कामकाजी लोग पैंट कमीज़ ही पहनना पसंद करते हैं, तो फिर यह सिख कैप्टेन अमरीका की ड्रेस पहने न्यूयॉर्क की सड़कों पर अजनबियों से क्यों बात कर रहा है?

43 वर्षीय विश्वजीत सिंह का कहना है, "मैं लोगों की समझ, उनकी सोच को चुनौती देना चाहता हूँ. मैं चाहता हूँ कि वे मुझे देख कर हैरान हो जाएं.''

दिन में विश्वजीत सिंह बतौर सॉफ़्टवेयर इंजीनियर काम करते हैं और रात में वे कार्टून बनाते हैं.

वो कहते हैं, ''जब मैंने पहली बार यह कॉस्ट्यूम पहना वह मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ुशनुमा दिन था. लोग मुझे गले लगा रहे थे, पुलिस वाले मेरे साथ फ़ोटो खिंचवा रहे थे, लोग मुझे शादियों में अपने साथ ले जाने की ज़िद कर रहे थे.''

लेकिन उनका ऐसा स्वागत पहले नहीं होता था.

पगड़ी और दाढ़ीधारी परंपरावादी सिख विश यानी विश्वजीत सिंह को अमरीकी समाज में हमेंशा कौतूहल भरी नज़रों से देखा जाता था.

वो बताते हैं, ''मुझे आज भी इस समाज में ग़ैर की तरह देखा जाता है, एक मुसलमान की तरह. और परेशान करने का सिलसिला ख़बरों के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है.''

फिर विश्वजीत ने कार्टूनों के ज़रिए अपनी खीझ, झुंझलाहट और असुरक्षा को अभिव्यक्त करना शुरू किया. उनके कार्टूनों में अपने देश के लिए लगाव, सिख धर्म के मायने और अमरीका में सिखों के जीवन की झलक दिखाई देती है.

कैसे आया यह ख़्याल

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Image caption सादे वेश में विश

वो कहते हैं, ''फिर मुझे लगा कि कुछ नया करना चाहिए. कैप्टेन अमरीका की नई फ़िल्म देख कर मुझे सूझा, क्यों ना एक ऐसा सुपर हीरो बनाया जाए जिसके दाढ़ी हो, वह पगड़ी पहनता हो और किसी भी तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ लड़ता हो!"

एक स्थानीय कॉमिक बुक स्टोर ने उन्हें मौक़ा दिया कि वे लोगों की नज़र में आ सकें. वहीं उनकी मुलाक़ात एक फ़ोटोग्राफ़र से हुई जिसने सुझाव दिया कि क्यों ना वे कैप्टेन अमरीका का कॉस्ट्यूम पहन कर इस किरदार में जान फूंक दें.

वो कहत हैं, "इस पर मेरी ज़बान से बेसाख़्ता निकला कि मैं इतना दुबला पतला, मुझे ज़िंदगी भर इसी वजह से परेशान किया जाता रहा...मैं कभी इस तरह का कॉस्ट्यूम नहीं पहनूंगा.''

लेकिन फिर स्थिति बदल गई. अगस्त 2012 में विस्कॉन्सिन के गुरुद्वारे पर एक श्वेत नस्लवादी गुट ने गोलियां चला दीं. हमले में छह लोगों की मौत हो गई.

इस हादसे के बाद उन्हें लगा कि अमरीका में अल्पसंख्यकों को किस नज़रिए से देखा जाता है, इस पर उन्हें दोबारा सोचना होगा. कार्टून बनाना ही काफ़ी नहीं था.

तब विश को उस फ़ोटोग्राफ़र की बात याद आई और उन्होंने तुरंत दर्ज़ी से अपने साइज़ की कैप्टेन अमरीका की ड्रेस बनाने के लिए कह दिया.

