पाक के थार रेगिस्तान में उम्मीद की किरण

थार

दक्षिण-पूर्वी पाकिस्तान के थार रेगिस्तान में तीन सालों से सूखे जैसे हालत हैं. खारे भूजल को सौर बिजली संयंत्र से पीने लायक बनाए जाने की परियोजना से लोगों को उम्मीद की एक नई किरण नज़र आ रही है.

रेगिस्तानी क्षेत्र के एक सुदूर गांव में लक्ष्मी भील हाथ से बने मिट्टी के घड़े को सिर पर लेकर, बालू से भरे रास्ते में नंगे पांव चलते हुए एक नज़दीक के कुंए के पास जाती हैं.

यहां की ज़्यादातर महिलाओं की तरह उनकी ज़िम्मेदारी भी पानी लाना है और उन्हें रोज़ाना कम से कम दो बार पानी लाना पड़ता है.

लक्ष्मी 200-300 मीटर गहरे कुएं से पानी निकालने के लिए लंबी रस्सी का इस्तेमाल करती हैं. यक़ीनन यह एक कठिन काम है.

इतनी मेहनत के बाद जो पानी वह घर ले जाती हैं वह दूषित होता है. साफ पानी के अभाव में उन्हें यह गंदा पानी पीना पड़ता है.

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थारपार्कर का यह रेगिस्तानी क्षेत्र पाकिस्तान का सबसे उपेक्षित इलाक़ा है. यहां तीन सालों से ठीक से बारिश नहीं हुई है.

इस आपदा से कई लोगों और मवेशियों की जान भी गई है.

लक्ष्मी कहती हैं, "अब ख़ुद खाने के लिए और बकरियों को खिलाने के लिए कुछ नहीं बचा है. इनमेें से अधिकांश तो मर गईं."

लक्ष्मी हिंदू दलित परिवार से हैं और कभी स्कूल नहीं गईं, इसलिए वो नहीं जानतीं कि उनकी उम्र कितनी है.

वो कहती हैं, "शायद 40 या 50 वर्ष." उनके 11 बच्चे थे, लेकिन वो बताती हैं कि इनमें केवल छह ही बच पाए क्योंकि बाकी बीमारियों से मर गए.

पानी की कमी वाले इस क्षेत्र में अपर्याप्त बारिश से सूखे जैसे हालात बन जाते हैं. यहा भूमिगत जल की कमी नहीं है, लेकिन यह बेहद खारा है.

लोगों की मौत की वजह भी जल से जुड़ी बीमारियां और कुपोषण हैं.

अधिकांश मौतें पानी से जुड़ी बीमारियों और कुपोषण के कारण हुईं. वर्ष 2014 में सैकड़ों नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी लेकिन इसके लिए स्थानीय मीडिया ने सूखे को ज़िम्मेदार बताया.

सोलर पैनल से मोबाइल चार्ज

इस इलाक़े में यह आपदा न तो नई है और न ही अप्रत्याशित. हर कुछ साल बाद दसियो हज़ार लोग आस पास के हरे भरे और सिंधु नदी के पास स्थित ज़िलों में पलायन कर जाते हैं.

आख़िरी बार जब मैं वर्ष 2000 में थारपार्कर में आया था तब मुझे इस क्षेत्र में आए भयंकर सूखे के प्रभाव का जायज़ा लेना था.

लेकिन 15 सालों के बाद कुछ मामलों में यह इलाक़ा काफ़ी कुछ बदल गया है. थार के बड़े शहरों को जोड़ने वाली कई नई सड़कें बन गई हैं. अब मुख्य गांवों में मोबाइल फ़ोन नज़र आता है.

लेकिन बिजली के लिए बुनियादी ढांचे की कमी अब भी है. हालांकि सौर ऊर्जा का रुझान बढ़ रहा है.

थार में यात्रा करते हुए सड़कों पर आपको कई ऐसे वेंडर मिल जाएंगे जो सोलर पैनल का इस्तेमाल करके आपका मोबाइल चार्ज कर देंगे.

लेकिन संचार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कोई सुधार नहीं है.

जल योजना

इस क्षेत्र में नवजात शिशुओं के मरने की दर देश में सबसे ज़्यादा है. विकास के सभी मानकों के लिहाज से थार पाकिस्तान के 120 ज़िलों में सबसे नीचले स्तर पर है.

आलोचकों का कहना है कि यह प्रशासकीय संकट का नतीजा है. वे भ्रष्टाचार और संस्थागत विफलता के लिए सिंध की प्रांतीय सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हैं, जिसे पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की पार्टी चला रही है.

लेकिन सरकार इस क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल से जुड़ी एक नई परियोजना में बड़े निवेश की बात कर अपना बचाव करती है.

उम्मीद जगी

कुल 3.3 करोड़ डॉलर की इस परियोजना के तहत पूरे रेगिस्तानी क्षेत्र के गांवों में 750 जल शुद्धीकरण संयंत्र लगाए जाने हैं.

इस परियोजना को चला रही कंपनी पाकओएसिस के मुताबिक़, क़रीब 280 संयंत्र लगाए जा चुके हैं.

इस परियोजना से थार में उम्मीद जगी है. इस परियोजना में भूमिगत जल को निकालने के लिए डेनमार्क से आयातित तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. पानी की गंदगी को अमरीकी मेंम्ब्रेन तकनीक से हटाया जाता है.

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फिल्टर प्रक्रिया को रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) कहा जाता है. प्रत्येक आरओ संयंत्र में बिजली की लागत शून्य है. यह चीन द्वारा आयातित सोलर पैनलों से चलता है.

इन जल संयंत्रों में से सबसे बड़ा संयंत्र 'मीठी' के नज़दीक एक पहाड़ी पर लगाया गया है. इसमें रोज़ाना 20 लाख गैलन पानी को शुद्ध करने की क्षमता है. इसकी पूर्ण क्षमता से तीन लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

इस परियोजना में शुरुआती दिक़्कतें भी आई हैं और कुछ आरओ संयंत्र के बंद होने की ख़बरें भी आईं. फिर भी इससे लोगों को काफ़ी उम्मीदें हैं.

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