हेलिकॉप्टर क्रैश: 'मौत को क़रीब से देखा'

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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हाल में हुई हेलिकॉप्टर दुर्घटना में बाल-बाल बचे विदेशी राजनयिकों का कहना है कि मौत को इतने क़रीब से देखने के बाद ज़िंदा बचना सौभाग्य की बात है.

शुक्रवार को हुई दुर्घटना में नॉर्वे और फिलीपींस के राजदूत समेत छह लोगों की मौत हो गई थी.

मृतकों में मलेशिया और इंडोनेशिया के राजदूतों की पत्नियां और दो पायलट भी शामिल थे.

हेलिकॉप्टर पर छह पाकिस्तानी और ग्यारह विदेशी नागरिक थे.

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हादसे में बाल-बाल बचे हॉलैंड के राजदूत मार्सल डी विंक और मलेशिया के राजदूत हसरूल सानी मुजिताबर.

उन्होंने अपनी आपबीती बयां की.

मार्सल डी विंक, हॉलैंड के राजदूत

हेलिकॉप्टर अचानक गोल-गोल घूमने लगा. इसके बाद मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया.

जब मैंने आंखें खोली तो धुंआ निकलते देखा और कुछ धमाके भी सुने. सब कुछ बहुत जल्दी हुआ. मैं ख़ुद को भाग्यशाली मानता हूं कि इस हादसे में बच गया.

हसरूल सानी मुजिताबर, मलेशिया के राजदूत

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सबकुछ ठीकठाक चल रहा था फिर अचानक हेलिकॉप्टर घूमने लगा और ज़मीन से टकरा गया. पायलट और कुछ सवार तुरंत मारे गए.

कुछ लोग बचने में कामयाब रहे. हेलिकॉप्टर में आग लग गई और धुंआ भर गया था. मैं बीच में बैठा था और रेंगकर पहली सीट पर आने में कामयाब रहा. इसके बाद मैं खिड़की तोड़कर बाहर आ गया.

(पाकिस्तानी तालिबान ने हेलिकॉप्टर को गिराने का दावा किया था लेकिन पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय ने इसे ख़ारिज करते हुए इसे महज़ एक दुर्घटना बताया था. तालिबान ने कहा है कि उनका निशाना नवाज़ शरीफ़ थे जो एक एक दूसरे हेलिकॉप्टर में यात्रा कर रहे थे.)

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