कास्त्रो बोले: 'ईसाइयत की ओर लौटूंगा'

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क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो का कहना है कि वे वेटिकन में पोप फ्रांसिस से मिलकर इतने प्रभावित हुए हैं कि दोबारा ईसाइयत की ओर लौट सकते हैं.

पोप की तारीफ़ करते हुए कास्त्रो ने कहा, "यदि पोप ऐसे ही रहे तो मैं प्रार्थना करना शुरू कर दूंगा और चर्च की ओर लौट आउंगा."

उन्होंने अमरीका और क्यूबा के बीच वार्ता कराने के लिए पोप का शुक्रिया भी किया.

मॉस्को में रूस की दूसरे विश्व युद्ध में विजय की याद में मनाए गए समारोह से लौटते हुए वे वेटिकन में रुक गए थे.

क्यूबा में 1959 की क्रांति के बाद से कैथोलिक चर्च और क्यूबा के बीच संबंध बरक़रार हैं.

सितंबर में पोप फ़्रांसिस क्यूबा होते हुए ही अमरीका जाएंगे.

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रोम में बीबीसी संवाददाता डेविड विली का कहना है कि अमरीका और क्यूबा के बीच वेटिकन में हुई गुप्त वार्ता के ज़रिए दोनों देशों के बीच संबंध बहाल कराना पोप के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है.

क्यूबा की क्रांति के बाद से ही अमरीका ने क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे.

पिछले साल से अमरीका ने इन प्रतिबंधों में ढील देनी शुरू की है.

रविवार को पोप के साथ क़रीब पचास मिनट की निजी मुलाक़ात के बाद कास्त्रों ने पत्रकारों से कहा, "पोप ईसा के समुदाय से हैं. एक तरीके से मैं भी हूँ क्योंकि मैं भी ईसाई स्कूल में पढ़ा हूँ."

राउल कास्त्रो और उनके भाई फिदेल कास्त्रो दोनों ही जन्म से ईसाई हैं लेकिन क्रांति के बाद से क्यूबा में चर्च की अधिकतर धार्मिक गतिविधियों को दबाया गया है.

फ़्रांसिस तीसरे पोप होंगे जो क्यूबा की यात्रा करेंगे. इससे पहले जोन पॉल द्वितीय 1998 में और पोप बेनेडिक्ट 2012 में क्यूबा की यात्रा कर चुके हैं.

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