'न्याय व्यवस्था नहीं लूट सकी मेरी खुशियां'

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28 सालों तक मौत की सज़ा का इंतज़ार करने के बाद रिहा हुए एक अमरीकी नागरिक एंथोनी रे हिंटन का कहना कि देश की न्याय व्यवस्था ने उनकी जिंदगी के तीन दशक भले ही लूट लिए हो लेकिन वे उनकी खुशी नहीं छीन सके.

पिछले हफ्ते बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में हिंटन ने कहा कि उन्होंने कभी भी अपनी मौत की सज़ा को नहीं स्वीकारा था.

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हिंटन की जब गिरफ्तारी हुई थी तब वो 29 साल के थे.

उन्हें साल 1985 में बर्मिंघम में दो रेस्तरां मैनेजरों के कत्ल का दोषी ठहराया गया था लेकिन पिछले साल फिर से शुरू हुई सुनवाई में उनके ख़िलाफ़ सबूत सही नहीं पाए गए.

घटना स्थल पर मिली गोलियां हिंटन के ख़िलाफ़ एकमात्र सबूत थी.

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