दुनिया का सबसे बड़ा फल क्या है?

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दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा फल क्या है? साथ ही यह सवाल भी उठता है कि बड़े से बड़ा फल भी कितना बड़ा हो सकता है?

पहले सवाल का जवाब अपेक्षाकृत आसान है और इसका जवाब किताबों के पन्ने खंगालकर दिया जा सकता है.

लेकिन दूसरा सवाल ज़्यादा दिलचस्प है और इसने दुनियाभर के प्रमुख जीव विज्ञानियों का ध्यान आकर्षित किया है.

जीव विज्ञानियों ने हाल ही में नया शोध पेश किया है जिससे पता चलता है कि फलों का बड़े आकार का होने के क्या कारण होते हैं.

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इस नए शोध ने न केवल इस रहस्य से पर्दा उठाया है कि इन बड़े फलों के अंदर क्या जाता है, इससे यह भी पुष्टि हुई है कि पौधे कैसे गूदा बनाते हैं, जो कि ज़्यादातर मीठा होता है.

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अब तक, इंसान द्वारा उगाया जाने वाला सबसे बड़ा फल कद्दू था. 2014 में उगाए गए एक कद्दू का वजन एक टन से अधिक था. आपको यकीन हो या न, इसका वजन 1056 किलो था.

यह विचित्र फल अब उतना अजीब नहीं लगता जितना कि पहली बार लगा होगा.

विश्व रिकॉर्ड

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दरअसल, सबसे बड़े फल का रिकॉर्ड अक्सर टूटता रहता है, इसीलिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इन पर और शोध करने का फैसला किया.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की डॉक्टर जेसिका सैवेज ने बीबीसी अर्थ को बताया, “हमारी एक सहयोगी कारे जेनसेन ने वर्ष 2012 में हमें बताया कि मैसाचुसेट्स के टॉप्सफ़ील्ड में 913 किलो वजन के कद्दू का नया विश्व रिकॉर्ड बना है.”

“इस रिकॉर्ड से इस बहस को और हवा मिली कि आख़िकार इस फल में कहां तक बड़ा होने की संभावना है.”

अधिकांश विशाल कद्दू कुछ ज्ञात प्रजातियों में ही पाए जाते हैं.

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डॉक्टर सैवेज कहती हैं, “प्रतिस्पर्धा के लिए उगाए गए कद्दू मूल रूप से हबर्ड स्क्वैश से पैदा हुए थे और उनके वंश का पता विभिन्न किस्मों की शृंखला से लगाया जा सकता है, जिनका आकार उत्तरोतर में बढ़ता चला गया.”

वास्तव में आज इस्तेमाल होने वाले कद्दू की विशालकाय किस्म अटलांटिक कद्दुओं की किस्म है, जिसके नाम वर्ष 1904 से वर्ष 1976 तक सबसे बड़ा कद्दू होने का विश्व रिकॉर्ड रहा.

बीजों का संकरण

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हालाँकि, इन बीच के वर्षों में, इस कद्दू के बीज का कई अन्य विशाल कद्दुओं की किस्म से संकरण कराया गया और पुराने पौधों का सही पितृत्व अक्सर अज्ञात ही रहा.

हालाँकि, इन विशालकाय कद्दुओं की उपयोगिता बहुत सीमित है और इसकी वजह है इनमें लगभग 98 प्रतिशत पानी का होना. इनमें शुगर और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होती है और नजीतन ये स्वादहीन होते हैं.

डॉक्टर सैवेज कहती हैं, “कुछ लोग इन्हें खाते हैं, लेकिन अक्सर इनका उपयोग सजावट या नई चीजों के लिए किया जाता है जिनमें रेसिंग के लिए नाव बनाना भी शामिल है.”

विशाल किस्मों को एक ही फल विकसित करने के लिए किया जाता है. इन्हें खूब खाद-पानी भी दिया जाता है, इसलिए खेती के लिए उन्हें उगाना फ़ायदे का सौदा नहीं है.

लेकिन फलों की वृद्धि का अध्ययन करने में उनकी बड़ी भूमिका होती है.

विशालकाय फल का राज

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डॉक्टर सैवेज और उनके सहयोगियों ने विशाल कद्दुओं के रचना विज्ञान और शरीर विज्ञान की तुलना अन्य विशाल कद्दुओं से की, और उनका मकसद इस बात का पता लगाना था कि विशालकाय कद्दू के पौधे इतने भारी-भरकम फल का उत्पादन कैसे करते हैं.

उनकी दिलचस्पी ख़ासकर पौधे की संवहन प्रणाली में थी, जो पौधे के भीतर पानी और शुगर को पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है.

सैवेज कहती हैं, “हमने फ्लोयम पर ध्यान केंद्रित किया क्योंकि यह संवहन प्रणाली का वह हिस्सा है जो शर्करा से कार्बन पैदाकर फल के विकास में मददगार है.”

वैज्ञानिकों ने शोध में पाया, “फ्लोयम कोशिकाओं की वास्तविक संरचना में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन फ्लोयम की कुल मात्रा बढ़ गई.”

असमंजस कायम

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हालाँकि ‘प्लांट, सेल और इनवायरन्मेंट’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक अभी यह साफ नहीं हो सका है कि एक पौधा कितना फ्लोयम पैदा कर सकता है.

हमें अभी यह भी नहीं पता कि कितना बड़ा फल पैदा किया जा सकता है.

डॉक्टर सैवेज कहती हैं, “यह कहना मुश्किल है कि फल के आकार की ऊपरी सीमा का अनुमान संभव है कि नहीं, क्योंकि हम नहीं जानते कि फल की वृद्धि रुकना कैसे निर्धारित होता है.”

जहाँ फ्लोयम फल की वृद्धि निर्धारित करता है, वहीं कुछ ऐसे कारण भी होते होंगे जो फल को एक सीमा से अधिक नहीं बढ़ने देते.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.

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