घर से काम: ड्रीम जॉब या मुश्किलों को न्योता?

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यदि घर से काम करने की आज़ादी हो....काम का समय ख़ुद तय करें, बिस्तर में लेटे आराम से दफ़्तर के फ़ोन कॉल्स सुनें...ये तो कोई ड्रीम जॉब की तरह लगता है.

लेकिन, असलियत इससे कुछ अलग ही है और घर से काम करना उतना आसान नहीं जितना पहले पहल लगता है.

दफ़्तर के वातावरण का अभाव, लंबे समय तक सहकर्मियों से आमने-सामने मुलाकात न होना, कामकाज की औपचारिक व्यवस्था न होना, केवल आपकी प्रोडक्टिविटी को ही प्रभावित नहीं करता बल्कि आपको क्रेज़ी कर सकता है.

इस सप्ताह लिंक्डइन इंफ्लूयेंशर्स पर दो एक्सपर्ट्स ने इसी मुद्दे पर चर्चा की है.

जस्टिन सीले, लायंडा डॉट कॉम के लेखक

सीले ने पिछले साल ही दफ़्तर में काम करने के बदले रिमोट वर्किंग या घर से काम करने का विकल्प चुना. उन्होंने हाउ टू वर्क फ्रॉम होम विदाउट गोइंग क्रेजी (बिना बौखलाए घर से काम करना) पोस्ट में माना कि ऐसा करना आसान नहीं है.

सीले बताते हैं, "दफ़्तर के बदले घर से काम करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है, ऐसा करने में शुरू-शुरू में तो ख़ूब ग़लतियां होती हैं. लेकिन अब मैं व्यवस्थित हो चुका हूं तो मुझे लगता है कि मैंने घर से काम करने का सही तरीका ढूंढ निकाला है."

सीले के अहम सुझाव-

1. समय का संतुलन-

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घर से काम करने वालों के लिए ये समझना अहम है. मैं पूरा दिन काम करता रहता था, कई बार तो काम के निर्धारित घंटों से भी ज्यादा. ऐसा इसलिए क्योंकि मैं अलग टाइम-ज़ोन में था और अपने दफ़्तर के लोगों से ऑनलाइन कनेक्टिड रहने की चाह में मैं डबल-ट्रिपल शिफ़्ट करता रहता था.

लेकिन यह बहुत दिनों तक चलता नहीं है. मैंने तय किया कि जब मेरे साथी दफ़्तर में काम कर रहे होंगे, तभी मैं घर पर काम करूंगा. लेकिन इसके लिए मुझे अपनी दिनचर्या बदलनी पड़ी.

2. काम के घंटे-

घर पर काम करने के बावजूद मैं काम के घंटे पूरे होने के बाद, काम करना बंद करने लगा. इसके लिए मैंने क्लॉक आउट की व्यवस्था अपनाई. तय समय के बाद मैं खुद को काम से पूरी तरह अलग कर लेता हूं. पहले दफ़्तर से निकलने के बाद भी ये संभव नहीं होता था क्योंकि ड्राइव करते समय भी कुछ न कुछ करता रहता था.

3. वर्क स्पेस का होना-

घर से काम करने के लिए वर्क स्पेस का होना ज़रूरी है. घर से काम करते हुए बेड और सोफ़े पर बैठकर या लेट कर काम नहीं करना चाहिए. घर में एक शांत कोना चुनिए, जहां से काम कर सकें. उसे वर्क स्पेस में बदलिए. वहां केवल काम ही हो, इसे सुनिश्चित कीजिए.

4. टहलने की जगह- घर से काम करने के दौरान ये बात साफ़ है कि आपको ज्यादा टहलने की ज़रूरत ही नहीं होगी. ऐसे में आपके वर्क स्टेशन और बेडरूम के बीच थोड़ी दूरी होनी चाहिए. ताकि काम के बीच में आप कुछ कदम टहल सकें. हां, इस दौरान आप अपने काम के बारे में सोच सकते हैं कि कौन सा काम पूरा करना है, किसे शुरू करना है.

5. कैसे कपड़े पहनें- घर से काम करने का मतलब ये नहीं है कि आप पजामे में काम करते रहें. बल्कि आपको ये समझना चाहिए कि आप हर दिन ऑफ़िस के लिए तैयार हो रहे हैं. सुबह बाथ लीजिए, शेव कीजिए और कपड़े उसी तरह के पहनिए जैसे ऑफ़िस जाने के लिए पहना करते थे. इससे होने वाले बदलाव को आप महसूस करेंगे और आप कहीं ज्यादा उत्साह से काम कर पाएंगे.

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6. सहकर्मियों से भेंट-मुलाकात- घर से काम करने के दौरान सहकर्मियों से संपर्क बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. इसके लिए अपने सहकर्मियों से मेल-मुलाकात की योजना बनाएं, बिना योजना के भी मुलाकात किया करें. इस दौरान कामकाजी बातों के अलावा हल्की फुल्की बातें भी करें.

7. दफ़्तर से संवाद- दफ़्तर के लोगों से संवाद स्थापित करने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा रखें. अगर वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा नहीं हो तो फिर एक अच्छा फ़ोन जरूर रखें.

लिज़ा चिल्वर्स, निदेशक, एथेना बिजनेस सोल्यूशंस

रविवार, को आराम का दिन होता है. इस दिन हम दोस्तों से मिलते हैं, मौज मस्ती करते हैं और आम तौर पर कोई काम नहीं करते. लेकिन चिल्वर्स ने अपनी पोस्ट 'वाई संडे कुड भी योर मोस्ट प्रॉडक्टिव डे' में लिखा है कि रविवार को आधे घंटे का काम आपके अगले सप्ताह की उत्पादकता को बेहतर बना सकता है.

8. रविवार को आधे घंटे का काम- दरअसल हम सोमवार की सुबह ये सोचते हैं कि हमें आज क्या करना है? अगले आधे घंटे तक हम ऐसा सोचते रहते हैं, या फिर किस काम से दिन की शुरुआत करें, इस पर सोचते हैं. इस सोच विचार में हमारी सोमवार की सुबह निकल जाती है. कई बार मंगलवार को भी इसमें वक्त खर्च होता है.

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इससे बचा जा सकता है. लेकिन आपको अगले सप्ताह के कामकाज की रुपरेखा रविवार को ही बनानी होगी. या फिर जिस दिन से आपका कामकाजी सप्ताह शुरू हो रहा हो उससे एक दिन पहले.

यह आधे घंटे के समय में संभव है. सबसे पहले तो आप अपॉयंटमेंट डायरी उठाएँ और देख लें कि किस-किस से मिलना तय है या ज़रूरी है. बैठक की तैयारी से पहले उसका समय मार्क कीजिए. आप अपने रूटीन के कामों के लिए मसलन, ईमेल, सोशल मीडिया इत्यादि के लिए समय निर्धारित कीजिए. इससे आपको बाद में पता चलेगा कि आपने कितना समय बचाया है.

चीजों को पहले से निर्धारित करने से आप पाएंगे कि आप समय से पहले अपने काम को पूरा करने में सफल रहे हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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