चीनः 10 लाख रुपए में बिकता है एक बच्चा

चीन में बच्चों का एक ग़ैरक़ानूनी बाज़ार इमेज कॉपीरइट AFP

चीन में बच्चों की ख़रीद-फ़रोख़्त का एक गैरकानूनी बाज़ार तैयार हो गया है जहां बच्चे खुलेआम ऑनलाइन बेचे जा रहे हैं.

पुलिस का कहना है कि हर साल करीब 20,000 बच्चे अग़वा किए जाते हैं और उनकी ज़िंदगी पर इसका घातक असर पड़ता है.

शिओ की कहानी

फरवरी 2007 में शिओ का आठ साल का बेटा उनकी कपड़ों की दुकान के बाहर से ही गायब हो गया था.

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हॉगकॉग के नज़दीक चीन के औद्योगिक क्षेत्र हुइज़ो की पुलिस से शिओ को कोई मदद नहीं मिली.

उन्होंने स्थानीय टीवी पर बच्चे के लापता होने का विज्ञापन दिया. उन्होंने बच्चे की तलाश में पहले साल गुआंगडोंग प्रांत को अपनी मोटरसाइकिल से छान डाला.

शिओ बस-रेलवे स्टेशनों और शॉपिंग माल में पोस्टर लगाते रहे जिनमें सूचना देने वाले को इनाम की घोषणा होती थी. अंततः उन्होंने अपनी दुकान बेच दी और एक वैन ख़रीदी.

उनकी बीवी जूतों की एक फ़ैक्ट्री में काम करने लगी और नौ साल की बेटी को उसके दादा-दादी के पास भेज दिया गया.

इसके बाद शिओ पूरे चीन की यात्रा पर निकल गए जो आठ साल बाद भी जारी है. वह कहते हैं कि उनकी तलाश दो ही स्थितियों में ख़त्म होगी या तो उनका बेटा मिल जाए या उनकी मौत हो जाए.

चीन में हज़ारों मां-बाप को हर साल शिओ जैसे दर्द का सामना करना पड़ता है.

चीनी सरकार इस बारे में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं करवाती लेकिन अमरीकी विदेश विभाग के अनुसार हर साल करीब 20,000 बच्चों का अपहरण होता है.

चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार यह संख्या 2,00,000 प्रतिवर्ष भी हो सकती है, हालांकि पुलिस इस आंकड़े को ख़ारिज करती है.

रिपोर्ट के अनुसार एक बच्चे की कीमत 10500 पाउंड यानी करीब 10 लाख 50 रुपए से ज़्यादा मिल सकती है जो एक बच्ची के दाम के मुकाबले दोगुनी है.

इसकी वजह ये है कि अपने वंश को आगे बढ़ाने की चीनी मानसिकता के चलते लोग लड़कों को प्राथमिकता देते हैं.

चालाक होते तस्कर

अपहरण के बाद ज़्यादातर बच्चों को गोद लेने के नाम पर बेच दिया जाता है. कुछ बच्चों से आपराधिक गिरोह भीख भी मंगवाने हैं. अपहृत बच्चों में से ज़्यादातर हमेशा के लिए खो जाते हैं.

चीन में बच्चों के अपहरण का मुद्दा 12 साल पहले तब चर्चा में आया था जब गुआंग्शी प्रांत में एक बस के पीछे 28 शिशु मिले थे.

चुप रखने के लिए उन्हें नशा करवाया गया था और फिर नाइलॉन के थैलों में बंद कर दिया गया था. उनमें से एक की दम घुटने से मौत हो गई थी.

बच्चों के तस्करों को पकड़ लिया गया था और उनके सरगना को मौत की सज़ा हुई थी.

