नेपालः खुले में पैदा हो रहे हैं बच्चे

नेपाल, स्त्री रोग अस्पताल

कृष्णा बहादुर, उनकी पत्नी और चार वर्ष की बेटी 17 किलोमीटर दूर से काठमांडू आए हैं.

पत्नी करीब नौ महीने की गर्भवती हैं और किसी भी पल शिशु को जन्म दे सकती हैं.

उन्होंने बताया, "दो दिन से हम इस टेंट के नीचे रह रहे हैं. अस्पताल खाली करा दिया गया है. डॉक्टरों ने हमसे कहा है कि जैसे ही पत्नी को दर्द उठे अंदर आकर ख़बर करो. दो नर्सें आकर बच्चे को जन्म दिलवा देंगी".

कृष्णा बहादुर की तरह तमाम लोग ऐसे हैं जो इन दिनों बच्चे की आस में इस अस्पताल परिसर के बीचोंबीच बैठे हैं.

'ख़तरा बढ़ गया था'

दशकों पुराने परोपकार प्रसूति और स्त्री रोग अस्पताल की इमारत में भूकंप के चलते दरार पड़ चुकी है, शीशे टूट चुके हैं और फ़र्श टेढ़ा हो चुका है.

इसकी गिनती नेपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में होती है और यहां दूर-दराज़ से लोग नवजात बच्चों के जन्म के लिए आते हैं.

पच्चीस अप्रैल को जब भूकंप आया तब अस्पताल की तमाम दीवारों में दरारें पड़ गईं और भर्ती किए गए लोगों को बाहर मैदान में निकाला गया.

उसी दिन भूकंप के बाद 25 बच्चों का जन्म हुआ और उसके लिए मैदान में एक बड़ा टेंट लगा दिया गया था.

पिछले करीब 10 दिन में इस अस्पताल के प्रांगण में 390 बच्चों का जन्म हो चुका है और अभी इस बात का पता नहीं कि इस इमारत के भीतर कब काम शुरू होगा.

इस विशालकाय अस्पताल के प्रशासक अमरनाथ अमत्य कहते हैं कि चुनौती बहुत बड़ी है.

उन्होंने कहा, " जब भूकंप आया तब हमने 270 बिस्तर वाली अपनी इमारत को खाली कर दिया क्योंकि ख़तरा बढ़ता जा रहा था."

अस्पताल प्रशासन इसी बात पर ज़ोर देता हैं कि हरसंभव प्रयास लिए जा रहे हैं.

एक सच्चाई यह भी है कि भूकंप प्रभावित कई इलाकों में अभी तक मदद के नाम पर पानी की एक बूंद नहीं पहुंची है.

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