यमन को हथियार देने में तेज़ी: अमरीका

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अमरीका ने कहा है कि वो यमन में हूती विद्रोहियों से लड़ रही सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना को हथियार देने में तेज़ी ला रहा है.

विदेश उप मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन ने कहा है कि अमरीका गठबंधन सेना के साथ ख़ुफिया जानकारी भी बांट रह है.

इस बीच सहायता करने वाली कई संस्थाओं का कहना है कि बंदरगाह शहर अदन पर मानवीय आपदा का ख़तरा मंडरा रहा है. यहां विद्रोहियों और गठबंधन सेना के बीच लड़ाई सड़कों पर हो रही है.

अदन बन चुका है भूतहा शहर

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विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यमन में बीते कुछ हफ्तों से जारी लड़ाई में 550 लोग मारे जा चुके हैं और 1700 लोग घायल हुए हैं.

रेडक्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति (आईसीआरसी) ने बीबीसी को बताया है कि अदन पर कब्ज़े को लेकर हो रही लड़ाई ने इसे 'भूतहा शहर' में तब्दील कर दिया है.

आईसीआरसी के अधिकारी रॉबर्ट घोसन का कहना है कि शहर में लोगों को मेडिकल सेवाएं तुरंत चाहिए.

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सहायता एजेंसियों का कहना है कि लड़ाई की वजह से 100,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं.

दवाओं की कमी

संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाली एजेंसी यूनिसेफ़ का कहना है कि अस्पतालों में दवाओं की कमी हो गई है.

ऐसे में घायलों का इलाज करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं.

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कुछ इलाकों में पानी की सप्लाई करने वाली प्रणाली पूरी तरह से बर्बाद हो गई है. सबसे ख़राब असर अदन के दक्षिणी भाग पर पड़ा है.

यमन के राष्ट्रपति मंसूर हादी सऊदी अरब भाग गए है.

उनके समर्थक एक पखवाड़े से सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के हवाई हमलों की मदद से विद्रोहियों से लड़ रहे हैं.

लड़ाई इतनी बढ़ गई है कि यमन के लोग और वहां फंसे विदेशी नागरिक अदन की खाड़ी से होते हुए जिबूती की तरफ पलायन कर रहे हैं.

भारत भी यमन से अब तक अपने 3500 नागरिकों को निकाल चुका है.

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