प्राचीन कलाकृतियों से आईएस की आमदनी

सीरिया की कलाकृतियां

चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के लिए तेल और फ़िरौती के बाद अब प्राचीन और दुर्लभ कलाकृतियों का कारोबार धन जुटाने का अहम ज़रिया बन गया है.

यही वजह है कि पिछले हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सीरिया से कलाकृतियों के सभी तरह के व्यापार पर पाबंदी लगा दी है.

सुरक्षा परिषद का आरोप है कि आईएस चरमपंथी तस्करी से हासिल किए गए इन सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल चरमपंथी गतिविधियों और हमलों के लिए करते हैं.

आईएस सीरिया, तुर्की और लेबनान के रास्ते यूरोप को कलाकृतियों की तस्करी किस तरह और किसकी मदद से करता है?

बीबीसी ने इस कारोबार में शामिल तस्कर, बिचौलिए, पुलिस, पुरावशेष अधिकारियों से जानकार जुटाने की कोशिश की.

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प्राचीन और दुर्लभ कलाकृतियों के ग़ैरक़ानूनी कारोबार में सबसे पहले नाम आता है तस्करों का.

तस्कर

ऐसा काम करने वाले एक प्रमुख तस्कर हैं मोहम्मद. वैसे तो वे मूल रूप से दमिश्क़ के हैं लेकिन फ़िलहाल उन्होंने अपना कारोबार सीरिया और लेबनान की सीमा पर स्थित बेका घाटी में समेट लिया है.

मोहम्मद ने सीरिया से लूटी गई कलाकृतियों की तस्करी कैसे शुरु की, इसके बारे में वे बताते हैं, 'एलेप्पो में हमारे तीन दोस्त हैं जो मदद के लिए यहां आते रहते हैं.'

उन्होंने बताया, "हम ज़्यादातर इयरिंग, अंगूठी, छोटी मूर्तियां, पत्थर के सिर जैसी छोटी लेकिन क़ीमती वस्तुओं की तस्करी करते हैं."

सीरिया में इस धंधे पर किसका क़ब्ज़ा है और इससे कौन अपनी जेबें भर रहा है, सवाल के जवाब में मोहम्मद ने आईएस का नाम बताया.

उन्होंने जानकारी दी, "इस ग़ैरक़ानूनी कारोबार को प्रमुख रूप से आईएस के लोग अंजाम दे रहे हैं और इस धंधे पर उनका ही क़ब्ज़ा है. वे, ख़ासकर एलेप्पो में, संग्रहालय से पुरानी और दुलर्भ वस्तुएं चुराते हैं."

वे बताते हैं, "आईएस चरमपंथियों के ताल्लुक़ात समंदर पार के देशों तक हैं. वे सौदा पक्का हो जाने पर अपने विदेशी संपर्क की बदौलत माल दूसरे देशों में भेजते हैं.

बिचौलिए

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लूटी गई दुर्लभ और प्राचीन काल की कलाकृतियों को बेचने के लिए अहमद जैसे बिचौलियों की ज़रूरत पड़ती है.

अहमद मूल रूप से पूर्वी सीरिया के रहने वाले हैं और फ़िलहाल दक्षिणी तुर्की में बसे हुए हैं.

अहमद बताते हैं कि वे सीरियाई स्मगलरों के लिए काम करते हैं. उनके कहने पर अहमद माल को स्थानीय कारोबारियों तक पहुंचाते हैं.

अहमद ने अपने पास छुपा कर रखी हुई दुर्लभ और प्राचीन मानव और जानवरों की मूर्तियां, कांच की कलाकृतियां, गुलदस्ते और सिक्के दिखाए.

वे बताते हैं कि इस कारोबार पर मुख्य रूप से इस्लामिक स्टेट का क़ब्ज़ा है.

आईएस की मर्ज़ी के बिना यहां कोई खुदाई नहीं कर सकता. हर खुदाई की निगरानी आईएस के इंस्पेक्टर करते हैं.

आईएस ऐसे लोगों से 20 फ़ीसदी टैक्स लेते हैं. अहमद बताते हैं कि वे हर चीज़ पर टैक्स लेते हैं.

पत्थर की वस्तुओं, मूर्तियों और सोने की पुरानी और दुर्लभ वस्तुओं की सबसे ज़्यादा मांग है क्योंकि इसमें सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा है.

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अहमद ने कहा, "एक बार मैंने 11 लाख डॉलर का माल बेचा. यह 8500ईसा पूर्व का था."

सारा माल अंततः पश्चिम यूरोप तक पहुंचाया जाता है. अहमद के मुताबिक़ इन्हें फिर तुर्की के व्यापारी यूरोप में डीलरों को बेच देते हैं.

