'जानलेवा' रहा अफ़ग़ानिस्तान में 2014

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अफ़ग़ानिस्तान के लिए साल 2014 सबसे अधिक जानलेवा साबित हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में पिछले साल हताहत लोगों की तादाद में 22 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र 2009 से इन आंकड़ों पर नज़र रखे है. आंकड़े बताते हैं कि बीते साल 3,699 अफ़ग़ान मारे गए जबकि 6,849 घायल हुए.

आंकड़ों के अनुसार, ऐसा पहली बार है कि जब किसी सड़क किनारे बम विस्फोट के बजाय तालिबान और सरकारी बलों के बीच लड़ाई में सबसे अधिक लोग मरे.

तालिबान हमला

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क़ाबुल में ताज़ा आंकड़े जारी करते हुए संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि निकोलस हेसॉम ने कहा कि तालिबान और सुरक्षा बलों के बीच लड़ाई में मारे गए लोगों की संख्या कुल की एक तिहाई है.

2014 में रेडक्रॉस ने लड़ाई के दौरान घायल 37 फ़ीसदी अधिक लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया जबकि इस दौरान शवों की संख्या दोगुनी थी.

5000 जवान मृत

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संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विदेशी फ़ौजें जाने के बाद अकेले दिसंबर में ही तालिबान के हमले में 500 नागरिकों की मौत हुई.

इन आंकड़ों के अनुसार 2014 में अफ़ग़ान सेना और पुलिस के पांच हज़ार जवान मारे गए.

2009 से अब तक अफ़ग़ानिस्तान में 18 हज़ार मौतें हुईं जबकि 30 हज़ार लोग घायल हुए.

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