अमरीका ने माना, दो 'विदेशी' बंधक मारे गए

बराक ओबामा इमेज कॉपीरइट AFP

अमरीका के एक आतंकवाद विरोधी अभियान में कई सालों से चरमपंथी संगठन अल क़ायदा की क़ैद में रहे - एक अमरीकी और एक इतालवी नागरिक की मौत हो गई है.

अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर एक छापे के दौरान अमरीकी नागरिक वॉरेन वाइंस्टीन और इतालवी नागरिक जिओवानी लो पोर्तो की मौत हो गई.

वीडियो देखने के लिए क्लिक करें

अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने घोषणा की है कि ये घटना जनवरी में अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा पर हुई.

वाइंस्टीन के परिवार ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह पाकिस्तान की सरकार और सेना से निराश हैं.

अमरीका ने माना

अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने ये भी कहा है कि इनके साथ दो और अमरीकी भी मारे गए जो 'अल क़ायदा के सदस्य' थे.

अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने ये भी कहा है कि इस अभियान में अल क़ायदा नेता अहमद फ़ारूक़ भी मारा गया. एक अन्य छापे में किसी समय चरमपंथी संगठन के प्रवक्ता माने जाने वाले एडम गदान भी मारे गए.

ओबामा ने व्हाइट हाउस में अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि अमरीका ने इन ठिकानों को इस यकीन के साथ निशाना बनाया था कि वहाँ कोई आम नागरिक नहीं है.

दो साल से अल क़ायदा के कब्ज़े में

ओबामा ने कहा कि वह "इन अभियानों की पूरी ज़िम्मेदारी लेते हैं."

'पाकिस्तान से निराशा'

वॉरेन वाइंस्टीन पाकिस्तान में आर्थिक विकास सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे. 13 अगस्त 2011 को पाकिस्तान में लाहौर स्थित उनके घर से उन्हें बंधक बना लिया गया था. इसके बाद उन्हें साढ़े तीन साल से अधिक समय तक बंधक बनाए रखा गया.

वाइंस्टीन के परिवार ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह पाकिस्तान की सरकार और सेना से निराश हैं.

वाइंस्टीन की पत्नी ने कहा है, “उनके देश को दिए योगदान को देखते हुए वॉरेन की सुरक्षित रिहाई उनके लिए प्राथमिकता होनी चाहिए थी, लेकिन वह इसमें नाकाम रहे.”

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)