'जलाई गई औरत ने नहीं जलाया था क़ुरान'

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अफ़ग़ानिस्तान में अापराधिक मामलों की जांच करने वाले महकमे के प्रमुख ने कहा है कि जिस महिला को क़ुरान जलाने के आरोप में पीट-पीट कर मार डाला गया था, वह बेक़सूर थीं.

गुरुवार को गुस्साई भीड़ राजधानी काबुल में फ़रख़ंदा नाम की महिला को मस्जिद से बाहर खींच ले गई थी और उसे पीट-पीटकर मार डाला था. उसके बाद उसके शरीर को आग के हवाले कर दिया गया था.

जनरल मुहम्मद ज़हीर ने कहा है कि जांच के बाद ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित किया जा सके कि फ़रखंदा ने क़ुरान जलाया था.

सुपुर्दे ख़ाक़

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फ़रखंदा को रविवार को सुपुर्दे खाक कर दिया गया. उनके अंतिम संस्कार में बडी तादाद में लोगों ने शिरकत की. मानवाधिकारों के लिए लड़ रही संस्थाओं से जुड़े लोगों ने फ़रखंदा के जनाज़े को कंधा दिया.

फ़रखंदा के परिजनों का कहना है कि वह लंबे समय से मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं. इस मामले में सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

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अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने वारदात की निंदा की थी और कहा था कि किसी भी शख़्स को क़ानून अपने हाथ में लेने का हक़ नहीं है. उन्होंने पूरे मामले की तफ़सील से जांच करने के आदेश भी दिए थे.

पाकिस्तान में ईश निंदा के नाम पर लोगों पर हमले अक्सर होते रहते हैं, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में यह इस तरह का पहला मामला बताया जा रहा है.

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