पाकिस्तान में सालों से जारी हैं ईसाइयों पर हमले

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पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक लाहौर शहर के चर्च को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले में मरने वालों की संख्या 15 हो गई है, जबकि 75 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.

सितंबर 2013 में पेशावर चर्च पर हमले के डेढ़ साल के भीतर ईसाई समुदाय को निशाना बनाकर किया गया यह दूसरा सबसे बड़ा हमला है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 22 सितंबर 2013 को ऑल सेंट्स चर्च पर हुए ऐसे ही दोहरे आत्मघाती हमले में 78 लोग मारे गए थे और 250 से ज़्यादा लोग ज़ख़्मी हुए थे.

हालाँकि कई अन्य स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में सवा सौ से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

गिरजाघरों पर हमले बढ़े

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इससे पहले, सितंबर 2012 में ख़ैबर पख़्तूनख्वां के मर्दान इलाके में कुछ सशस्त्र प्रदर्शनकारियों ने एक पुराने चर्च को आग लगा दी थी.

दिसंबर 2010 में इसी इलाके में एक चर्च पर ग्रेनेड से हमला किया गया था, हालाँकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था.

अगस्त 2006 में लाहौर के पास ही एक चर्च में आग लगाने की कोशिश की गई थी, जिससे इमारत के अंदरूनी हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा था.

अप्रैल 2005 में पेशावर के नज़दीक बगीचे में एक पादरी और उनके ड्राइवर का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था.

2005 नवंबर में ही पंजाब के सांगला हिल क्षेत्र में ईशनिंदा के आरोप में उग्र भीड़ ने दो चर्चों को आग लगा दी थी.

ईश निंदा के आरोप

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वर्ष 2004 के जनवरी में कराची के बाइबिल सोसाइटी के बाहर कार बम विस्फोट में 12 लोग घायल हो गए थे.

इसी तरह अगस्त 2002 में पंजाब के एक मिशन अस्पताल पर हुए हमले में चार महिलाओं की मौत हो गई थी. उसी साल क्रिसमस के दिन पंजाब में ही एक चर्च पर ग्रेनेड हमले में तीन लड़कियां मारी गईं थी.

मार्च 2002 में राजधानी इस्लामाबाद के विशेष सुरक्षा क्षेत्र में स्थित चर्च पर ग्रेनेड हमले में एक अमेरिकी महिला और और उसकी बेटी समेत पांच लोग मारे गए थे.

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छोटे-मोटे मुद्दों पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ के संघर्ष या मार-पीट पाकिस्तान में कोई नई बात नहीं है.

लेकिन आंकड़ों की नज़र से देखें तो पाकिस्तान में ईसाई समुदाय और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाकर होने वाले चरमपंथी हमलों में 2002 के बाद से तेज़ी आई है.

विश्लेषक 11 सितम्बर 2001 के आतंकी हमले के बाद अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में चलाए गए 'आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध' को इसकी मुख्य वजह मानते हैं.

पंजाब प्रांत के शहर बहावलपुर में अक्टूबर 2001 में एक चर्च को निशाना बनाकर किए गए हमले में बच्चों सहित 16 लोग मारे गए थे, पाकिस्तान में ईसाई समुदाय के ख़िलाफ़ सोच-समझकर किया गया शायद यह पहला चरमपंथी हमला था.

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