लोगों को खांचों में बंटी सोच से बाहर लाने की मुहिम

इस किरदार के कॉस्ट्यूम में, पगड़ी पर का निशान लगाए और कैप्टेन अमरीका की ख़ास ढाल से लैस विश्वजीत ने कॉलेजों और उन जगहों पर घूमना शुरू किया जहाँ नौजवान लोग इकट्टा होते हैं. इन जगहों पर वे सामाजिक पहचान और अमरीका में सिखों की ज़िंदगी के बारे में बात भी करते रहे.

वो कहते हैं, "हम लोगों को मुसलसान, यहूदी, वामपंथी, दक्षिणपंथी के खांचों में रख कर देखते हैं. मैं चाहता हूँ कि लोग इन खांचों से बाहर आकर बातचीत शुरू करें.''

ऐसी ही एक बातचीत के दौरान विश की मुलाक़ात तीन युवा फ़िल्म मेकर्स रयान वेस्ट्रा, बेन फिशेंगर और मैथ्यू रॉजर्स से हुई. ये तीनों उस वक़्त छात्र ही थे. विश जो संदेश दे रहे थे उससे ये तीनों बहुत प्रभावित हुए.

वेस्ट्रा ने बताया, "विश अमरीका में ही पैदा हुए हैं, पले बढ़े हैं लेकिन फिर भी लोग इन्हें मध्य पूर्व का ही समझ लेते हैं. सिख धर्म दुनिया के पाँच सबसे बड़े धर्मों में से एक है लेकिन अमरीकी लोग इसके बारे में बहुत कम ही जानते हैं."

रेड, वाइट एंड बियर्ड

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Image caption सिंह का साथ फोटो खिंचवाते लोग

तीनों विश के पास एक आइडिया लेकर गए. तीन दिन लगातार विश न्यूयॉर्क की अलग-अलग जगहों पर कैप्टेन अमरीका के वेश में घूमें, लोगों से बातचीत करें और इस पूरे अनुभव को कैमरे में क़ैद कर लिया जाए.

उनके मुताबिक़, "हम इस आइडिया को लेकर थोड़ा नर्वस थे लेकिन इसे करना ज़रूर चाहते थे.''

वेस्ट्रा ने कहा, "जैसे ही विश ने कॉस्ट्यूम पहना, लोग इनके साथ सेल्फ़ी लेने और इनसे बात करने के लिए जुटने लगे."

रेड, वाइट एंड बियर्ड नाम की यह फ़िल्म अब ऑनलाइन देखी जा सकती है.

जारी रखेंगे न्यूयॉर्क में घूमना

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Image caption न्यूयॉर्क की सड़कों पर आज का कैप्टेन अमरीका

तीन दिन तक लगातार न्यूयॉर्क शहर में घूमते हुए विश्वजीत को तमाम तरह के लोगों से मिलने का मौक़ा मिला.

एक सबवे में उनकी मुलाक़ात एक पुलिस वाले से हुई जो 9/11 के दौरान वहां मौजूद था और पहली बार उस मेमोरियल को देख कर लौट रहा था.

वो कहते हैं, "उसने मुझे बताया कि एक श्वेत और परंपरावादी इसाई होने के नाते उसे मेरा काम पसंद आया. मैं कॉस्ट्यूम में था इसलिए ही हमारी बातचीत हो सकी वरना हम शायद कभी बात नहीं करते."

और इसी तरह की मुलाक़ातों के लिए विश्वजीत न्यूयॉर्क की सड़कों पर घूमते रहेंगे. कॉमिक बुक्स का यह मशहूर किरदार अब उनकी शख़्सियत का एक अहम हिस्सा बन चुका है.

वे कहते हैं, "कैप्टेन अमरीका एक महानायक है. वह देश भक्त है, ताक़तवर है और उसकी यूनीफॉर्म में लाल, सफ़ेद और नीला रंग है. (जो अमरीकी झंडे के रंग हैं). उसकी रचना दूसरे विश्व युद्ध के बुरे और दुष्ट लोगों को ख़त्म करने के लिए की गई थी. आज मैं दिखाना चाहता हूँ कि वह वापिस आ रहा है और इस बार वह आपसी नफ़रत पर आधारित अपराधों से लड़ने आ रहा है"

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