शादी के लिए किसे नहीं मिलेगा केक

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Image caption समलैंगिक शादी के लिए तैयार एक केक को ऊपर की सजावट

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी स्विट्ज़रलैंड में रात-रात भर जागकर ईरानियों को परमाणु मामले पर हल्दी-चूना कहलवाने की कोशिश में जुटे हुए थे लेकिन वॉशिंगटन के बाहर शायद ही किसी को उनकी परवाह थी.

अभी तो पूरा अमरीका लग रहा है जैसे केक, पिज़्ज़ा और फूल को लेकर जंग में जुटा हुआ है.

आपकी शादी हो रही है- अब थोड़ी देर के लिए मान भी लो यार, मैं कौन सा ज़बरदस्ती कर रहा हूं!

आप शादी के लिए पास की बेकरी में केक का ऑर्डर देने गए, पिज़्ज़ा वाले को पिज़्ज़ा पहुंचाने के लिए कहा और फूलवाले से सजावट की तैयारी करने को कहा.

तीनों ने साफ़ मना कर दिया. क्यों भाई?

क्योंकि आप मर्द हैं और एक मर्द से शादी कर रहे हैं, या फिर एक महिला हैं और दूसरी महिला से शादी कर रही हैं यानि आप समलैंगिक हैं और मेरा धर्म इसकी इजाज़त नहीं देता.

दो राज्यों में क़ानून

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अमरीका के दो राज्यों, इंडियाना और आरकैंसस में धार्मिक आज़ादी पर ये क़ानून आया है कि आपका सेक्सुअल रूझान क्या है, उस आधार पर कोई दुकानवाला चाहे तो आपको सामान बेचने से मना कर सकता है और आप उसको अदालत में नहीं ले जा सकते.

ज़ाहिर है समलैंगिक और उदारवादी इसे अपने अधिकारों के ख़िलाफ़ एक तलवार की तरह देख रहे हैं, वहीं रूढ़िवादी गुट उदारवादी हमले के ख़िलाफ़ इसे एक ढाल मान रहे हैं.

कौन सही, कौन ग़लत इसकी बहस तो लंबी चलेगी लेकिन इसका सीधा असर हुआ इंडियाना में जब एक पिज़्ज़ा दुकान के मालिक की बेटी ने टीवी पर एलान कर दिया कि उसकी दुकान से अब किसी समलैंगिक शादी के लिए पिज़्ज़ा नहीं जाएगा क्योंकि उसका धर्म इस तरह की शादी को नहीं मानता है.

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Image caption समलैंगिक विवाह के समर्थन में हो रहे हैं प्रदर्शन

ये वीडियो कटी हुई पतंग की तरह उड़ चला यानि वायरल हो गया. सोशल मीडिया पर उसे इतनी गालियां पड़ीं कि सहमकर उन्होंने दुकान ही बंद कर दी है. लेकिन उसके कई हिमायती भी आ खड़े हुए हैं और इंटरनेट पर पिज़्ज़ावाले के लिए अब तक 72,000 डॉलर का चंदा जमा कर लिया गया है.

अदालत का फ़ैसला

वैसे 29 और राज्यों में भी इससे मिलते-जुलते क़ानून हैं और कोलोराडो में ऐसे ही दो मामले हुए केक को लेकर. एक मामले में समलैंगिक शादी के लिए केक देने से मना किया गया, तो दूसरे में एक सज्जन आए और उन्होंने कहा कि बाइबल जैसा केक बनाकर दो और उसपर लिखो कि समलैंगिक शादी पाप है. दुकानवाले ने जब मना किया तो उसपर भी हंगामा मच गया.

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Image caption बर्मिंघम प्रोबेट कोर्ट के आगे लगा रिबन कहता है कि यहां समलैंगिक लोग शादी कर सकते है.

सियाटल राज्य में इसी तरह फूल को लेकर हंगामा मचा और न्यू मेक्सिको में तो एक फ़ोटोग्राफ़र ने समलैंगिक शादी में तस्वीर खींचने से मना कर दिया तो उसे अदालत में घसीटा गया लेकिन अदालत ने उसके हक़ में फ़ैसला सुनाया.

अब इंडियाना में तो ये हालत है कि जो दुकानवाले इस क़ानून के ख़िलाफ़ हैं वो बेचारे दुकान के बाहर इश्तहार लगा रहे हैं कि "यहां सबको सामान बेचा जाता है.” वॉलमार्ट, ऐपल और कई बड़े-बड़े नाम इस क़ानून के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं.

क़ानून के हिमायती

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लेकिन ये क़ानून लाने वाले और इसकी हिमायत करनेवालों का कहना है कि हमारी तो तारीफ़ होनी चाहिए क्योंकि हम हर धर्म को अपने हिसाब से चलने की आज़ादी दे रहे हैं. उन्होंने उदाहरण दिया है कि उनके इस क़ानून की वजह से एक सिख महिला को वो सारी चीज़ें लेकर ऑफ़िस में आने की इजाज़त मिली जो उनके धर्म में कहा गया है.

बड़ी अच्छी सोच है. मैं तो इंतज़ार कर रहा हूं कि कल के दिन कोई इस्लामिक स्टेट का भूला-भटका बंदा या ग्वांतानामो जेल से छूटा हुआ तालिबान वहां जाए और कहे कि मैं तो अपनी दुकान शरिया क़ानून के हिसाब से चलाऊंगा, काफ़िरों को सामान नहीं बेचूंगा या फिर इंडियन रेस्तरां चलानेवाला हिंदू ये कह दे कि बीफ़ खानेवालों को मैं सामान नहीं बेचूंगा तो ये बात उन्हें क़ुबूल होगी या नहीं.

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