लंदन में गांधी प्रतिमा का क्यों हुआ विरोध?

गांधी प्रतिमा इमेज कॉपीरइट Gandhi Statue Memorial Trust

जिस ब्रितानी साम्राज्य के ख़िलाफ़ महात्मा गांधी ने भारत की आज़ादी की लड़ाई लड़ी, वही ब्रिटेन उन्हें बड़ा सम्मान देने की घोषणा कर चुका है.

लंदन के पार्लियामेंट स्क्वेयर में जल्दी ही महात्मा गांधी की मूर्ति लगाई जाएगी.

लेकिन कुछ लोग इस जगह और इस समय गांधी की मूर्ति लगाने पर सवाल भी उठा रहे हैं. इनमें ब्रितानी संसद के हाउस ऑफ़ लॉर्ड के सदस्य भीखू पारेख भी हैं.

पढ़िए पूरी रिपोर्ट

पारेख कहते हैं, "गांधी जी तो गुज़र गए 1948 में. 1948 के बाद आज तक क्यों रुके? नेल्सन मंडेला की मूर्ति आपने बनाई, गांधी जी तो उनके गुरु थे. तब भी आपको गांधी जी की याद नहीं आई?"

"दूसरी बात यह कि आपने वहां (दिल्ली) जाकर ऐलान कब किया, परमाणु समझौते के बारे में आपने भारत से बातचीत की उसके बाद फ़ुटनोट के तौर पर आपने ऐलान कर दिया. आप हिंसा की बात कर रहे हैं और साथ-साथ आपने अहिंसा की मूर्ति को भी जोड़ दिया. तीसरी बात, यह कि आप इसमें यहां के प्रवासियों को शामिल क्यों नहीं करते."

लंदन स्थित भारतीय मूल की एक महिला इतिहासकार ने भी महिलाओं के बारे में गांधी के रवैये पर सवाल उठाते हुए मूर्ति लगाने का विरोध किया है.

लेकिन उन्होंने आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से मना कर दिया.

वहीं ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के लोग इस बात से काफ़ी ख़ुश दिखते हैं कि दुनिया को अहिंसा का संदेश देने वाले गांधी की अहमियत आख़िर ब्रितानी सरकार ने भी मानी है.

गांधी दुनिया भर के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल होंगे जिनकी मूर्तियां पार्लियामेंट स्क्वेयर इलाके में हैं.

ख़ास बात ये है कि गांधी इकलौते शख़्स होंगे, जिनकी मूर्ति किसी देश का प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या सांसद न रहने के बावजूद यहां लगाई जाएगी.

इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption महात्मा गांधी तीन नवंबर, 1931 को 10 हाउनिंग स्ट्रीट, लंदन के बाहर

'निर्बल का दोस्त'

गांधी की मूर्ति लगाने का ऐलान बीते साल अपनी भारत यात्रा के दौरान ब्रिटेन के वित्त मंत्री जॉर्ज ऑसबर्न और विदेश मंत्री विलियम हेग ने किया था.

लेकिन ब्रितानी सरकार ने गांधी को ही क्यों चुना?

गांधी स्टैचू मेमोरियल ट्रस्ट के ट्रस्टी और ब्रितानी संसद के हाउस ऑफ़ लॉर्ड के सदस्य मेघनाद देसाई कहते हैं, "सारे विश्व में जब भी निशस्त्र लोगों को शक्ति से लड़ना है वह गांधी जी का सत्याग्रह अपनाते हैं. वह गांधी जी का सबक पढ़कर जाते हैं. मार्टिन लूथर किंग हों या नेल्सन मंडेला, सारे विश्व में लोगों को एक बात मालूम है कि अगर आप निर्बल हों तो आपका दोस्त गांधी है."

महात्मा गांधी की इस मूर्ति के लिए भारतीय उद्योगपति राहुल बजाज और एनआर नारायणमूर्ति ने दो-दो लाख पाउंड देने का ऐलान किया है.

Image caption देसाई का कहना है कि गांधी पूरी दुनिया के निर्बलों के दोस्त हैं

ब्रिटेन सरकार का मानना है कि गांधी की मूर्ति भारत और ब्रिटेन की दोस्ती का अहम प्रतीक होगी.

गांधी की मूर्ति पार्लियामेंट स्क्वेयर में लगेगी जिसके साथ नेल्सन मंडेला और चर्चिल की भी प्रतिमांएं होंगी. वही चर्चिल जिन्होंने कभी गांधी को 'आधा नंगा फ़कीर' कहा था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार