नाइजीरिया: शराबियों के गुप्त ठिकाने

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नाइजीरिया के कानो शहर में शराब पर सरकारी प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन दिन ढलते ही वहां के शराबखाने गुलज़ार हो जाते हैं.

यूं तो शहर में इस्लामी क़ानून शरीया लागू है लेकिन एक इलाक़ा ऐसा है जहां यह क़ानून लागू नहीं होता.

ये शराबखाने सैबोन गैरी नाम के एक उपनगर की सड़क के किनारे चलते हैं जहां ईसाई और मुसलमान आकर शराब पीते हैं.

यह इलाक़ा गैर-मुस्लिमों की व्यापारिक गतिविधियों के लिए है.

यहां शरीया लागू नहीं होता है इसलिए इन शराबखानों को हिस्बाह की ओर से कोई नुक़सान नहीं पहुंचाया जाता है.

छुपकर शराब का मज़ा

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हिस्बाह, इस शहर का इस्लामी पुलिस बल है. कानो में साल 2000 से शरीया लागू है जिसके तहत शराब पीने, जुआ खेलने और वेश्यावृति पर प्रतिबंध है.

शराबखाना चलाने वाले पॉल बीनी का कहना है, "यह धंधा खूब फलफूल रहा है. खचाखच भीड़ लगी रहती है. औरत-मर्द दोनों आते हैं. सैबोन गैरी के बाहर से भी लोग आते हैं."

वे हौसा समुदाय के उन मुस्लिम लोगों के बारे में भी बताते है जो छुप-छुपकर शराब का मज़ा लेने सैबोन गैरी आते हैं.

हफ़्ते के ज़्यादातर दिन ये शराबखाने सुबह तक खुले रहते हैं.

व्यापार

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कानो शहर के नॉन-इंडिजिनस कम्युनिटी लीडर्स एसोशियशन (निकोला) के नेता डॉक्टर पैट्रिक ऐलैंग्बे का कहना है, "हौसा समुदाय के बिना सैबोन गैरी का शराब व्यापार ठप पड़ जाएगा."

'निकोला' कानो शहर में नाइजीरिया के दूसरे हिस्सों से आए लोगों का संगठन है.

एक शाम मेरी मुलाक़ात हौसा मुस्लिम समुदाय के दो लोगों से शराबखाने में हुई जहां वे टेबल पर बीयर की बोतल लेकर पीने बैठे थे.

वे मुझसे बात करने को तैयार हो गए लेकिन तस्वीर लेने से मना कर दिया. ज़्यादातर पियक्कड़ ऐसा ही करते हैं.

अपमान

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उनका कहना था कि वे नहीं चाहते हैं कि उनके परिवार वाले लोगों को इसके बारे में पता चले.

उन्होंने बताया कि कई सारे मुस्लिम सुरक्षा के कारण रात के अंधेरे में यहां पीने आते हैं.

व्यापारी मोहम्मद अब्दुल ने कहा, "कभी-कभी मैं हफ़्ते में तीन बार यहां आता हूं."

उनके साथी तांको अली का कहना है कि अगर किसी मुसलमान को शरीया पुलिस कानो में शराब पीने की वजह से पकड़ती है तो उसके पूरे परिवार को सज़ा के तौर पर अपमान झेलना पड़ता है.

परेशानी

उन्होंने कहा, "अगर आप पकड़े जाते हैं तो आपको टीवी पर दिखाया जाएगा और कहा जाएगा यह इनका बेटा है, उनका दादा है."

लेकिन हिस्बाह चूंकि यहां शराबखानों पर छापा नहीं मारते हैं इसलिए यहां शराब पीने वाले सुरक्षित है.

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यहां शराबखाना चलाने वालों को जिस एक मुसीबत का सामना करना पड़ता है वो है कि शराब से भरे उनके ट्रक अक्सर हिस्बाह पुलिस शहर में प्रवेश करते वक़्त रोक लेती है.

पॉल बीनी का कहना है, "आपको तब रिश्वत देकर उनसे पीछा छुड़ाना पड़ता है."

सैबोन गैरी के शराबखानों पर बोको हराम के चरमपंथियों ने कई बार हमला किया है.

ऐसा आख़िरी हमला मई 2014 में किया गया था.

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