भूकंप के बाद तंबुओं का देश बनता नेपाल

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शनिवार को आए भूकंप के बाद नेपाल तंबुओं के देश में तब्दील होता नज़र आ रहा है.

इस भूकंप से अब तक क़रीब 2,500 लोग मारे गए हैं जिसे पिछले 80 साल में सबसे भयंकर बताया जा रहा है.

इस भूकंप की वजह से राजधानी काठमांडू में बहुत से लोगों के घर ध्वस्त हो चुके हैं.

रविवार को भी भूकंप के झटके महसूस किए गए जिसकी वजह से भी कई लोग अपने घरों में वापस जाने से डर रहे हैं.

ऐसा माना जा रहा है कि मध्य नेपाल के हज़ारों लोगों ने दूसरी रात भी घर के बाहर बिताई.

नेपाली टाइम्स का कहना है कि लोग खुली जगहों पर आश्रय ले रहे हैं.

सुदूर इलाक़ों की ख़बर नहीं

भूकंप के बाद आने वाले झटके से माउंट एवरेस्ट पर हिमस्खलन शुरू हो गया जिसमें कम से कम 17 लोग मारे गए और 61 लोग घायल हो गए.

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काठमांडू में ध्वस्त हुई इमारतों के मलबे से पीड़ितों को निकालने का काम जारी है.

हालांकि सुदूर इलाक़ों के बारे में अभी हालत साफ़ नहीं है क्योंकि ऐसे इलाक़े बिल्कुल कट गए हैं और वहां तक पहुंचना मुश्किल है.

नेपाल के सूचना और प्रसारण मंत्री मिनेंद्र रिज़ाल ने बताया है कि दूर दराज के इलाक़ों का जायज़ा लेने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है.

खुले में इलाज

भूकंप के बाद आए झटके से अस्पताल भी प्रभावित हैं ऐसे में घायल मरीज़ों का इलाज बाहर ही किया जा रहा है.

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक काठमांडू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर एक टेंट के भीतर ही अस्पताल चला रहे हैं.

भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय का कहना है, "निजी और सरकारी अस्पतालों के पास जगह की कमी है इस वजह से मरीज़ों का इलाज खुले में किया जा रहा है."

नेपाल की मदद के लिए दुनिया के कई देश आगे आए हैं और यहां कुछ विदेशी टीम पहले से ही आकर राहत और बचाव कार्य में मदद दे रही है.

हालांकि भारी बारिश की वजह से स्थिति और बिगड़ रही है.

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