चीनी रक्षा बजट भारत से एक खरब डॉलर ज़्यादा

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चीन ने अपना रक्षा बजट का औपचारिक ऐलान किया है. यह 140 अरब डॉलर से ज़्यादा है यानी पिछली साल की तुलना में क़रीब 10 फ़ीसदी अधिक.

ख़ास बात यह है कि चीन की आर्थिक प्रगति की दर इस साल कुछ कम हुई है लेकिन उन्होंने अपने रक्षा बजट को इससे आज़ाद रखा है.

भारत ने भी अपने रक्षा बजट को इस बार बढ़ाया है और यह 40 अरब डॉलर से कम है. इस तरह चीन और भारत के रक्षा बजट में एक खरब डॉलर से ज्यादा का फ़र्क है.

भारत की चिंताएं

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पिछले 25-30 साल में चीन अपने रक्षा बजट को बहुत समझदारी से ख़र्च करता रहा है. उसने अपने टेक्नो मिलिट्री इंडस्ट्रियल बेस को बढ़ाया है और स्वदेशी सैन्य निर्माण को बेहतर किया है.

इसके विपरीत भारत में एनडीए की पहली सरकार से अब तक के कार्यकाल में रक्षा मंत्रालय ने 10 खरब रुपए की राशि बिना ख़र्च किए वापस कर दी है. जबकि सेना के तीनों अंगो- थल, वायु, जल सेना को आधुनिकीकरण की सख्त ज़रूरत है.

शायद इसी का नतीजा है कि भारत विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक है.

जैसे भारत के लिए चीन की बढ़ती शक्ति चिंता का विषय है उसी तरह चीन अपनी तुलना अमरीका से करता है जिसका रक्षा बजट 600 अरब डॉलर है.

चीन का लक्ष्य अगले दस साल में अमरीका की बराबरी करना है इसलिए भारत और उसके रक्षा बजट में अंतर अभी और बढ़ सकता है.

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भारत को आने वाले वक्त के लिए साइबर, स्पेस टेक्नोलॉजी और गाइडेड हथियारों की क्षमता हासिल करने पर भी काम करना होगा क्योंकि भारत के लिए चीन के साथ बराबरी करना मुश्किल होता जाएगा.

चीन से सबक

चीन की ख़ास बात यह है कि उनका आंतरिक सुरक्षा का बजट उनके रक्षा बजट से भी ज़्यादा है. अगर आंतरिक और बाह्य सुरक्षा बजट को मिलाकर देखें तो यह 350-400 अरब डॉलर से ज़्यादा है.

चीन ने रक्षा बजट में जितनी भी धनराशि दी है उसे अपने रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया है.

उदाहरण के लिए चीन जहाज़ निर्माण के मामले में पिछले 10-12 सालों में विश्व में पहले स्थान पर पहुंच गए हैं.

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भारतीय रक्षा मंत्री के सामने चुनौती यह है कि आप रक्षा बजट को 'मेक इन इंडिया' को बढ़ाने के लिए किस तरह इस्तेमाल करते हैं.

भारतीय मंत्रिमंडल के सामने भी यह चुनौती है कि रक्षा क्षमता को बढ़ाने, स्वदेशी निर्माण बढ़ाने के लिए क्या चीन जैसी दृढ़ता ला सकते हैं.

एक बड़ी चुनौती यह भी है कि भारतीय मेधा, जो भारत में या विदेशों में विदेशी कंपनियों के लिए काम कर रही है उसे भारत के विकास में लगाया जा सके.

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