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लेकिन जैसे-जैसे अधिकारी बच्चों की तस्करी के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ करते गए, तस्कर और ज़्यादा चालाक होते गए. अब ज़्यादातर काम इंटरनेट के ज़रिए ही किया जाता है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, पिछले साल फरवरी में पकड़े गए चार गिरोह ऑनलाइन चैट फ़ोरम पर 'अनाधिकारिक रूप से गोद देने' की पेशकश कर रहे थे. इसके बाद की गई कार्रवाई में 1,094 लोगों को गिरफ़्तार और 382 शिशुओं को बरामद किया गया.

मजबूर मां या तस्कर

मैंने ऑनलाइन एक प्रस्ताव देखा जिसमें 'आठ महीने की एक स्वस्थ बच्ची' को बेचने का प्रस्ताव था और इसके लिए 'बच्चे को पालने के शुल्क' के रूप में 20,00,000 रुपये से ज़्यादा की मांग की गई थी.

इसमें यह भी लिखा था कि 'अगर संजीदा नहीं हैं तो परेशान न करें.'

मैंने बच्चा बेचने वाली से इंस्टेट मैसेंजर के ज़रिए संपर्क किया.

उसने बताया कि वह अकेली मां है और उसकी तीन बेटियां हैं- एक तीन साल की और आठ महीने की जुड़वा. वह इनका ख्याल नहीं रख सकती इसलिए जुड़वा बच्चों में से एक को बेचना चाहती है.

उसने मुझे एक तस्वीर भी भेजी जिसमें जुड़वा बच्चियां एक बिस्तर पर बैठी हुई थीं. वह मुस्कुरा रही थीं और लग रहा था कि उनका ध्यान रखा जाता है. आगे बैठी बच्ची को बेचा जाना था.

मैने उसे वीडियो कॉल करने को कहा, वह मान गई. एक अंधेरे कमरे में बच्चियों को कैमरे के सामने रखा गया था. तभी उनमें से एक रोई और हमें महिला तस्कर की आधी शक्ल दिखी.

फिर मैंने वह बातचीत रोक दी और इस बारे में अधिकारियों को सूचित किया लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

यह पता नहीं चल पाया कि वह महिला अपना बच्चा बेच रही थी या कोई तस्कर थी.

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ऐसा लगा कि चीन में बच्चे के पैदा होते ही उसके मां-बाप द्वारा उसे बेच देना बहुत आम है.

'बढ़ती रहेगी कालाबाज़ारी'

बीबीसी ने एक अस्पताल में जाकर चुपके से वीडियो शूट किया जहां एक डॉक्टर ने कहा कि छोड़ दिए गए बच्चे नियमित रूप से गोद देने के लिए बेच दिए जाते हैं.

उस महिला डॉक्टर ने कहा, "परिवार नियोजन कार्यक्रम के बावजूद बहुत सारे बच्चे पैदा होते हैं. अगर परिवार सही सौदा करे और इसे ठीक ढंग से किया जाए, पैदा होने के तुरंत बाद तो किसी को पता नहीं चलता."

चीन के सख्त परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत बहुत से परिवारों को एक से ज़्यादा बच्चा पैदा करने की छूट नहीं है और ऐसा करने पर बहुत भारी जुर्माना लगाया जाता है.

इसके अलावा ऐसे भी परिवार हैं जिनके एक बेटी है लेकिन वह बेटा चाहते हैं.

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हालांकि चीनी अदालतें बच्चों की तस्करी करने वालों से बहुत सख्ती से पेश आती हैं लेकिन शिओ चाहते हैं कि बच्चों को ख़रीदने वाले पर भी भारी जुर्माना लगे.

अभी उन्हें तीन साल तक की कैद हो सकती है लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि हकीकत यह है कि ज़्यादातर ख़रीदारों पर कोई मामला दर्ज किया ही नहीं जाता.

शिओ को लगता है कि जब तक कानून बदल नहीं जाता तब तक बच्चों की ख़रीद-फ़रोख़्त की कालाबाज़ारी बढ़ती ही रहेगी.

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