पाकिस्तान में तीसरी बार रुकी एक फांसी

फांसी का फंदा

पाकिस्तान में हत्या के दोषी एक व्यक्ति की मौत की सज़ा पर तीसरी बार रोक लगा दी गई है.

इस व्यक्ति के वकीलों का कहना है कि हत्या का दोषी ठहराए जाने के वक्त उनका मुवक्किल किशोर था.

इस व्यक्ति का नाम शफ़ाक़त हुसैन है जिन्हें बुधवार को फांसी दी जानी थी.

इस्लामाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि दोषी व्यक्ति की अपराध के समय उम्र तय करने के लिए बाक़ायदा पूरी जांच होनी चाहिए.

हाई कोर्ट ने कहा कि जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि क्या इस व्यक्ति पर जुर्म क़बूल करने के लिए दबाव डाला गया था.

शफ़ाक़त हुसैन घटना के समय कराची में एक चौकीदार के तौर पर काम कर रहे थे. तब वहां सात वर्ष के एक लड़के को मृत पाया गया था.

उनके मोबाइल फोन से मृतक के घर कॉल करके फिरौती की मांग की गई थी.

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