पश्चिमी धुनों का भारतीय 'कंडक्टर'

पश्चिमी क्लासिकल म्यूज़िक में भारतीय नामों की लिस्ट बनाना काफ़ी आसान काम है क्योंकि ज़ुबिन मेहता के सिवा शायद ही कोई नाम सीधे ज़ुबान पर आ पाता है.

लेकिन जल्द ही एक और नाम इस फ़ेहरिस्त में जुड़ सकता है.

ब्रिटेन में भारतीय मूल के अल्पेश चौहान को महज़ 24 साल की उम्र में 'द सिटी ऑफ़ बर्मिंघम सिंफ़नी ऑर्केस्ट्रा' में असिस्टेंट-कडंक्टिंग फ़ेलो चुना गया.

इस अनुभव को बेहद अहम बताते हुए वो कहते हैं, "आपको संगीत की बहुत गहरी समझ की ज़रूरत होती है. एक ऑर्केस्ट्रा की पूरी परफ़ॉर्मेंस कंडक्टर के ही ज़िम्मे रहती है."

ऑर्केस्ट्रा की दुनिया का जाना माना नाम ब्रिटिश कंडक्टर सर सायमन रैटल भी बर्मिंघम सिंफ़नी ऑर्केस्ट्रा के कंडक्टर रह चुके हैं.

नई उम्मीद

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Image caption ज़ुबिन मेहता ऑर्केस्ट्रा जगत में चमकता एक भारतीय नाम है.

वैसे अल्पेश की इस क्षेत्र में दिलचस्पी से उनका गुजराती परिवार थोड़ा हैरान हुआ क्योंकि वेस्टर्न क्लासिकल संगीत में भारतीयों का दख़ल बहुत कम है.

बर्मिंघम सिंफ़नी ऑर्केस्ट्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफ़ेन मैडॉक मानते हैं, "भारत या दूसरे एशियाई देशों में ऑर्केस्ट्रा की पढ़ाई नहीं होती जैसी इंग्लैंड में होती है इसलिए वहां से कंडक्टर्स नहीं बनते. हमें उम्मीद है कि अल्पेश के आने से एशियाई समुदाय को प्रेरणा मिलेगी."

अल्पेश ने अब तक भारत को नहीं देखा है. पर वो कहते हैं कि उनका बचपन बॉलीवुड फ़िल्में देखकर गुज़रा है.

भारत में परफॉर्म करने की बात पर वो बहुत उत्साहित होकर कहते हैं, "बेशक़ मैं वहां परफ़ॉर्म करना चाहता हूं. वहां मेरी जड़ें हैं. लोगों को लगता है कि भारत में सिर्फ़ बॉलीवुड संगीत है. मुझे लगता है कि उस संगीत में भी ऑर्केस्ट्रा का ख़ासा इस्तेमाल होता है."

फ़िलहाल अल्पेश की नज़र जून में होने वाले कॉन्सर्ट पर है जिसकी तैयारियां ज़ोर-शोर से चल रही हैं.'

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