एवरेस्ट: 'शिविर से भागो, कुल्हाड़ियां थाम लो'

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माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप में हिमस्खलन से बच गए लोगों की कहानियां रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं.

भूकंप से पैदा हुए हिमस्खलन में कई पर्वतारोहियों को विश्वास हो गया था कि वे शायद जीवित न निकल पाएँ.

इनमें से कई लोगों ने कहा कि वे बहुत लंबे अरसे तक एवरेस्ट पर वापस नहीं आएंगे.

हिमस्खलन में कम से कम 17 लोग मारे गए और 60 घायल हो गए.

रविवार को आए आफ़्टर शॉक ने उस इलाके में बच गए लोगों के दिल में दहशत पैदा कर दी है.

'ऐसा लगा कि मैं मर गया हूँ'

एक व्यक्ति ने कहा कि भूकंप के बाद हिमस्खलन ऐसा था जैसे 'एक 50 मंज़िला सफ़ेद इमारत' ने मेरे पैर उखाड़ दिए हों.

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सिंगापुर में रह रहे पर्वतारोही जॉर्ज फ़ाउलशैम ने एएफ़पी को बताया, "मैं भागा और हिमपात ने मुझे गिरा दिया. मैंने फिर उठने की कोशिश की और इसने मुझे फिर गिरा दिया. मैं सांस नहीं ले पा रहा था, ऐसा लगा कि मैं मर गया हूं."

"अंततः जब मैं खड़ा हुआ तो मुझे यकीन नहीं हुआ कि हिमस्खल मेरे ऊपर से गुज़र गया था और मैं करीब-करीब अनछुआ रह गया था."

'शिविर से भागो, कुल्हाड़ियों थाम लो'

हनीमून मनाने गई ब्रितानी जोड़ी एलेक्स चैप्पैटे और उनके पति सैम श्नाइडर एवरेस्ट पर अपनी पहले स्तर की चढ़ाई कर कैंप 1 में लौटे ही थे कि भूकंप आया.

एलेक्स ने अपने ब्लॉग में लिखा, "ज़मीन बहुत बुरी तरह हिलने लगी और इससे पहले हम कोई प्रतिक्रिया दे पाते डैन (पर्वतारोही समूह का मुखिया) चिल्लाने लगा, 'अपने शिविरों से बाहर भागो.... अपनी बर्फ़ काटने की कुल्हाड़ियां थाम लो'."

"हम लड़खड़ाकर बाहर निकले तो देखा कि हिमस्खलन सीधा हम पर ही होने जा रहा था. हवा के तेज झोंके ने हमें गिरा दिया लेकिन हम उठने में कामयाब हो गए. कुछ शिविरों के पीछे जाकर छुप गए और अपनी कुल्हाडियों को बर्फ़ में गाड़ कर पकड़ लिया."

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उन्होंने यह भी लिखा कि वह बर्फ़ से अपने टैंटों को निकालने में कामयाब हो गए क्योंकि उन पर थोड़ी ही बर्फ़ पड़ी थी और फिर सुरक्षित जगह चले गए.

एलेक्स न पोस्ट में रविवार की सुबह के बारे में लिखा - 'शानदार सूर्य की किरणें और चोटी के अद्भुत नज़ारे अद्वितीय हैं.'

उन्होंने लिखा, "हमें खाना मिल गया है और शेरपा बहुत कमाल के हैं. हम ठीक हैं."

'तीन तरफ़ हिसस्खलन, कैंप बना टापू'

लेकिन दिन में आए और आफ़्टर शॉक्स ने शिविर में डर और चिंता का माहौल बना दिया.

पर्वतारोही डेनियल माज़ुर ने ट्वीट किया, "आफ़्टरशॉक @ दोपहर के 1 बजे! कैंप 1 में यह सब डरावना है. तीन तरफ़ हिमस्खलन है. सी 1 छोटा सा टापू बन गया है. हमें चिंता है कि नीचे आइसफॉल में मौजूद दल का क्या हुआ होगा. जिंदा होंगे?"

कई घायलों को बेस कैंप से हवाई एंबुलेंस से ले जाया गया लेकिन सभी इतने ख़ुशकिस्मत नहीं थे.

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अमरीकी पर्वतारोही और कॉर्डियोलॉजिस्ट एलेन गैलेंट ने एएफ़पी को बताया कि कैसे उन्होंने हिमस्खलन में घायल लोगों की मदद की, लेकिन एक नेपाली युवक की उनके सामने मौत हो गई.

"नौ मरीज़ों में से एक, 25 वर्षीय शेरपा की कल रात मौत हो गई. उसका रक्तचाप गिर गया था और हम कुछ नहीं कर सकते थे."

"जब आप मेडिकल स्कूल में जाते हैं तो आपको सामने मौजूद काम पर ध्यान केंद्रित करने को कहा जाता है. लेकिन अब, जबकि गुबार थम गया है, मुझे उससे बहुत तकलीफ़ हो रही है. उस युवक की मौत नहीं होनी चाहिए थी."

'ये पहाड़ बहुत दर्द दे रहा है'

इस हिमस्खलन में बच गए कुछ लोग पर्वतारोहण के भविष्य के बारे में सोच रहे हैं. महज़ एक साल पहले एवरेस्ट के इतिहास के सबसे भयंकर हिमस्खलन में 16 शेरपाओं की मौत हो गई थी.

नेपाली रसोइए कांचामान तमांग का कहना है कि पिछले साल के हादसे के बाद उन्होंने अपने परिवार को विश्वास दिलाया था कि बेस कैंप में वह सुरक्षित रहेंगे.

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उन्होंने एएफ़पी से कहा, "यह सीज़न तो ख़त्म हो गया- रास्ते बर्बाद हो गए हैं, आइसफॉल की सीढ़ियां टूट गई हैं."

"मुझे नहीं लगता कि मैं अगले साल यहां वापस आऊंगा- यह पहाड़ बहुत दर्द दे रहा है."

फ़ाउलशैम कहते हैं कि एवरेस्ट पर चढ़ने का उनका सपना शायद अब ख़त्म हो गया है.

उन्होंने कहा, "मैं सालों से एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए पैसे बचा रहा था (लेकिन) ऐसा लगता है कि पहाड़ चाहता है कि अभी उस पर न चढ़ा जाए."

"दो साल में इसे दो बार देखना कुछ ज़्यादा ही इत्तेफ़ाक है."

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