डीलर

आईएस के लिए लूटी गई प्राचीन कलाकृतियों की तस्करी से धन जुटाने में तस्करों, बिचौलियों के बाद डीलरों का भी हाथ होता है.

बेरूत में पर्यटकों के लिए खोली गई एक दूकान में पुराने लैंप, अंगूठियां, कांच के बर्तन रखे हुए हैं.

क़ानून से बचने के लिए असलियत छुपाते हुए इन्हें नक़ली बताकर दूकान में रखा जाता है.

जिन ग्राहकों से डील होती है उन्हें सही माल दिया जाता है. इनमें कई वस्तुएं तो 1000 साल पुरानी हैं.

चुराई गई कलाकृतियों की वसूली में मदद करने वाले आर्थर ब्रांड लेबनान के अपने अनुभव के बारे में कहते हैं, "चुराई गई कलाकृतियों का ग़ैरक़ानूनी कारोबार बेहद पेशेवर तरीक़े से चलता है. इसके लिए दफ़्तर हैं, बिज़नेस कार्ड हैं. इन कलाकृतियों को लेबनान से ही नहीं सीरिया और इराक़ से भी ख़रीदा जा सकता है."

वे बताते हैं, "तस्करों और डीलरों के बीच चल रहे गुप्त कारोबार को कला की दुनिया स्वीकार नहीं करना चाहती."

पुलिस

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अंतरराष्ट्रीय तस्करी से निपटने के लिए बनाए गए लेबनान ब्यूरो के प्रमुख हैं लेफ्टिनेंट कर्नल निकोलस सैद.

उनके दफ़्तर में लेबनान में हाल में किए गए छापे में बरामद विशालकाय रोमन अर्ध प्रतिमा रखी हुई है. ये दफ़्तर सीरिया सीमा के पास है.

यहां दूसरी सीमा से आने वाले शरणार्थियों की लाइन लगी हुई होती है. तस्करों का गुट स्मगलिंग के लिए इन शरणार्थियों का इस्तेमाल धड़ल्ले से करता है.

लेफ्टिनेंट कर्नल बताते हैं, "शरणार्थी यहां बड़ी संख्या में आते हैं. तस्करी करने वाला गैंग अपना माल इनके सामान के बीच में छिपा देते हैं."

उनके अनुसार सीरिया में जब से संघर्ष शुरू हुआ है तब से चुराई गई प्राचीन और दुर्लभ वस्तुओं की तस्करी बढ़ गई है.

उनकी टीम ने अब तक सैंकड़ों सीरियाई कलाकृतियां बरामद की हैं.

पुरातत्वविशेषज्ञों के अनुसार ये कलाकृतियां ईसापूर्व रोमन काल की हैं और बेशक़ीमती और दुर्लभ हैं.

दुर्लभ ख़ज़ाना

बेरूत राष्ट्रीय संग्रहालय में ग्रीक, रोमन, यूनानी सभ्यता काल की 3,000 साल पुरानी मूर्तियां, अर्ध मूर्तियां और ताबूत रखे हुए हैं.

जबकि लूटी गई सबसे मूल्यवान और दुर्लभ कलाकृतियां तहख़ाने में रखी हुई हैं जो बाद में सीरिया को लौटा दी जाएंगी.

बेरूत के पुरावशेष महानिदेशालय की ओर से किए जाने वाली खुदाई के प्रमुख और पुरातत्वविशेषज्ञ असद सैफ़ी ने बताया, "यहां हमारे पास ऐसी दर्जनों कलाकृतियां हैं जो बाज़ार में 10 लाख डॉलर क़ीमत की हैं."

ज़ब्त की गई अधिकांश वस्तुओं में संग्रहालय से चुराई गई वस्तुओं से ज़्यादा मात्रा में खुदाई से बरामद वस्तुएं हैं.

मंज़िल

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दमिश्क़ में सीरिया के पुरावशेष विभाग प्रभारी मामून अबदुलकरीम बेहद नाराज़गी भरे अंदाज़ में कहते हैं, "आईएसआईएस के क़ब्ज़े में जो भी इलाक़े हैं वहां बहुत समस्याएं हैं. आईएस पैसों के लिए किसी भी तरह की लूटपाट से गुरेज़ नहीं करते हैं."

वे कहते हैं, "ये हमारा अतीत है, हमारी पहचान है, सरकार, विपक्ष और सभी सीरिया वासियों के लिए."

उन्होंने बताया, "हमें पक्का विश्वास है कि सीरिया से ये चीज़ें यूरोप, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, ब्रिटेन और दुबई तथा क़तर जैसे खाड़ी देशों को जाती हैं."

और अंत में, लेबनान के पुलिस अफ़सर से लेकर तस्कर मोहम्मद, बिचौलिए अहमद सबका यही मानना है कि लूट के इस कारोबार का मुख्य बाज़ार यूरोप है.

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