शिकार और शिकारी दोनों मर रहे हैं फिर भी..

गैंडे का शिकार इमेज कॉपीरइट Getty Images

दक्षिण अफ्रीका में पिछले साल रिकॉर्ड 1215 गैंडों का शिकार किया गया. इन गैंडों का शिकार उनके सींग के लिए किया जाता है.

वहीं इस दौरान पुलिस और रेंजर्स की शिकारियों से हुई मुठभेड़ों में 42 शिकारी मारे गए.

गैंडे की सींग के लिए चल रही जंग हर साल तेज़ होती जा रही है.

इस खूनी संघर्ष के पीछे है, एशिया में प्रचलित ये ग़लत धारणा कि गैंडे की सींग से कैंसर का इलाज होता है.

पढ़ें विस्तार से

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption यूसेबियो

यूसेबियो दक्षिण अफ्रीका की सीमा से लगे मोज़ाम्बिक के एक गांव में रहते हैं. ग़रीबी और पिछड़ेपन से निजात पाने के लिए वे गैंडे के शिकार की योजना बनाते हैं.

लेकिन मोज़ाम्बिक में अब कोई गैंडा बचा नहीं है, आखिरी गैंडे को दो साल पहले ही मार दिया गया था.

(तस्वीरों मेंः गैंडों का शिकार)

यूसेबियो के निशाने पर सीमा पार क्रुगेर नैशनल पार्क है जिसे जंगली जानवरों की जन्नत कहा जाता है.

यहां दुनिया के ज़्यादातर गैंडों की आबादी रहती है और जाहिर है कि शिकारियों की नज़र भी इनपर बनी रहती है.

मुश्किल काम

इमेज कॉपीरइट Getty Images

यूसेबियो बताते हैं, "हम रेंजर्स की गतिविधियों पर नज़र रखते हैं और जब अंधेरा हो जाता है तो हम लंबी दूरी तय करते हैं, जहां रेंजर्स शायद ही जाते हैं. जब आस-पास पुलिस न हो तो गैंडे का शिकार किया जा सकता है. लेकिन उसकी मौत पहली गोली से हो जानी चाहिए नहीं तो वो ख़तरनाक हो सकता है. उसकी सींग काटना मुश्किल काम है लेकिन ये हमें आता है."

(पढ़ेंः शिकारियों ने मारे 13 गैंडे)

शिकारी लोग सामान्यतः तीन के गुट में काम करते हैं. एक गैंडे पर निशाना लगाता है, दूसरा उसकी सींग काटता है और तीसरा आस-पास की गतिविधियों पर नज़र रखता है.

क्रुगेर पार्क में ये यूसेबियो का चौथा सफल दौरा है जहां उसने दस हज़ार अमरीकी डॉलर बनाए हैं.

कैंसर का इलाज!

इमेज कॉपीरइट Getty Images

एशिया में गैंडे की सींग की क़ीमत का ये एक छोटा सा ही हिस्सा है. माना जाता है कि ये कैंसर के इलाज से लेकर कामोत्तेजना बढ़ाने तक में कारगर होता है. यहां इसकी क़ीमत ढाई लाख अमरीकी डॉलर तक है.

(पढ़ेंः बाघों की कब्रगाह...)

लेकिन यूसेबियो के लिए इसका मतलब बस इतना है कि वो अपनी तीन बीवियों और बच्चों को झोपड़ी से निकालकर कंक्रीट के मकान में ले जा सकेगा, कुछ मवेशी खरीद सकेगा और एक शराबखाना खोल सकेगा.

हालांकि यूसेबियो को इस पर कोई गर्व नहीं है लेकिन उनका कहना है कि अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो उनके परिवार को भूखे रहना पड़ेगा.

गैंडों का शिकार

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

दक्षिण अफ्रीका में साल 2007 में 13 गैंडों का शिकार हुआ था लेकिन 2013 और 2014 में ये संख्या बढ़कर हज़ार पार कर गई. लेकिन अब गैंडों को बचाने के लिए भी ज़्यादा प्रयास होने लगे हैं.

इस काम के लिए कई कंपनियाँ भी खुल गई हैं. इन्हीं में से दक्षिण अफ्रीकी कंपनी 'प्रोट्रैक' है जो शिकारियों के ख़िलाफ़ काम करने वाली प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी के तौर पर काम करती है.

(पढ़ेंः गैंडे के सींग में माइक्रोचिप लगाने की योजना)

प्रोट्रैक के स्टार रेंजर टुमी मोरेमा ने कई शिकारियों को पकड़ा है. वे कहते हैं कि उनकी पत्नी को पूरा भरोसा है कि एक रोज़ वे मारे जाएंगे, या तो शिकारियों के हाथों या फिर जंगली जानवरों से.

ग़रीबी और लालच

इमेज कॉपीरइट AFP

टुमी मोरेमा पर मंडरा रहा ख़तरा उनके घर तक भी चला आता है. उन्हें घर पर 'देख लेने' की धमकियां भी मिलती रहती हैं.

लेकिन इसके बावजूद वे समझते हैं कि शिकारियों को ग़रीबी और लालच के अलावा कौन सी बात गैंडे के शिकार के लिए अपनी ओर खींचती है.

वे कहते हैं, "कई साल पहले जंगलों की कोई सरहद नहीं थी. तब गोरे लोग आए और उन्होंने घेरे खींच दिए. और अब वे जानवरों के मालिक हैं और काले लोगों को लगता है कि जंगल पर उनका अधिकार छीन लिया गया. इसलिए वे इसकी इज़्ज़त नहीं करते हैं. यही सबसे बड़ी समस्या है और शिकार की यही कारण है."

लुभावना कारोबार

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

दक्षिण अफ्रीका में पिछले साल मारे गए 42 शिकारियों में से यूसेबियो का छोटा भाई सेबास्टियो भी था. दो बीवियां, दो बच्चे और निराश मां-बाप सेबास्टियो के पीछे रह गए हैं.

हालात की गंभीरता का अंदाज इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले साल तक मोज़ाम्बिक में शिकार कोई अपराध नहीं था और वहां अब भी ऐसे लोग हैं जो इस लुभावने कारोबार को रोकने से हिचकते हैं.

इमेज कॉपीरइट REUTERS US DEPARTMENT OF JUSTICE

ज़्यादातर गैंडों को उनकी सींग के लिए मारा जाता है, हालांकि कुछ को बस बेहोश ही किया जाता है. लेकिन उनका उपचार कैसे हो? ये एक गंभीर मसला है.

वाइल्ड लाइफ़ सर्जन जोहान मराइस कहते हैं, "सबसे बड़ी चुनौती उनके आकार की वजह से होती है. इसी वजह से उनके इलाज की कम ही गुंजाइश रहती है."

मराइस बताते हैं, "साल भर तक उसे हर चार हफ़्ते पर बेहोश करके ज़ख्मों पर मरहम लगाए जाते हैं. हर बार ये बहुत ख़तरनाक होता है और इनके मालिकों के लिए महंगा भी होता है. लेकिन इन्हें बचाने के लिए ये किया जाना ज़रूरी है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार