भारतीय छात्रों को क्यों लुभा रहा है जर्मनी?

वेंकट राज, भारतीय स्टूडेंट जर्मनी में
Image caption जर्मनी में शोध कर रहे भारतीय वेंकट राज.

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के वेंकट राज कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अवसरों की तलाश में थे.

वह तकनीक में दिलचस्पी रखते हैं. इसरो में चयन के बाद भी वो उच्च शिक्षा के लिए देश से बाहर जाना चाहते थे. आज वो जर्मनी में एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं.

उन्हें ऑस्ट्रेलिया और अमरीका से भी दाखिले के ऑफ़र मिले थे लेकिन उन्होंने जर्मनी को चुना.

वेंकट राज कहते हैं, ''मैंने जर्मनी में जो कोर्स किया उसके बाद दो साल तक आईबीएम सुपर कम्प्यूटर्स के साथ काम किया. जर्मनी ऐसी जगह है जहां आप सीख सकते हैं और उसे आज़मा भी सकते हैं. यहां मुझे बहुत कम समय में वास्तविक प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिला.''

भारतीय छात्रों की पसंद

Image caption जर्मन एकेडमिक एक्सचेंज सर्विस की प्रवक्ता अदिति गोसावी.

जर्मनी बेहद तेज़ी से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय छात्रों की पसंद बनकर उभरा है. जर्मनी में करीब दस हज़ार भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं.

सिर्फ़ आखेन शहर में ही करीब तीन सौ भारतीय छात्र हैं. कम या न के बराबर फ़ीस, शोध की बेहतर सुविधाएं और आसान वीज़ा नियम इसके पीछे बड़ी वजह हैं.

अदिति गोसावी भारत में जर्मन उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने वाली संस्था डाड या जर्मन एकेडमिक एक्सचेंज सर्विस की प्रवक्ता हैं.

वह कहती हैं, ''जर्मन सरकार शिक्षा को बहुत महत्वपूर्ण समझती है और इसी वजह से जर्मनी में पूरी उच्च शिक्षा सब्सिडाइज़्ड है. जिसका अर्थ यह हुआ कि विद्यार्थियों से जर्मन यूनिवर्सिटीज़ ट्यूशन फ़ीस नहीं लेती."

उन्होंने बताया, "पढ़ाई के दौरान तो विद्यार्थी पार्ट टाइम जॉब करके पैसे कमा ही सकते हैं लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद भी जर्मनी उनको नौकरी पाने के बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराता है.''

विवाद का असर

हालांकि हाल ही में जर्मनी में भारतीय छात्रों को लेकर कुछ विवाद भी हुए हैं. एक जर्मन प्रोफ़ेसर ने एक भारतीय छात्र को 'भारत में बलात्कार की समस्या' का हवाला देते हुए इंटर्नशिप देने से मना कर दिया था.

लेकिन भारतीय छात्र ऐसी घटनाओं को चिंता की बड़ी वजह नहीं मानते.

Image caption जर्मनी को भी भारतीय छात्रों के आने से फ़ायदा.

आखेन की आरडब्ल्यूटीएच यूनिवर्सिटी के छात्र दीपकराज पुरुषोत्तमन कहते हैं, ''जर्मनी में ज़्यादातर लोगों को पता है कि भारत में बलात्कार के मुद्दे पर चर्चा हो रही है लेकिन मुझे नहीं लगता कि यहां इससे भारतीय पुरुषों की छवि ख़राब हुई है.''

दोनों देशों का फ़ायदा

बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों के जर्मनी आने में जर्मनी का भी फ़ायदा है जिसे अपनी कंपनियों के लिए प्रशिक्षित इंजीनियर और कर्मचारी मिलते हैं.

ऐसे में कहना ग़लत नहीं होगा कि यह दोनों देशों के लिए फ़ायदे का सौदा है.

वेंकट राज अब भारत के छात्रों को वर्चुअल लैब की मदद से अपने प्रोजेक्ट में प्रशिक्षित कर रहे हैं. वह जर्मनी नहीं आते तो शायद यह संभव नहीं हो पाता.

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