जहां महिलाओं की तलाशी लेते हैं पुरुष

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नेपाल और भारत सीमा चौकियों पर कोई महिला सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं है, जिसके कारण वहां महिलाओं की जांच भी पुरुष सुरक्षाकर्मी करते हैं.

लेकिन जब मंजु सिंह सीमा चौकी से होकर गुज़रीं और नेपाल सशस्त्र सीमा बल के जवावों ने उनसे जाँच कराने को कहा तो वो भड़क गईं.

उन्होंने कहा, “मेरी जांच आप कैसे करेंगे.” मंजु जब कुछ देर तक अपनी बात पर क़ायम रहीं तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें जाने दिया.

लेकिन बहुत सी महिलाएं चुप रहती हैं और पुरुष सुरक्षाकर्मी ही उनकी जाँच करते हैं.

'बहुत ख़राब लगता है'

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Image caption नेपाल से बहुत से लोग काम की तलाश में भारत आते हैं

यह समस्या सिर्फ़ नेपाली सीमा चौकियों पर नहीं, बल्कि भारतीय सीमा चौकियों पर भी है. भारत की ओर से तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की पोस्ट में भी महिला सुरक्षाकर्मी नही हैं.

नेपाल और भारत के बीच 1600 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जिससे दोनों देशों के नागरिक बेरोकटोक एक दूसरे के यहां आ जा सकते हैं. लेकिन सीमा पर महिला सुरक्षाकर्मी की तैनाती ना होने से दोनों देशों की महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है.

एक महिला रीता देवी कामत कहती हैं, “पुरुष सुरक्षाकर्मियों के जाँच करने का तरीका ठीक नहीं है. वे हमें छूते हैं तो बहुत ख़राब लगता है. कई बार तो सुरक्षाकर्मी और आम लोगों के बीच इस बात पर कहासुनी भी होती है.”

सीमा पर कहीं थाना है तो कहीं सुरक्षा चौकियां. एक सीमा चौकी पर 10 से 40 पुलिसकर्मी तक रहते हैं.

सीमा पर भारतीय सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की एक चौकी में 20 से ज़्यादा जवान रहते हैं जो सीमा पर आने-जाने वालों की जाँच करते है.

रहने की व्यवस्था नहीं

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नेपाल के धनुषा ज़िले में पुलिस एसपी गणेश बहादुर थापा मानते हैं, ''सीमा पर महिला सुरक्षाकर्मी की तैनाती बहुत जरूरी है. लेकिन वहां महिला सुरक्षाकर्मी के रहने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे महिला कर्मी को वहां नहीं रखा गया है.''

वहीं भारत के मधुबनी ज़िला में पिपरौन सीमा चौकी पर तैनात एसएसबी के इंस्पेक्टर बीआर तंवर कहते हैं, “हमारी बटालियन में तो बहुत सी महिलाएं हैं लेकिन उन्हें सीमा पर तैनात करने की व्यवस्था नहीं है. एक दो महिला कॉन्सटेबलों को रखने के लिए अलग से घर और सुरक्षा के प्रबंध करने पड़ेंगे.”

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महिला कॉन्सटेबल ना होने से सीमा चौकियां महिलाओं के लिए सहज नहीं हो पा रही हैं.

दूसरी तरफ कई महिलाएं भी सीमा पर ड्रग, सोना और चाँदी जैसी बहुमूल्य वस्तुओं की तस्करी में शामिल पाई जाती हैं.

इस बात को पुलिस भी मानती है, लेकिन महिला सुरक्षाकर्मियों के न होने की वजह से महिलाओं की जांच का काम ठीक से नहीं हो पाता है. यह पुलिस के लिए भी सिर दर्द बना हुआ है.

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