यह आपको मारने की 'सुपारी' है

सुपारी को चूने, पान के पत्ते, और अन्य खुशबूदार पद्र्तों के साथ खाया जाता है

सुपारी खाना पूरी दुनिया में एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है, क्योंकि इससे कई तरह के रोग होते हैं.

एक सुपारी से तक़रीबन छह कप कॉफ़ी के बराबर का नशा होता है. सुपारी खान से हर साल हज़ारों लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं.

इसके बावजूद पूरी दुनिया में लगभग दस फ़ीसदी लोग किसी न किसी रूप में सुपारी खाते हैं.

सुपारी है लोकप्रिय

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पूरे एशिया में पाई जाने वाली सुपारी अरेका पॉम पेड़ से मिलती है. इसे इसके मधुर स्वाद और नशे के लिए चबाया जाता है.

निकोटीन, शराब और कैफ़ीन के साथ-साथ सुपारी को भी नशे का एक लोकप्रिय माध्यम माना जाता है.

बच्चे और औरतें तो सुपारी चबाते ही हैं, पुरुष भी इसे बहुत पसंद करते हैं.

ड्राइविंग करते वक़्त, मछली पकड़ते समय या कंस्ट्रक्शन की जगहों पर, जहां देर रात तक काम करना हो, लोग सुपारी का इस्तेमाल ज़्यादा करते हैं.

भयानक नतीजा

सुपारी का इस्तेमाल करने वालों को महंगी कीमत चुकानी पड़ सकती है. सुपारी चबाने वाले कई लोगों की ज़िंदगी मुंह के कैंसर होने से तबाह हो गई है.

कई मामलों में सुपारी खाने का नतीजा कई साल के बाद सामने आया है.

'ताइवान का च्युइंग गम' कही जाने वाली सुपारी पर ताइवान की सरकार जल्द ही नकेल कसने वाली है.

नेशनल ताइवान विश्वविद्यालय अस्पताल के मुंह के कैंसर के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर हैन लिआंग-जिउन कहते हैं, "यहां आधे लोगों को यह पता ही नहीं कि सुपारी के सेवन से मुंह का कैंसर हो सकता है."

लिआंग-जिउन ने कहा, "मुंह के कैंसर से होने वाली मौतों में ताइवान विश्व में दूसरे या तीसरे स्थान पर है."

सुपारी खाने के तरीके

अलग-अलग देशों में सुपारी खाने के अलग-अलग तरीके लोकप्रिय हैं. इसे चूने, पान के पत्ते, इलायची और दालचीनी जैसी खुशबूदार चीजों और तंबाकू के साथ मिला कर खाया जाता है.

कैंसर शोध पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इलायची और दालचीनी को छोड़ सभी चीजों में कैंसर पैदा करने वाले तत्व पाए जाते हैं.

इनमें सबसे ख़तरनाक चूना है, जो मुंह में हज़ारों बारीक छेद कर देता है. इससे कैंसर पैदा करने वाले तत्वों को शरीर में दाखिल होने का आसान रास्ता मिल जाता है.

क्या कर रही हैं सरकारें?

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ताइवान सरकार सुपारी से होने वाली बीमारियों का पता लगाने में लगी हुई है.

सरकार ने क़रीब दस लाख लोगों की मुफ़्त जांच की व्यवस्था की है. इसके अलावा वह सुपारी की आदत छुड़ाने वाले कार्यक्रमों को आर्थिक मदद भी देती है.

इन उपायों से अकेले ताइवान में ही साल 2013 में पुरुषों में सुपारी के इस्तेमाल की दर लगभग आधी हुई है.

सरकार सुपारी के पेड़ काट कर दूसरे पेड़ लगाने में किसानों को आर्थिक मदद दे रही है. सरकार सुपारी के बदले दूसरे पेड़ या फसल लगाने में किसानों की मदद कर रही है. इससे देश में सुपारी की खपत में कमी आएगी.

भारत और थाईलैंड जैसे अन्य देशों ने भी सुपारी का सेवन कम करने के लिए ख़ास मुहिम शुरू की है.

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