बीफ़ बाज़ार: ब्राज़ील देगा भारत को झटका?

ब्राज़ील में भारतीय नस्ल की गाय इमेज कॉपीरइट SHOBHAN SAXENA
Image caption 18.5 करोड़ मवेशियों के साथ ब्राज़ील दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मवेशी संख्या वाला देश है. अधिकांश ब्राज़ीली गायें भारतीय नस्ल की हैं, जिन्हें पुर्तगाली 16वीं सदी में यहां ले आए थे.

महाराष्ट्र सरकार ने मार्च के पहले हफ़्ते में जब गोहत्या और बीफ़ की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया तो उसी दौरान इराक़ ने ब्राज़ील से बीफ़ के आयात को फिर से शुरू करने का फैसला लिया.

लातिनी अमरीकी देश ब्राज़ील में मैड काऊ बीमारी का एक मामला सामने आने के कारण इराक़ ने अप्रैल 2014 में बीफ़ के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

हो सकता है कि भारत के राज्यों में लगे प्रतिबंध और इराक़ के प्रतिबंध हटाने की ये दोनों घटनाएं महज़ संयोग हों.

लेकिन भारत के कई राज्यों में उठाए गए इस क़दम से, ब्राज़ील के लिए बीफ़ व्यापार में एक बेहतरीन मौका पैदा हो गया है.

आने वाले महीनों में भारत से बीफ़ निर्यात और इससे होने वाली आमदनी में गिरावट आ सकती है और ब्राज़ील को भारत के इस नुकसान से फ़ायदा हो सकता है.

भारत दुनिया में बीफ़ का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है.

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अमरीकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत की बाज़ार हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है. ब्राज़ील पहले पायदान पर है.

भारत दक्षिण पूर्वी एशिया और मध्य पूर्व के देशों को बीफ़ निर्यात करता रहा है, जो कि बड़े पैमाने पर भैंस का मांस होता है.

बीफ़ निर्यात से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा पाने वाला ब्राज़ील इन दोनों इलाक़े में अपनी बाज़ार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत कोशिश करता रहा है.

ब्राज़ीलियन एसोसिएशन ऑफ़ बीफ इंडस्ट्री एंड एक्सपोर्ट (एबीआईईसी) से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, “साल 2014 में भारत से बीफ़ के निर्यात में 12 फ़ीसदी बढ़ोतरी हुई और आमदनी में 27 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई.”

उनका कहना था, “हालांकि अभी तक हम नहीं जानते कि भारत से बीफ़ निर्यात में क्या कोई गिरावट आई है. लेकिन यह एक ऐसा मौका है, जिसे हम भुनाना चाहेंगे. हम लगातार बाज़ार पर नज़र बनाए हुए हैं.”

हाल के सालों में ब्राज़ील के कुछ प्रांतों में मैड काऊ बीमारी के कुछ मामले सामने आने से बीफ़ के निर्यात पर असर पड़ा है.

बीफ़ निर्यात बढ़ा था

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इस कारण चीन, सऊदी अरब और इराक़ जैसे देशों ने ब्राज़ील से बीफ़ के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

अब इराक़ के लिए ब्राज़ील से निर्यात बढ़ सकता है, तो सऊदी अरब भी इराक़ के रास्ते पर जा सकता है.

खाड़ी के देश अक्सर सऊदी अरब के नक्शे क़दम पर चलते हैं. सऊदी अरब ने ब्राज़ील के बीफ़ पर 2012 में ही प्रतिबंध लगा दिया था.

एबीआईईसी अधिकारी के अनुसार, “इन कारणों से भारत से बीफ़ के निर्यात में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन इन देशों को बीफ़ निर्यात बढ़ाने के लिए अब हम फिर से दौड़ में शामिल हो गए हैं.”

अप्रैल से अक्तूबर 2014 के बीच भारत ने 2.6 अरब डॉलर (लगभग 16 हजार करोड़ रुपए) का बीफ़ निर्यात किया.

यह अप्रैल से अक्तूबर 2013 के मुक़ाबले 16 फ़ीसदी ज़्यादा है.

गुणवत्ता के लिहाज़ से अप्रैल से अक्तूबर 2014 के बीच कुल 8,17,844 टन बीफ़ निर्यात हुआ था, जबकि अप्रैल से अक्तूबर 2013 के मुक़ाबले यह 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.

ब्राज़ील को फ़ायदा

भारत से बीफ़ चीन और मध्य पूर्व के देशों को निर्यात हुआ, जहां ब्राज़ीली मांस प्रतिबंधित था.

लेकिन ब्राज़ील को पिछले साल नवंबर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई, जब ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में जी 20 देशों के सम्मेलन के दौरान उसने चीन से मांस व्यापार को दोबारा शुरू करने पर समझौता किया.

इसी तरह का एक और समझौता हाल ही में सऊदी अरब के साथ हुआ है.

अब ब्राज़ील में बीफ़ उत्पादन में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है.

साल 2014 की पहली छमाही में ब्राज़ील से बीफ़ निर्यात 7,60,000 टन को पार कर गया था.

एबीआईईसी के आंकड़ों के अनुसार यह दहाई अंक की सालाना बढ़ोतरी है.

असल में ब्राज़ीली मुद्रा रियाल में अवमूल्यन की वजह से दिसंबर से ही खाड़ी और उत्तरी अफ़्रीकी देशों को भारतीय बीफ़ निर्यात में कमी आती जा रही थी.

ब्राज़ीली मुद्रा में गिरावट

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रियाल का छह महीने में ही 20 फ़ीसदी अवमूल्यन हो चुका है.

चूंकि इन इलाक़ों के बाज़ार पर कब्ज़े के लिए भारत और ब्राज़ील सीधे प्रतिद्वंद्विता कर रहे हैं, इसलिए भारत के मुक़ाबले ब्राज़ील से आयात ज़्यादा सस्ता हो गया है.

साओ पाओलो के एक मीट एक्सपोर्टर ने बताया, “इससे पहले भारत से आने वाला मांस 25 फ़ीसदी सस्ता पड़ता था. अब ब्राज़ीली मांस ज़्यादा सस्ता हो गया है. बीफ़ पर पाबंदी से ज़्यादा झटका तो भारत को ब्राज़ीली मुद्रा के लुढ़कने से लगने वाला है.”

ब्राज़ील की मुद्रा में गिरावट और अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण बीफ़ निर्यात में तेज़ी वरदान साबित हो सकती है.

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एबीआईईसी के अनुमान के अनुसार, बीफ़ के निर्यात से ब्राज़ील को होने वाली आमदनी 2015 में आठ अरब डॉलर तक पहुंच सकती है और निर्यात 17 लाख टन पहुंच सकता है.

ब्राज़ील को 2014 में 7.2 अरब डॉलर की आमदनी हुई थी.

रूस को बीफ़ निर्यात और चीन, सऊदी अरब और जापान जैसे बाज़ारों के खुलने से ब्राज़ील के बीफ़ निर्यात में जल्द ही नाटकीय तेज़ी आ सकती है.

जो कमाई भारत को मिलने वाली थी वो अब ब्राज़ील के खज़ाने में जा सकती है.

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